जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का हुआ निधन: दिल्ली के RML अस्पताल में ली अंतिम सांस

khabar pradhan

संवाददाता

5 August 2025

अपडेटेड: 10:19 AM 0thGMT+0530

5 अगस्त 2025: जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद 79 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
और आज मंगलवार दोपहर 1:12 पर दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अंतिम सांस ली ।
वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। हालत बिगड़ने पर उन्हें 11 मई को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

कौन हैं सत्यपाल मलिक:

सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई को 1946 को एक जाट परिवार में हुआ था। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था उनका पालन पोषण उनकी माता जगनी देवी ने किया था।
वे उत्तर प्रदेश के बागपत के हिसावदा गांव के निवासी थे। मेरठ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही 1965 में छात्र राजनीति में प्रवेश किया।
मेरठ विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय से स्नातक और उसके बाद एलएलबी की डिग्री प्राप्त की साल 1968 69 में मेरठ के विश्वविद्यालय में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। यहीं से उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।

राजनीतिक जीवन:
उत्तर प्रदेश के विधानसभा सदस्य के रूप में उनका पहरी का पहला कार्यकाल 1974 से 77 के बीच रहा।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह के क्रांति दल के साथ 1974 के विधानसभा चुनाव में बागपत सीट से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुंचे।

इसके बाद 1980 से 1986 तक और 1986 से 1989 तक उत्तर प्रदेश के राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया।
1989 से 1991 तक जनता दल के सदस्य के रूप में अलीगढ़ से लोकसभा के सदस्य रहे।

लोक दल छोड़कर कांग्रेस में हुए शामिल:
1975 में लोक दल के गठन के बाद उन्हें अखिल भारतीय महामंत्री भी नियुक्त किया गया जिसमें 1980 में लोक दल के प्रतिनिधि के रूप में राज्यसभा पहुंचे।
इसके बाद 1984 में सत्यपाल मलिक ने लोक दल छोड़कर कांग्रेस से में शामिल हो गए।

जहां 1986 में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर राज्यसभा में भेजे गए और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री नियुक्त हुए।
1987 में बोफोर्स घोटाला का खुलासा हुआ। इस बोफोर्स घोटाले से दुखी होकर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया । और जन मोर्चा में शामिल हो गये तभी बीपी सिंह के साथ जुड़ गए।
1988 में जनता दल में शामिल हुए और 1991 तक जनता दल के प्रवक्ता और सचिव रहे ।इसके बाद 1989 में जनता दल के टिकट पर ही अलीगढ़ से सांसद बने।

भाजपा में भी रहे शामिल:
सत्यपाल मलिक 2004 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और बागपत लोकसभा से चुनाव लड़ा। किंतु इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा । इसके बाद 2005 और 2006 में उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष बने । वही 2009 में भाजपा किसान मोर्चा के अखिल भारतीय प्रभारी बने ।

साल 2014 में भाजपा के उपाध्यक्ष रहे और कृषि संबंधी मुद्दों पर किसानों के कल्याण हेतु उप समिति के अध्यक्ष बने । राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में सक्रियता से काम किया। 2017 में बिहार के राज्यपाल बने और 2018 में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनाए गए।

जम्मू कश्मीर के बने राज्यपाल:

सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर के 10 में और अंतिम राज्यपाल रहे। नियुक्त होने वाले पहले राजनीतिक क्षेत्र थे। क्योंकि जम्मू कश्मीर एक संवेदनशील स्थान था और यहां हमेशा सैन्य अधिकारी और नौकरशाही के हाथ में राज्य की कमान होती थी।
उनके कार्यकाल में ही अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय हुआ । जम्मू कश्मीर दो केंद्र प्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित हुआ। ऐसे ऐतिहासिक फैसले और बदलाव के साक्षी बने सत्यपाल मलिक।

विवादों में भी घिरे:
सत्यपाल मलिक जम्मू कश्मीर में विकास के कार्य शिक्षा स्वास्थ्य और यहां के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कई फैसले लिए।
पुलवामा पुलवामा हमले और सुरक्षा मामले में भ्रष्टाचार के मामले में उनके बयान विवादों का हिस्सा भी बने।
30 अक्टूबर 19 2019 को जम्मू कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हो गया और वह केंद्र शासित प्रदेश बन गया इसी के साथ सत्यपाल मलिक का कार्यकाल संपूर्ण हुआ और वह जम्मू कश्मीर के अंतिम राज्यपाल के रूप में अपना नाम दर्ज कराया।

सत्यपाल मलिक का परिवार:
सत्यपाल मलिक के परिवार में उनकी पत्नी बेटा और पुत्रवधू है।
उनकी पत्नी इकबाल मलिक पर्यावरण विद् है और उनका बेटा कबीर ग्राफिक डिजाइनर है ।उनकी पुत्रवधू का नाम निविदा चंदा है।
उनका परिवार दिल्ली में 1980 से ही रह रहा है।

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