मां नैना देवी शक्तिपीठ: जहां गिरे थे माता के नेत्र, जानें- आस्था और शक्ति का संगम
संवाददाता
24 September 2025
अपडेटेड: 9:18 AM 0thGMT+0530
24 सितंबर 2025: श्री नैना देवी शक्तिपीठ, मां भगवती का 5000 साल पुराना 51 शक्तिपीठ में से एक: श्रद्धा, आस्था और शक्ति का संगम
भारतभूमि देवी-देवताओं की कथाओं और शक्ति की आराधना से परिपूर्ण है। यहाँ 51 शक्तिपीठों का उल्लेख मिलता है, जो माता सती के अंग-पतन से बने।
इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है- श्री नैना देवी शक्तिपीठ, जो हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में समुद्र तल से लगभग 1210 मीटर ऊँचाई पर स्थित है। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि हिमालय की गोद में बसा हुआ एक प्रसिद्ध तीर्थ और पर्यटन स्थल भी है।
पौराणिक कथा:
दक्ष प्रजापति के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने पर माता सती ने यज्ञ अग्नि में आत्मदाह कर लिया। भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में विचरण करने लगे। तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहाँ-वहाँ शक्तिपीठ बने।
मान्यता है कि हिमाचल प्रदेश की इस पावन भूमि पर माता सती की दो आँखें (नयन) गिरी थीं। इसी कारण यहाँ देवी का नाम नैना देवी पड़ा और यह स्थान नैना देवी शक्तिपीठ कहलाया।
धार्मिक महत्व:
आस्था का केंद्र – माता नैना देवी को सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी माना जाता है।
51 शक्तिपीठों में प्रमुख – यहाँ देवी की पूजा शक्ति के स्वरूप के रूप में की जाती है।
शक्ति और भक्ति का संगम – मंदिर में भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि का विशेष महत्व – चैत्र और शारदीय नवरात्रि में लाखों भक्त यहाँ पहुँचते हैं।
मंदिर का इतिहास और स्थापत्य:
प्राचीन शास्त्रों और लोककथाओं में इसका उल्लेख मिलता है।
वर्तमान मंदिर का स्वरूप समय-समय पर राजाओं और भक्तों द्वारा पुनर्निर्मित कराया गया।
मंदिर ऊँचाई पर स्थित है और यहाँ पहुँचने के लिए सीढ़ियों, रोपवे और सड़क मार्ग की सुविधा उपलब्ध है।
गर्भगृह में माता नैना देवी की प्रतिमा स्थापित है। साथ ही यहाँ भैरव और गणेश की प्रतिमाएँ भी पूजित हैं।
मंदिर परिसर से गोविंद सागर झील और आसपास की पर्वतमालाओं का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
पौराणिक और लोक मान्यताएँ:
कहा जाता है कि गुरु गोविंद सिंह ने मुगलों के विरुद्ध युद्ध के समय यहीं पर देवी का आशीर्वाद लिया था।
माहिषासुर राक्षस वध कथा – मान्यता है कि इसी क्षेत्र में देवी ने महिषासुर राक्षस का वध किया था।
भक्त मानते हैं कि जो भी सच्चे मन से माता नैना देवी की पूजा करता है, उसकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं।
पूजा-पद्धति:
मंदिर में सुबह और शाम की आरती होती है।
भक्त नारियल, चुनरी, फूल और प्रसाद अर्पित करते हैं।
नवरात्रि में विशेष भंडारे और अनुष्ठान होते हैं।
यहाँ बलि प्रथा पहले प्रचलित थी, परंतु अब प्रतीकात्मक रूप में नारियल बलि दी जाती है।
त्योहार और उत्सव:
नवरात्रि – चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहाँ विशाल मेले का आयोजन होता है।
श्रावण अष्टमी मेला – यहाँ का प्रमुख वार्षिक उत्सव है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
विशेष पर्व – दुर्गाष्टमी, पूर्णिमा और अमावस्या पर भी भक्तों की भीड़ रहती है।
यात्रा मार्ग:
स्थान – जिला बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश
निकटतम हवाई अड्डा – चंडीगढ़ एयरपोर्ट (लगभग 100 किमी)
निकटतम रेलवे स्टेशन – आनंदपुर साहिब (लगभग 30 किमी) और किरतपुर साहिब
सड़क मार्ग – चंडीगढ़, किरतपुर और बिलासपुर से बस/टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।
रोपवे सुविधा – मंदिर तक पहुँचने के लिए रोपवे भी उपलब्ध है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।
आसपास के दर्शनीय स्थल:
गोविंद सागर झील – भाखड़ा बाँध से बनी कृत्रिम झील, जहाँ नौकायन का आनंद लिया जा सकता है।
भाखड़ा नंगल बाँध – एशिया का सबसे बड़ा बाँध, जो नैना देवी से नजदीक है।
आनंदपुर साहिब – सिख धर्म का प्रसिद्ध तीर्थ, मंदिर से लगभग 20–25 किमी दूर।
किरतपुर साहिब – ऐतिहासिक धार्मिक स्थल।
स्वारघाट – हिमाचल की खूबसूरत पहाड़ी बस्ती, जो पर्यटन के लिए उपयुक्त है।
प्राकृतिक और पर्यटन महत्व:
माता नैना देवी का मंदिर समुद्र तल से लगभग 1210 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से चारों ओर फैले पहाड़, जंगल और झीलें अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य यहाँ से अत्यंत मनमोहक होता है।
पर्यटकों के लिए यह स्थान आध्यात्मिकता और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। यही कारण है कि यहाँ केवल भक्त ही नहीं, बल्कि प्रकृति-प्रेमी और पर्यटक भी बड़ी संख्या में आते हैं।
श्री नैना देवी शक्तिपीठ न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि पूरे भारत की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। यहाँ माता सती के नयन गिरे थे, इसलिए यह स्थान दिव्य शक्ति से परिपूर्ण माना जाता है। मंदिर का आध्यात्मिक महत्व, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे अद्वितीय बनाते हैं।
जो भी श्रद्धालु यहाँ आता है, वह माँ नैना देवी की कृपा और आशीर्वाद पाकर ही लौटता है। यही कारण है कि इसे शक्ति की नगरी कहा जाता है और यह स्थान हर भक्त के लिए जीवन में एक बार अवश्य दर्शन करने योग्य है।