IAS संतोष वर्मा मामला :2 जज और एक बाबू निलंबित, 1जज का हुआ ट्रांसफर:
संवाददाता
24 December 2025
अपडेटेड: 4:30 PM 0thGMT+0530
इंदौर में IAS संतोष वर्मा पर धोखाधड़ी के मामले में न्यायिक भ्रष्टाचार, फर्जी आदेश और न्यायिक अधिकारियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगे हैं।
IAS संतोष वर्मा मामले में एक और कड़ी जुड़ गई है। फर्जी आदेश देने वाले जज को निलंबित कर दिया गया है और उस आदेश को टाइप करने वाले बाबू को जमानत देने वाले जज का ट्रांसफर कर दिया गया है।
विवादों में घिरे वर्मा को बरी करने के मामले में न्याय विभाग में एक और कड़ी जुड़ती हुई दिखाई दे रही है। इस केस में पहले से ही उलझे हुए अपर सत्र न्यायाधीश विजेंद्र रावत को अग्रिम जमानत देने वाले अपर सत्र न्यायाधीश प्रकाश केसर का इंदौर से सीधी ट्रांसफर कर दिया गया है।
5 दिसंबर को ही न्यायाधीश कसेर ने निलंबित एडीजे रावत की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाया था। एडीजे कसेर की कोर्ट ने आदेश में यह लिखा था कि पुलिस ने डीपीओ अकरम शेख के मोबाइल से जरूरी डेटा पहले ही निकाल दिया था और कंप्यूटर की हार्ड डिस्क जफ्त कर ली गई थी। साक्ष्य अधिनियम के कानून के तहत कई अन्य दस्तावेजों से पुलिस सबूत प्रमाणित कर सकती है। आदेश में यह भी लिखा गया कि मामले में पुलिस को नए तथ्य मिलने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में निलंबित एडीजे रावत को जमानत दी जा सकती है। आदेश के 16 वें दिन ही हाई कोर्ट से आदेश जारी किया गया था। हाई कोर्ट के रजिस्टार जनरल ने 21 दिसंबर को आदेश जारी किया । जिसमें एडीजे कसेर को इंदौर से सीधी के रामपुर नेकिन में अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्त किया।
पिछले एक माह में इस हाई प्रोफाइल केस से जुड़े दो आरोपियों को राहत दी थी। उन्होंने पहले निलंबित एडीजे विजेंद्र सिंह रावत को अग्रिम जमानत दी। जिन पर संतोष वर्मा को बरी करने का फर्जी आदेश तैयार करने का आरोप है। इसके बाद इसी मामले में रावत की कोर्ट में पदस्थ रहे बाबू नीतू सिंह को भी जमानत दी गई। नीतू सिंह को पुलिस ने 18 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। मजिस्ट्रेट ने उसे 20 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया। रिमांड अवधि के दौरान ही नीतू ने जमानत अर्जी लगाई । पुलिस ने रिमांड का हवाला देकर केस डायरी पेश नहीं की । इसके बावजूद भी एडीजे कसेर ने सुनवाई कर जमानत दे दी।
रिमांड अवधि में ही जमानत:
जमानत आदेश में एडीजे कसेर ने यह उल्लेख किया कि पुलिस की यह धारणा गलत है कि रिमांड अवधि में जमानत नहीं दी जा सकती । इस आदेश में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि किसी भी आरोपी को जमानत अर्जी दायर करने के हक से वंचित नहीं किया जा सकता।