राष्ट्रीय ध्वज का महत्व: झंडा फहराने के नियम, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में झंडा फहराने के नियम
संवाददाता
14 August 2025
अपडेटेड: 7:31 AM 0thGMT+0530
14 अगस्त 2025: हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज- तिरंगा -केवल एक झंडा नहीं है बल्कि हमारे देश की आन-बान, शान और आजादी का प्रतीक है।
यह हमारा राष्ट्रीय ध्वज भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता का प्रतीक है।
हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहा जाता है। इसमें सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद, सबसे नीचे हरा रंग होता है। बीच की सफेद पट्टी के बीचो-बीच एक नीले रंग का चक्र होता है। जिसे अशोक चक्र कहते हैं। इस अशोक चक्र में 24 तीलिया होती है।
तिरंगा हमेशा आयताकार आकार में होता है जो 3:2 के अनुपात में होता है।
ध्वज के रंगों का महत्व:
केसरिया जो शक्ति और साहस का प्रतीक है ।सफेद रंग सत्य के साथ शांति का प्रतीक है। हरा रंग उर्वरता वृद्धि और भूमि की पवित्रता का प्रतीक है।
चक्र:
इस चक्र को विधि का चक्र कहते हैं जो सम्राट अशोक के द्वारा बनाए गए सारनाथ सिंह स्तंभ से लिया गया है। चक्र का अर्थ है जीवन गतिशील है और यह चलता रहता है।
अशोक चक्र का नीला रंग आकाश महासागर और सार्वभौमिक सत्य को दर्शाता हुआ होता है। 24 तीलिया मनुष्य के 24 गुणों के प्रतीक के रूप में दर्शाते हैं। जो दिन के 24 घंटे के महत्व को बताती हैं।
तिरंगे का इतिहास:
हर स्वतंत्र देश का अपना एक ध्वज होता है।यह एक संकेत है, देश के स्वतंत्र होने का। एक संविधान सभा की बैठक 22 जुलाई 1947 को आयोजित की गई थी ।
जिसमें इसके वर्तमान स्वरूप को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया था।
राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नियम:
राष्ट्रीय पर्वों पर यह ध्वज फहराया जाता है। देश के सभी महत्वपूर्ण सरकारी भवन पर राष्ट्रीय ध्वज लगा होता है। विदेश में भी जहां-जहां भारतीय दूतावास हैं, वहां यह ध्वज लगाया जाता है। जब किसी आदरणीय नेता या मित्र देश के किसी मान्य व्यक्ति का स्वर्गवास होता है ,तब इसे भारतीय जनता के शोक के प्रतीक के रूप में झुका दिया जाता है। इस प्रकार दिवंगत व्यक्ति के प्रति भारतीय जनता का आदर भाव भी प्रकट होता है।
हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना चाहिए ।
1.इस ध्वज को फहराते समय केसरिया रंग की पट्टी को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
2.राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा अन्य कोई चिह्न या दूसरा ध्वजा नहीं होना चाहिए।
3.यदि किसी अन्य ध्वज को फहराने हो तो वह सब राष्ट्रीय ध्वज के भाई और या उससे नीचे होना चाहिए।
4.राष्ट्रीय ध्वज महत्वपूर्ण सरकारी इमारत पर फहराना चाहिए।
5.जुलूस में राष्ट्रीय ध्वज ले जाते समय उसे दाहिने कंधे पर लेकर सबसे आगे चलना चाहिए।
6.महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्वों पर या अन्य अवसरों पर इस ध्वज को फहराना चाहिए। 7.सामान्य जन को मोटर कार और अन्य वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराना चाहिए।
8.इस ध्वज को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक फहराना चाहिए सूर्यास्त के समय झंडा उतार लेना चाहिए।
9.इस ध्वज का उपयोग सजावट के कपड़े की तरह नहीं करना चाहिए किसी व्यापार में भी इस ध्वज का उपयोग नहीं करना चाहिए।
10.ध्वजारोहण के समय तिरंगा झंडा किसी भी प्रकार जमीन को नहीं छोड़ना चाहिए ।
11.तिरंगे को ऐसी जगह फहराना चाहिए कि वह हर किसी को दिखाई दे।
12.जिस जगह तिरंगा फहराया जा रहा है उसे समय वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर होना चाहिए और झंडा उसके दाहिनी और होना चाहिए।
13.तिरंगा को कभी भी उल्टा नहीं फहराना चाहिए।
14. तिरंगा को हमेशा सम्मान और आदर के साथ रखना चाहिए।
- तिरंगा पर कभी भी कुछ भी नहीं लिखना चाहिए।
- तिरंगे को पानी में नहीं डूबाना चाहिए।
कभी भी कटा फटा तिरंगा नहीं फहराना चाहिए।
झंडा फहराने का सही तरीका:
15 अगस्त और 26 जनवरी को झंडा फहराने के नियम:
15 अगस्त के दिन झंडा नीचे की ओर बंधा होता है। जिसे रस्सी खींचकर ऊपर की ओर खींचा जाता है। जिससे झंडा की रस्सी खुल जाती है और झंडा फहरा जाता है इससे फहराना कहते हैं।
झंडा खोलते ही झंडा ऊपर की ओर फहराने लगता है। यह स्वतंत्रता और आजादी का प्रतीक है । इस दिन लाल किले में प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं।
किंतु 26 जनवरी को झंडा पहले से ही ऊपर होता है इसका सिर्फ उद्घाटन किया जाता है। 26 जनवरी को भारत के राष्ट्रपति राष्ट्रीय ध्वज को फहराते हैं फिर राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी जाती है और राष्ट्रगान गाया जाता है । गणतंत्र दिवस देश की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस संविधान लोकतंत्र और एकजुट के महत्व को दर्शाता है।