संघ का अनोखा कदम: इंदिरा गांधी के मंत्री को बनाया मुख्य अतिथि
संवाददाता
31 May 2025
अपडेटेड: 10:54 AM 0stGMT+0530
Indira Gandhi's minister made the chief guest,
भागवत के साथ साझा करेंगे मंच
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने एक बार फिर अपने समावेशी और उदार दृष्टिकोण से सबको चौंका दिया है। नागपुर में आयोजित होने वाले एक बड़े समारोह में RSS ने पूर्व कांग्रेसी दिग्गज और इंदिरा गांधी व नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री रहे एक वरिष्ठ नेता को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। इस समारोह में RSS प्रमुख मोहन भागवत के साथ यह नेता मंच साझा करेंगे, जो भारतीय राजनीति और सामाजिक एकता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन सकता है। इस खबर ने न केवल सियासी हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा का केंद्र बन गई है। यह कदम RSS की उस सोच को दर्शाता है, जो विचारधारा से परे राष्ट्रीय एकता और संवाद को बढ़ावा देती है।
संघ का नया संदेश: एकता की अनोखी मिसाल
RSS का यह फैसला अपने आप में एक अनोखी पहल है। संगठन, जो अक्सर अपनी हिंदुत्ववादी विचारधारा के लिए चर्चा में रहता है, ने इस बार एक ऐसे नेता को मंच पर लाने का निर्णय लिया, जो दशकों तक कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में से एक रहे। यह नेता इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव की सरकारों में महत्वपूर्ण मंत्रालयों का हिस्सा थे और अपनी सादगी व सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। RSS के इस कदम को कई लोग भारतीय राजनीति में वैचारिक मतभेदों को पाटने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास मान रहे हैं। समारोह में मोहन भागवत के साथ इस नेता की मौजूदगी न केवल एकता का संदेश देगी, बल्कि यह भी दर्शाएगी कि राष्ट्रहित के लिए सभी को एक मंच पर आना चाहिए।
कौन हैं यह दिग्गज नेता?
हालांकि RSS ने अभी तक इस नेता का नाम आधिकारिक रूप से उजागर नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के हवाले से यह खबर सामने आई है कि यह वही नेता हैं, जिन्होंने 1970 और 1990 के दशक में कांग्रेस सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके सामाजिक कार्य, खासकर आदिवासी और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयास, आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं। इस नेता का RSS के मंच पर आना इसलिए भी खास है, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब RSS ने विपरीत विचारधारा के लोगों को अपने मंच पर आमंत्रित किया है। इससे पहले भी संगठन ने कई गैर-राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों को अपने आयोजनों में शामिल किया है, लेकिन इस बार का कदम सियासी दृष्टिकोण से ज्यादा चर्चा में है।
मोहन भागवत का विजन: समावेशी भारत
RSS प्रमुख मोहन भागवत लंबे समय से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता की बात करते रहे हैं। इस समारोह में एक पूर्व कांग्रेसी नेता को मुख्य अतिथि बनाना उनके उस विजन को दर्शाता है, जिसमें सभी विचारधाराओं को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय हितों पर चर्चा हो। भागवत ने हाल के वर्षों में कई बार कहा है कि भारत की प्रगति तभी संभव है, जब सभी लोग अपने मतभेद भुलाकर एक साथ आएं। इस आयोजन को लेकर RSS के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “हमारा उद्देश्य विचारधारा से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। इस मंच पर सभी का स्वागत है, जो भारत की एकता और अखंडता के लिए काम करना चाहते हैं।”
सियासी हलकों में हलचल
इस खबर ने सियासी गलियारों में खलबली मचा दी है। जहां कुछ लोग इसे RSS की समावेशी सोच का प्रतीक मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे कांग्रेस के लिए एक सियासी चुनौती के रूप में देख रहे हैं। विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, के लिए यह स्थिति असमंजस वाली हो सकती है, क्योंकि उनके एक पूर्व दिग्गज का RSS के मंच पर जाना कई सवाल खड़े करता है। सोशल मीडिया पर इस खबर को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक यूजर ने लिखा, “RSS का यह कदम साबित करता है कि राष्ट्रहित के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।” वहीं, एक अन्य यूजर ने इसे सियासी ड्रामा करार दिया। बावजूद इसके, यह आयोजन चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर
इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर हलचल मच गई। कई यूजर्स ने RSS की इस पहल की सराहना की, जबकि कुछ ने इसे एक सियासी चाल के रूप में देखा। एक यूजर ने लिखा, “RSS ने दिखा दिया कि विचारधारा से ज्यादा देश महत्वपूर्ण है। यह एक ऐतिहासिक पल है।” वहीं, कुछ लोगों ने इस आयोजन को कांग्रेस के लिए एक संदेश के रूप में देखा, जिसमें RSS अपनी व्यापक स्वीकार्यता को प्रदर्शित करना चाहता है। इस खबर ने न केवल सियासी विश्लेषकों, बल्कि आम जनता का भी ध्यान खींचा है।
RSS का इतिहास और समावेशी कदम
RSS का इतिहास विभिन्न विचारधाराओं के साथ संवाद का रहा है। संगठन ने समय-समय पर गैर-राजनीतिक हस्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और यहां तक कि विपरीत विचारधारा के नेताओं को अपने मंच पर आमंत्रित किया है। यह आयोजन भी उसी दिशा में एक कदम है, जो यह दर्शाता है कि RSS अपनी विचारधारा को और व्यापक बनाने के लिए तैयार है। यह कदम खासकर उस समय महत्वपूर्ण है, जब देश में ध्रुवीकरण और वैचारिक मतभेदों की बातें जोरों पर हैं।
एकता की नई मिसाल
RSS का यह फैसला न केवल एक सियासी घटना है, बल्कि यह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इंदिरा गांधी और नरसिम्हा राव की सरकार में मंत्री रहे एक दिग्गज नेता का मोहन भागवत के साथ मंच साझा करना निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक पल होगा। यह आयोजन यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए, चाहे उनकी विचारधारा कुछ भी हो। यह कदम न केवल RSS की समावेशी सोच को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है। यह आयोजन आने वाले समय में भारतीय सियासत और सामाजिक ताने-बाने में एक नया अध्याय जोड़ सकता है।