इन्द्राक्षी शक्तिपीठ: 51 शक्तिपीठों में से एक, जहां गिरी थी माता सती की पायल
संवाददाता
30 September 2025
अपडेटेड: 11:27 AM 0thGMT+0530
30 September 2025 : इन्द्राक्षी शक्तिपीठ आध्यात्मिक आस्था का दिव्य केंद्र, श्रीलंका
भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले यहां माता की पूजा अर्चना करलिया था आशीर्वाद
सनातन धर्म की महान परंपरा में 51 शक्तिपीठों का विशेष महत्व है। ये वे पवित्र स्थल हैं जहाँ माता सती के अंग, आभूषण या वस्त्रखंड गिरे थे और जिनका पूजन आज भी शक्ति साधना के प्रमुख केंद्रों के रूप में किया जाता है। भारतवर्ष से बाहर भी कई शक्तिपीठ स्थित हैं, जिनमें श्रीलंका का इन्द्राक्षी शक्तिपीठ विशेष स्थान रखता है। यह पवित्र शक्तिपीठ श्रीलंका के उत्तरी प्रांत के नैनातिवु द्वीप (Nainativu Island) पर स्थित नागापोशनी अम्मन मंदिर (Nagapooshani Amman Temple) के रूप में प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा:
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब राजा दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया और उसमें भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया, तो सती अत्यंत आहत हुईं। उन्होंने अपने पिता के यज्ञ में जाकर अग्निकुंड में कूदकर प्राण त्याग दिए। यह देखकर भगवान शिव क्रोधित हो उठे और उन्होंने सती के शरीर को अपने कंधे पर उठाकर तांडव करना शुरू किया। ब्रह्मांड की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित किया।
माता सती के अंग जहाँ-जहाँ गिरे, वहाँ-वहाँ शक्ति पीठों की स्थापना हुई।
मान्यता है कि नैनातिवु द्वीप पर माता सती के पायल (नूपुर) गिरे थे। इसी कारण यहाँ स्थित शक्तिपीठ को इन्द्राक्षी शक्तिपीठ कहा जाता है।
देवी और भैरव:
- इस शक्तिपीठ की अधिष्ठात्री देवी इन्द्राक्षी (Indrakshi)या आइन्द्री कहलाती हैं।
- भैरव को यहाँ रक्तेश्वर नाम से पूजा जाता है।
- शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त सच्चे मन से यहाँ देवी की साधना करता है, उसे सूर्य मंत्रों की सिद्धि और अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है।
इन्द्राक्षी नाम का महत्व:
“इन्द्राक्षी” शब्द का अर्थ है – “इन्द्र की नेत्रों वाली देवी”।
पुराणों में उल्लेख है कि स्वयं इन्द्र देव ने यहाँ माता की आराधना कर वरदान प्राप्त किया था। इसी कारण यह शक्तिपीठ इन्द्र द्वारा पूजित स्थान के रूप में भी जाना जाता है।
स्थान और पहुँच;
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ श्रीलंका के उत्तरी भाग में जाफना जिले के पास नैनातिवु द्वीप पर स्थित है।
- जाफना से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह द्वीप समुद्र से घिरा हुआ है।
- जाफना से कुरिकदूवन (Kurikkaduvan) तक सड़क मार्ग से यात्रा की जाती है।
- वहाँ से नैनातिवु द्वीप तक नौका द्वारा पहुँचना होता है।
- कोलंबो या त्रिनकोमाली से भी यहाँ पहुँचना आसान है।
मंदिर का स्वरूप:
यहाँ स्थित नागापोशनी अम्मन मंदिर तमिल परंपरा की द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है।
- मंदिर के गोपुरम (प्रवेशद्वार) पर रंगीन मूर्तियाँ अंकित हैं, जो देवी-देवताओं, दैवी शक्तियों और पुराण कथाओं को दर्शाती हैं।
- गर्भगृह में माता इन्द्राक्षी की दिव्य मूर्ति स्थापित है।
- मंदिर परिसर में अन्य छोटे-छोटे मंदिर भी हैं, जहाँ विभिन्न देवताओं की पूजा होती है।
- समुद्र के किनारे स्थित होने के कारण यह मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।
धार्मिक महत्व:
- यह शक्तिपीठ शक्तिपूजा, तांत्रिक साधना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रमुख स्थान है।
- भक्तों का विश्वास है कि यहाँ दर्शन करने से सभी प्रकार के संकट दूर होते है और आत्मिक शांति मिलती है।
- देवी की कृपा से भक्त को रोगों से मुक्ति, वैभव और शक्ति प्राप्त होती है।
- यह शक्तिपीठ भारत और श्रीलंका के धार्मिक संबंधों का सेतु भी है।
पूजा और अनुष्ठान:
- यहाँ प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल देवी की आरती होती है।
- विशेष अवसरों पर अभिषेक, होम और हवन का आयोजन होता है।
- नवरात्रि, दुर्गा पूजा और वार्षिक उत्सव के समय यहाँ हजारों भक्त एकत्रित होते हैं।
- मंदिर में विशेष रूप से तमिल हिन्दू समुदाय की सक्रिय भागीदारी रहती है।
उत्सव और मेला:
इस शक्तिपीठ पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला वार्षिक कार्तिक उत्सवअत्यंत प्रसिद्ध है।
- इसमें दूर-दराज़ से भक्त सम्मिलित होते हैं।
- इस अवसर पर मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है और देवी का शोभायात्रा निकाली जाती है।
- भक्त समुद्र स्नान करके मंदिर में दर्शन करते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य:
नैनातिवु द्वीप चारों ओर से समुद्र से घिरा हुआ है।
- यहाँ का वातावरण शांत, शुद्ध और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ प्रतीत होता है।
- मंदिर से समुद्र का दृश्य अत्यंत मनोहारी है।
- यहाँ आने वाला हर भक्त न केवल धार्मिक संतोष प्राप्त करता है बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लेता है।
यात्रा सुझाव:
- सर्वोत्तम समय: नवंबर से फरवरी का समय सबसे उपयुक्त है क्योंकि मौसम ठंडा और सुखद रहता है।
- कैसे पहुँचे:
- जाफना तक हवाई जहाज या रेल द्वारा पहुँचा जा सकता है।
- वहाँ से सड़क और नाव के माध्यम से नैनातिवु द्वीप पहुँचा जा सकता है।
- निवास: जाफना और त्रिनकोमाली में होटलों और धर्मशालाओं की व्यवस्था उपलब्ध है।
- विशेष ध्यान: मंदिर में पारंपरिक परिधान पहनकर प्रवेश करना उचित माना जाता है।
इन्द्राक्षी शक्तिपीठ श्रीलंका का न केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, बल्कि यह भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी है। यहाँ आकर श्रद्धालु न केवल देवी की कृपा प्राप्त करते हैं बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक बल का अनुभव भी करते हैं।
जो भी भक्त इस शक्तिपीठ की यात्रा करता है, उसका जीवन दिव्य प्रकाश से आलोकित हो जाता है।
इसलिए, यदि आप शक्ति उपासना में विश्वास रखते हैं या धार्मिक पर्यटन करना चाहते हैं, तो इन्द्राक्षी शक्तिपीठ की यात्रा आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और अविस्मरणीय यात्राओं में से एक होगी।