इसरो को बड़ी उपलब्धि: चंद्रयान-4 चंद्रमा से मिट्टी और पत्थर के नमूने लाएगा

khabar pradhan

संवाददाता

10 February 2026

अपडेटेड: 3:49 PM 0thGMT+0530

इसरो को बड़ी उपलब्धि: चंद्रयान-4 चंद्रमा से मिट्टी और पत्थर के नमूने लाएगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने अगले और सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-4 की तैयारी में एक अहम सफलता प्राप्त की है। इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (एसएसी) ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उस स्थान का चयन कर लिया है, जहां मिशन की लैंडिंग कराई जाएगी।

यह उपलब्धि इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि चंद्रयान-4 भारत का पहला ऐसा मिशन होगा, जिसका उद्देश्य केवल चंद्रमा पर उतरना ही नहीं, बल्कि वहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने लेकर उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी तक वापस पहुंचाना भी है।

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर द्वारा भेजी गई उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों का गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में लगभग एक वर्ग किलोमीटर के सुरक्षित लैंडिंग जोन की पहचान की गई।

लैंडिंग साइड दक्षिण ध्रुव ही क्यों चुना गया:

चांद का दक्षिणी ध्रुव लैंडिंग के लिए चुना गया है । दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र बहुत ही खुरदुरा है यहां बड़े-बड़े पत्थर गड्ढे और ऊंची नीची जगह हैं।
क्योंकि लैंडिंग के लिए ज्यादा ढलान वाली जगह ठीक नहीं मानी जाती। यदि ढलान 10 डिग्री से कम हो तो वह क्षेत्र सुरक्षित नहीं माना जाता।
इसके अलावा पत्थर 0.32 मीटर से छोटे हो और कम से कम 11 से 12 दिन सूर्य की रोशनी मिलना चाहिए।‌ जिससे पृथ्वी से रेडियो संपर्क अच्छा हो और कोई बड़ा खतरा न हो सके।
इसके पहले कई ऐसी जगह चुनी गई थी फिर माॅन्स मूटन ने आसपास के 5 जोन पर फोकस किया।
जिसमें औसत ढलान ऊंचाई का अंतर और सुरक्षित लैंडिंग ग्रेड का ध्यान रखा गया।

इसरो की विशेषज्ञ टीम ने लैंडिंग के लिए चार संभावित स्थानों का मूल्यांकन किया था। विस्तृत जांच के बाद ‘एमएमएम-4’ नामक क्षेत्र को सबसे उपयुक्त माना गया है।

चंद्रयान-4 मिशन को तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और अब तक के पिछले चंद्र अभियानों की तुलना में अधिक उन्नत बताया जा रहा है।

यदि भारत का चंद्रयान-4 सफल होता है तो भारत चांद के रहस्यों को और भी करीब से समझ सकेगा।
इसरो की इस तैयारी से भारत को अंतरिक्ष की महाशक्ति बनने में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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