जम्मू-कश्मीर बनेगा भारत का पावर हाउस
संवाददाता
25 April 2025
अपडेटेड: 1:42 PM 0thGMT+0530
जम्मू-कश्मीर बनेगा भारत का पावर हाउस
पंजाब की चमकेगी किस्मत
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को निलंबित कर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। इस कदम से पाकिस्तान में पानी की किल्लत का खतरा मंडरा रहा है, जबकि भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर और पंजाब, के लिए यह समझौता रद्द होना विकास की नई संभावनाएं खोल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से जम्मू-कश्मीर भारत का बिजली केंद्र बन सकता है, और पंजाब की कृषि व औद्योगिक अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
सिंधु जल समझौता और भारत का कदम
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए इस समझौते के तहत पूर्वी नदियों (रावी, सतलुज, ब्यास) का नियंत्रण भारत को और पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिला। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में 23 अप्रैल, 2025 को इस समझौते को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह बंद नहीं करता।
जम्मू-कश्मीर: बिजली का नया हब
सिंधु जल समझौते के निलंबन से भारत अब पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) पर जलाशयों और बांधों के निर्माण में पहले की पाबंदियों से मुक्त हो गया है। इससे जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत परियोजनाओं को नया बल मिलेगा। विशेषज्ञ प्रदीप कुमार सक्सेना, पूर्व सिंधु जल आयुक्त, के अनुसार, भारत अब किशनगंगा जैसे जलाशयों का “रेसर्वायर फ्लशिंग” किसी भी समय कर सकता है, जो पहले केवल मानसून में संभव था।
जम्मू-कश्मीर में पहले से ही पाकल दुल, लोअर कलनाई, और रतले जैसी जलविद्युत परियोजनाएं चल रही हैं। समझौते के निलंबन से इन परियोजनाओं पर तेजी आएगी, जिससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ेगा। शाहपुर कांडी बैराज के पूरा होने से रावी नदी का पानी, जो पहले पाकिस्तान जाता था, अब कठुआ और सांबा जिलों में 32,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिए उपलब्ध है। यह क्षेत्र को बिजली और कृषि हब में बदल सकता है।
पंजाब की समृद्धि का नया दौर
पंजाब, जो पहले से ही सतलुज, ब्यास, और रावी नदियों के पानी पर निर्भर है, को इस निलंबन से अतिरिक्त जल संसाधन मिलेंगे। भाखड़ा बांध और पोंग बांध जैसे प्रोजेक्ट पहले ही पंजाब की सिंचाई और बिजली जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। अब रावी के अतिरिक्त पानी का उपयोग और नई परियोजनाओं से पंजाब की कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। इंदिरा गांधी नहर परियोजना को और मजबूती मिलेगी, जिससे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खेती को लाभ होगा।
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?
पाकिस्तान, जो सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर 80% निर्भर है, को इस निलंबन से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की कृषि, खासकर पंजाब और सिंध प्रांतों में, पानी की कमी से प्रभावित होगी। बाढ़ डेटा साझा करने पर रोक और जलाशयों का निर्माण पाकिस्तान की खेती और बिजली उत्पादन को नुकसान पहुंचा सकता है। पाकिस्तानी मंत्रियों ने इस कदम को “कायरतापूर्ण” और “अनुचित” बताया, लेकिन भारत का कहना है कि यह आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई है।
भारत की रणनीति और भविष्य
भारत ने पहले ही 2024 में शाहपुर कांडी बैराज के जरिए रावी के पानी को पूरी तरह रोक लिया था, जिससे जम्मू-कश्मीर और पंजाब को फायदा हुआ। अब समझौते के निलंबन से भारत पश्चिमी नदियों पर बांध, जलाशय, और बाढ़ नियंत्रण उपायों को लागू कर सकता है। इससे न केवल बिजली और सिंचाई में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से भी बचाव होगा