जोगेश्वरी शक्तिपीठ (बांग्लादेश)– 51 शक्तिपीठों में से एक, जानिए संपूर्ण जानकारी
संवाददाता
27 September 2025
अपडेटेड: 1:15 PM 0thGMT+0530
27 सितंबर 2025: जोगेश्वरी शक्तिपीठ जहां गिरा था माता सती का हाथ
भारतवर्ष के प्राचीन धार्मिक इतिहास में शक्ति उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक जोगेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के सातखिरा ज़िले में स्थित है। यह स्थान न केवल धार्मिक दृष्टि से पूजनीय है बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। यहाँ पर देवी सती के करकमल (हाथ की हथेली) गिरने की मान्यता है। इस कारण यह पीठ श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से पवित्र है।
भौगोलिक स्थिति:
जोगेश्वरी शक्तिपीठ, जिसे यशोरेश्वरी काली मंदिर भी कहा जाता है, बांग्लादेश के सातखिरा ज़िले के श्यामनगर उपजिला के ईश्वरपुर गांव में स्थित है। यह स्थान सुंदरबन के निकट है और आसपास का वातावरण प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।
पौराणिक कथा व महत्व:
देवी सती और भगवान शिव से संबंधित कथा के अनुसार जब राजा दक्ष ने अपने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तब सती ने अग्नि में अपने शरीर का त्याग कर दिया। शोकाकुल भगवान शिव ने जब सती के शरीर को उठाकर तांडव किया, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। जहाँ-जहाँ ये अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की उत्पत्ति हुई।
किंवदंती के अनुसार, सती का करकमल (हथेली) इसी स्थान पर गिरा था और तभी से यहाँ की देवी को जोगेश्वरी अथवा यशोरेश्वरी कहा जाता है। इस पीठ के भैरव स्वरूप को चण्ड माना गया है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
कहा जाता है कि प्राचीन काल में राजा लक्ष्मण सेन ने इस मंदिर का निर्माण कराया था।
बाद में बंगाल के शासक महाराजा प्रतापादित्य ने इसका विस्तार किया। लोककथा के अनुसार प्रतापादित्य ने एक दिन जंगल में तेज़ प्रकाश देखा। जब वह उस स्थान पर पहुँचे तो वहाँ उन्हें हाथ की हथेली के आकार का एक दिव्य शिलाखंड दिखाई दिया। इसे देवी का स्वरूप मानकर उन्होंने मंदिर का निर्माण करवाया।
मंदिर का नाटमंदिर या सभा मंडप प्राचीन काल में अत्यंत भव्य था, जिसमें हजारों भक्त एक साथ देवी का दर्शन कर सकते थे। हालांकि समय और प्राकृतिक आपदाओं के कारण इसका अधिकांश हिस्सा खंडहर में बदल गया है।
स्थापत्य व स्वरूप:
जोगेश्वरी शक्तिपीठ का मुख्य आकर्षण इसका काली मंदिर है। मंदिर के अंदर देवी का विग्रह करकमल के प्रतीक रूप में प्रतिष्ठित है। मंदिर परिसर में प्राचीन स्थापत्य शैली के अवशेष अब भी देखे जा सकते हैं।
मंदिर का गर्भगृह छोटा लेकिन अत्यंत पवित्र है।
नाटमंदिर एक विशाल मंच था जहाँ से भक्तगण देवी का दर्शन किया करते थे। वर्तमान में इसका कुछ हिस्सा पुनर्निर्मित किया गया है।
मंदिर की दीवारों और शिलालेखों में स्थानीय बंगाली स्थापत्य शैली की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।
पूजा-पाठ व परंपराएँ:
यहाँ देवी की नियमित पूजा प्रतिदिन की जाती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा होती है।
नवरात्रि और काली पूजा के समय यहाँ भारी भीड़ होती है।
दूर-दूर से श्रद्धालु इस पीठ पर आकर देवी की आराधना करते हैं और अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं।
पूजा के समय ढाक, शंख और घंटियों की ध्वनि से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठता है।
आधुनिक समय व घटनाएँ:
बांग्लादेश में स्थित होने के कारण भारत से यहाँ पहुँचना कठिन है, लेकिन आस्था और भक्ति भक्तों को इस शक्तिपीठ तक ले आती है।
हाल के वर्षों में इस मंदिर का नवीनीकरण और संरक्षण कार्य किया गया है।
27 मार्च 2021 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने बांग्लादेश दौरे के दौरान इस शक्तिपीठ का दर्शन किया। उन्होंने देवी को स्वर्ण मुकुट अर्पित किया।
दुर्भाग्य से, यह मुकुट बाद में चोरी हो गया, लेकिन इस घटना ने इस पीठ को पुनः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया।
मंदिर तक पहुँचने का मार्ग:
नजदीकी प्रमुख शहर: खुलना
वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा श्यामनगर होते हुए ईश्वरपुर पहुँचा जा सकता है।
भारत से जाने वाले भक्त को कोलकाता → सीमा पार (बोंगांव-बेनापोल) मार्ग अपनाना पड़ता है।
ढाका से भी सड़क मार्ग द्वारा यहाँ पहुँचना संभव है।
आसपास के दर्शनीय स्थल:
सुंदरबन मैंग्रोव वन – यह मंदिर सुंदरबन के निकट स्थित है, जहाँ विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन पाया जाता है।
सातखिरा जिला – ऐतिहासिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण।
स्थानीय गाँव और उनके उत्सव, बंगाली संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
जोगेश्वरी शक्तिपीठ केवल देवी उपासना का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश की साझा सांस्कृतिक धरोहर भी है। यहाँ हिंदू भक्तों के अलावा अन्य समुदाय के लोग भी दर्शन करने आते हैं।
यह पीठ भारत और बांग्लादेश के लोगों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मज़बूत करता है। नवरात्रि और काली पूजा के अवसर पर यहाँ का वातावरण अद्भुत हो जाता है।
जोगेश्वरी शक्तिपीठ उन महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का जीवंत स्मारक भी है। यहाँ देवी सती की उपस्थिति का विश्वास आज भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
बांग्लादेश में स्थित यह शक्तिपीठ भारतीय उपमहाद्वीप की साझा आस्था और विरासत का उदाहरण है। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर एक ऐसा पवित्र स्थान है, जहाँ जाकर उन्हें आत्मिक शांति, आस्था और शक्ति की अनुभूति होती है।
यदि आप कभी बांग्लादेश की यात्रा करें तो जोगेश्वरी शक्तिपीठ अवश्य जाएँ। यहाँ का वातावरण, देवी की महिमा और स्थानीय संस्कृति का संगम आपको एक अनूठा अनुभव देगा l