करवा चौथ: प्रेम, आस्था और सौभाग्य का पवित्र पर्व

khabar pradhan

संवाददाता

8 October 2025

अपडेटेड: 7:38 AM 0thGMT+0530

करवा चौथ: प्रेम, आस्था और सौभाग्य का पवित्र पर्व

7 अक्टूबर 2025: भारत की संस्कृति में हर त्योहार अपने साथ कोई न कोई संदेश लेकर आता है — कभी प्रेम का, कभी त्याग का और कभी एकता का। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय और भावनात्मक पर्व है करवा चौथ
यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन स्त्रियों के लिए समर्पित है, जो अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं।

करवा चौथ, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है। “करवा” का अर्थ होता है मिट्टी का बर्तन और “चौथ” का अर्थ है चंद्रमा की चौथी तिथि। इस दिन चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व होता है।

सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाकर महिलाएँ व्रत की शुरुआत करती हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोलती हैं। यह व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास की डोर को मजबूत भी करता है।

करवा चौथ का पौराणिक महत्व:

इस व्रत से जुड़ी कई कथाएँ हैं जो इसकी शक्ति और श्रद्धा को दर्शाती हैं।

वीरवती की कथा:

कहा जाता है कि एक रानी वीरवती ने अपने भाइयों के छल से अधूरा व्रत तोड़ा था, जिसके कारण उसके पति की मृत्यु हो गई। बाद में देवी पार्वती की कृपा से उसने पुनः व्रत रखा और अपने पति को जीवनदान मिला। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु के लिए किया जाने लगा।

सावित्री और सत्यवान:

सावित्री ने अपने पति सत्यवान को मृत्यु से वापस लाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उसकी निष्ठा और प्रेम से यमराज भी पिघल गए। यह कथा करवा चौथ की निष्ठा और अटूट विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

करवा की कथा:

एक बार करवा नाम की स्त्री ने अपने पति को नागदंश से बचाने के लिए यमराज से युद्ध किया। उसकी भक्ति और साहस के आगे यमराज को झुकना पड़ा। तभी से यह व्रत पतिव्रता और प्रेम का प्रतीक माना जाने लगा।

करवा चौथ की पूजा-विधि और प्रक्रिया:

करवा चौथ का दिन पूरी तरह से परंपराओं और उत्सव से भरा होता है। इसकी तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है।

सरगी का सेवन:

सुबह सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को “सरगी” देती हैं — इसमें फल, मिठाइयाँ, मेवे और हल्का भोजन होता है। इसे खाकर महिलाएँ पूरे दिन का व्रत रखती हैं।

श्रृंगार और सजावट:

शाम को महिलाएँ सोलह श्रृंगार करती हैं — सिंदूर, चूड़ियाँ, बिंदी, कंगन, पायल, और साड़ी पहनकर सजती हैं। यह श्रृंगार सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।

करवा चौथ की पूजा:

संध्या समय महिलाएँ एकत्र होकर देवी पार्वती, भगवान शिव और चंद्रदेव की पूजा करती हैं। करवे में जल, दीया, रोली, चावल और मिठाई रखकर कथा सुनाई जाती है।

चंद्र दर्शन और व्रत खोलना:

रात में चाँद निकलने पर महिलाएँ छलनी से चाँद को देखती हैं, फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाता है। यह पल प्रेम, आशीर्वाद और एकता का प्रतीक होता है।

करवा चौथ का सामाजिक और भावनात्मक महत्व:

करवा चौथ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रेम, समर्पण और निष्ठा का उत्सव है। इस दिन पति-पत्नी के रिश्ते में एक नई ऊर्जा आती है। व्रत रखने वाली स्त्री अपने संयम, धैर्य और प्रेम की शक्ति का प्रदर्शन करती है।

आधुनिक समय में यह त्योहार वैवाहिक जीवन में एक नई ताजगी लाता है। अब बहुत-से पुरुष भी अपनी पत्नियों के साथ यह व्रत रखते हैं, जिससे समानता और परस्पर सम्मान का भाव प्रकट होता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:

धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह व्रत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

  • उपवास से शरीर की डिटॉक्सिफिकेशन होती है।
  • दिनभर सकारात्मक सोच और ध्यान से मानसिक स्थिरता बढ़ती है।
  • चंद्रमा की शीतल रोशनी मन को शांत और स्थिर करती है। करवा चौथ और आधुनिकता:

आज के युग में करवा चौथ को आधुनिक रूप मिला है। सोशल मीडिया पर महिलाएँ अपनी करवा चौथ की तस्वीरें साझा करती हैं, डिजाइनर साड़ियाँ और करवा चौथ थीम पर फोटोशूट भी करवाए जाते हैं।

फिल्मों और टीवी सीरियल्स ने भी इस त्योहार को ग्लैमरस और लोकप्रिय बना दिया है, जैसे “दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे” में सिमरन का करवा चौथ दृश्य आज भी लोगों के दिलों में बसता है।

लेकिन इसकी आत्मा अब भी वही है — प्यार, आस्था और साथ निभाने का वादा।

करवा चौथ का पर्व भारतीय स्त्री की भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना का जीवंत उदाहरण है। यह केवल एक दिन का व्रत नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है — जो सिखाता है कि सच्चा प्रेम शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और त्याग से सिद्ध होता है।

इस पवित्र दिन पर हर स्त्री का यह प्रण होता है कि वह अपने जीवनसाथी के साथ हर सुख-दुख में खड़ी रहेगी, और पति भी अपनी पत्नी के प्रेम और त्याग का मान रखेगा।
करवा चौथ का चाँद सिर्फ आसमान में नहीं,
हर प्रेमी हृदय में भी उजाला करता है l

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