Janmashtami 2025: कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त जानें

khabar pradhan

संवाददाता

15 August 2025

अपडेटेड: 11:28 AM 0thGMT+0530

15 अगस्त 2025 : खबर प्रधानडेस्क- श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसमें श्री कृष्ण के बाल स्वरूप ,लड्डू गोपाल की पूजा का विधान है।
जन्माष्टमी हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है इस दिन रोहिणी नक्षत्र में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भगवान श्री कृष्ण का आधी रात के समय जन्म हुआ था।
इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त शनिवार के दिन मनाई जा रही है।

आईए जानते हैं शुभ मुहूर्त:
हिंदू पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 15 अगस्त रात 11: 49 पर प्रारंभ हो रही है। और अष्टमी तिथि का समापन 16 अगस्त रात 9:34 बजे तक होगा । इस वर्ष अष्टमी तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का सहयोग नहीं बना है रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को प्रातः है 4:38 से प्रारंभ होगा और इसका समापन 18 अगस्त को आता है 3:17 मिनट पर होगा किंतु 17 तारीख को अष्टमी तिथि न होने से जन्माष्टमी का पर्व 16 तारीख को मनाया जाएगा।

उदया तिथि के अनुसार 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है।

शुभ योग का निर्माण:

इस वर्ष 16 अगस्त को जन्माष्टमी के दिन बुधादित्य योग ,गज लक्ष्मी योग समेत अन्य 6 शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।
इस दिन अमृत सिद्धि योग , सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गज लक्ष्मी और ध्वांक्ष योग भी बन रहा है ।ज्योतिष शास्त्र में यह योग अत्यंत शुभ माने गए हैं । इन शुभ योग में भगवान कृष्ण कृष्ण की आराधना पूजा करने से घर परिवार में सुख सौभाग्य और समृद्धि की वृद्धि होती है।

पूजन विधि:
सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नानादि से निवृत हो स्वच्छ कपड़े पहने। और व्रत का संकल्प लें । घर के पूजा स्थल में भगवान श्री कृष्ण का झूला सजायें, सुंदर फूलों और लाइटों से मंदिर को सजायें ।
दूध दही घी शहद और गंगाजल से पंचामृत बनाएं। और श्री कृष्ण के बाल स्वरूप ,बाल गोपाल रूप का अभिषेक करें।
श्री कृष्ण जी का श्रृंगार करें। पीले फूलों का अधिक इस्तेमाल करें । पीले रंग के वस्त्र गोपी चंदन की सुगंध से श्रृंगार करें ।ध्यान रखें काले और नीले रंग के उपयोग न करें।

ताजा मक्खन, मिश्री और तुलसी पत्र साथ भोग लगाएं । कहीं कहीं पर भगवान को धनिया की पंजीरी भी अर्पित की जाती है। सात्विक भोजन के व्यंजन बनाएं और कृष्ण जी को अर्पित करें। श्री कृष्ण के मंत्रों का जाप करें ।ओम कृष्णाय नमः ओम कृष्णाय नमः ।
घंटी की ध्वनि और शंखनाद के साथ आरती करें।

कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मंदिरों में झांकियां सजाई जाती है घर-घर में कीर्तन भजन होते हैं आधी रात को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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