लंबे इंतजार के बाद भुजबल को मंत्री पद की शपथ
संवाददाता
20 May 2025
अपडेटेड: 9:01 AM 0thGMT+0530
लंबे इंतजार के बाद भुजबल को मंत्री पद की शपथ
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने मंगलवार सुबह महाराष्ट्र कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद भुजबल ने कहा, “कहते हैं न – अंत भला तो सब भला. मैंने अब तक हर जिम्मेदारी अच्छे से निभाई है. अब भी जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा.”
भुजबल पिछले कुछ महीनों से नाराज चल रहे थे, क्योंकि महायुति सरकार के गठन के समय उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं दी गई थी. उनकी नाराजगी तब और खुलकर सामने आई जब दिसंबर 2023 में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में भी उन्हें शामिल नहीं किया गया.
धनंजय मुंडे की जगह मिली जिम्मेदारी, दो बार संभाल चुके हैं मंत्रालय
छगन भुजबल को महाराष्ट्र कैबिनेट में NCP नेता धनंजय मुंडे की जगह शामिल किया गया है. मुंडे ने मार्च 2024 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. संभावना है कि भुजबल को यही मंत्रालय एक बार फिर सौंपा जाएगा, क्योंकि वह इस मंत्रालय को पहले भी दो बार संभाल चुके हैं.
भुजबल नासिक जिले के येवला से विधायक हैं और उनका राजनीतिक अनुभव कई दशकों का है. वह राज्य में OBC समुदाय के प्रमुख नेताओं में से एक माने जाते हैं. इसके पहले वे उपमुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं.
भुजबल की नाराजगी और राजनीतिक बयानबाजी
मंत्री बनाए जाने से पहले भुजबल ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई थी. 17 दिसंबर 2023 को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उन्हें मंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन NCP प्रमुख अजित पवार ने निर्णय नहीं लिया. उन्होंने बताया कि पार्टी ने कभी उन्हें लोकसभा चुनाव लड़वाया, कभी विधानसभा, और जब वह राज्यसभा जाना चाहते थे, तब उन्हें इनकार कर दिया गया.
भुजबल ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा था, “अगर मैं इस्तीफा दे दूं तो मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोग क्या सोचेंगे? क्या मैं आपके हाथों का खिलौना हूं?” उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें मंत्री पद से इसलिए दूर रखा गया क्योंकि उन्होंने मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख मनोज जरांगे का विरोध किया था.
उन्होंने आगे कहा, “लोकतंत्र में हर किसी को अपने विचार रखने का अधिकार है. मंत्री पद आते-जाते रहते हैं, मगर मुझे खत्म नहीं किया जा सकता.” उनका यह बयान साफ करता है कि वह अपने राजनीतिक वजूद को लेकर किसी भी तरह की अनदेखी स्वीकार नहीं करते.