निजी स्कूल के संगठन का राज्य शिक्षा केंद्र को अल्टीमेटम
संवाददाता
23 September 2025
अपडेटेड: 9:56 AM 0rdGMT+0530
23 सितंबर 2025 मंगलवार: आरटीआई के बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे अब निजी स्कूल: कारण- 3 साल की फीस बकाया
भोपाल में प्राइवेट स्कूलों में आरटीआई के तहत बच्चों का प्रवेश कराया जाता है । हर साल कई स्कूल इन बच्चों का एडमिशन करते हैं और इन बच्चों की फीस सरकार देती है।
किंतु अब स्कूल संचालकों का कहना है कि 3 साल से सरकार की तरफ से फीस नहीं दी गई है । जिससे प्राइवेट स्कूलों ने आरटीआई के तहत एडमिशन देने वाले बच्चों को ना पढ़ाने का राज्य शिक्षा केंद्र को अल्टीमेटम दे दिया है । इसका मुख्य कारण फीस विवाद है।
जिससे प्राइवेट स्कूलों में आरटीआई के तहत पढ़ रहे बच्चों पर पढ़ाई का संकट गहरा हो गया है।
प्राइवेट स्कूल के संचालकों का कहना है कि 30 सितंबर तक सरकार फीस चुकता करें । क्योंकि 3 साल की फीस बकाया है।
शहर में करीब 1200 प्राइवेट स्कूल है। जिसमें करीब 10000 बच्चे आईटीआई के तहत पढ़ाई करते हैं।
स्कूल संचालकों का कहना है कि यदि विभाग की तरफ से फीस नहीं मिली तो बच्चों को पढ़ाने में असमर्थता होगी।
प्राइवेट स्कूल संगठन के अजीत सिंह का कहना है कि प्राइवेट स्कूलों में सरकार ने आरटीआई के तहत बच्चों का एडमिशन कराया । हर साल एक से ज्यादा एडमिशन कराए जा रहे हैं। जिनकी फीस सरकार देती है, किंतु 3 साल होने के बाद भी सरकार ने फीस नहीं दिया है। प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में दाखिलों की फीस की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है।
स्कूल संचालकों का कहना है कि त्यौहार का सीजन है । शिक्षकों का वेतन फीस के भरोसे होता है। सरकार की तरफ से प्रतिपूर्ति ना होने के कारण त्योंहारी सीजन में परेशानी का सामना करना पड़ेगा । इसे सभी स्कूलों को आर्थिक परेशानी हो रही है।
पहले भी कर चुके हैं मांग:
स्कूल संचालकों के मुताबिक सरकार से पहले भी फीस की मांग की जा चुकी है। राज्य शिक्षा केंद्र को कई ज्ञापन भी दिए गए हैं ,किंतु सुनवाई नहीं हुई है।
अब अब निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि 30 सितंबर तक विभाग फीस चुकता करें । क्योंकि 3 साल की फीस बकाया है।
भोपाल शहर की बात करें ,तो करीब 1200 निजी स्कूलों में 10 हजार बच्चे आरटीआई के तहत पढाई करते हैं। यदि फीस नहीं मिली तो बच्चों को पढ़ने में असमर्थता होगी।
यदि फीस नहीं मिली तो 1 अक्टूबर से सभी निजी स्कूल आरटीई के बच्चों को नहीं पढ़ा पाएंगे।