मोहम्मद यूनुस और सेना प्रमुख जमान के बीच तनातनी…

khabar pradhan

संवाददाता

22 May 2025

अपडेटेड: 9:54 AM 0ndGMT+0530

मोहम्मद यूनुस और सेना प्रमुख जमान के बीच तनातनी…

मो. युनूस पर अमेरिका की कठपुतली होने का आरोप

मो. युनूस पर अमेरिका की कठपुतली होने का आरोप…

भारत पाकिस्तान के बीच तनाव तो है ही लेकिन अब देखने में ये भी आ रहा है कि बांग्लादेश में हालात फिर खराब होते जा रहे है. आखिर क्यों बांग्लादेश में एक नए राजनीतिक संकट की आशंका जताई जा रही है…. मंगलवार को सेना प्रमुख की ओर से बुलाई गई एक इमरजेंसी मीटिंग के बाद ये ये सवाल तेजी से उठ रहा है …कि क्या बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और सेना प्रमुख वाकर-उज-जमान के बीच सब कुछ ठीक नहीं हैं… सबसे बड़ी चिंता का विषय है बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप है, जो देश की अस्थिरता का कारण बन सकता है…इसीलिए आर्मी चीफ जमान चाहते हैं कि मोहम्मद यूनुस जल्द से जल्द चुनाव की घोषणा करें. उनकी अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार यूनुस हैं, जिन्हें विदेशी एजेंसियों खासकर अमेरिका की कठपुतली माना जाता है….

सेना प्रमुख ने इमरजेंसी मीटिंग से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी राजनयिकों से मुलाकात की थी…. आर्मी चीफ जमान चाहते हैं….शेख हसीना और खालिदा जिया की पार्टियों को एक साथ लाकर देश के लिए चुनाव कराया जाए… सेना की सबसे बड़ी चिंता है यूनुस की ओर से मनमाने तरीके से कैदियों की रिहाई है. दूसरी सबसे बड़ी चिंता यूनुस का सेना में फूट डालने का प्रयास है, जिसमें उन्होंने सेना प्रमुख की गैरमौजूदगी में एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की नियुक्ति की है…..जबकि बांग्लादेश की सेना जमान के साथ है….और इसीलिए आशंका जताई जा रही है कि युनूस आर्मी चीफ जमान को बेदखल करना चाहते हैं….ये मामला तब ज्यादा गर्माया जब यूनुस ने विश्वासपात्र NSA खलीलुर रहमान के साथ एक बंद कमरे में बैठक की थी. सूत्रों का मानना है कि नए NSA और यूनुस दोनों का प्रयास सेना प्रमुख को हटाने का है, इस बीच सेना प्रमुख ने दो टूक कह दिया है कि वे किसी भी सिविल सोसायटी का दबाव बर्दाश्त नहीं करेंगे. इन दोनों की नई तनातनी सामने आने बांग्लादेश के हालात और भी क्रिटीकल होते जा रहे है. आर्मी चीफ ने एक आपात बैठक बुलाई…और इस मुद्दे पर चर्चा करने का संकेत दिया है, जिसमें मुख्य चिंता युनुस के नेतृत्व में सरकार ने चुनावों में देरी और विदेशों के संभावित हस्तक्षेप को लेकर है…

इधर आर्मी चीफ का मानना है कि युनुस विदेशी ताकतों के प्रभाव में हैं, और यही वजह है कि देश में स्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. आर्मी की ओर से सबसे बड़ी चिंता युनुस द्वारा कई कैदियों को कार्यकारी आदेशों के तहत रिहा किया जाना है. इसके अलावा, आर्मी को यह भी भय है कि युनुस द्वारा नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) की नियुक्ति से सेना में विभाजन हो सकता है, क्योंकि यह कदम बिना आर्मी चीफ की सहमति के उठाया गया था. सूत्रों के अनुसार, यह कदम सेना में उच्च पदस्थ अधिकारियों के बीच असहमति को और बढ़ा सकता है, जो युनुस के खिलाफ है और जल्द से जल्द चुनाव कराने का पक्षधर है.आर्मी चीफ वाकर-उज़-ज़मान ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह के नागरिक दबाव में नहीं आएंगे और उन्होंने विरोध प्रदर्शन को अपनी दफ्तर और घर की ओर बढ़ने से रोक दिया है. वह युनुस के साथ शुरुआत में सहयोग करना चाहते थे, लेकिन अब वह चुनाव जल्द से जल्द कराने के पक्ष में हैं, ताकि लोकतंत्र बहाल हो सके.

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