MP बनेगा ‘आयुष हब’: प्रदेश को मिलेगी अपनी आयुष यूनिवर्सिटी, आयुर्वेद कॉलेजों में शुरू होंगे नए कोर्स और रिसर्च
संवाददाता
30 March 2026
अपडेटेड: 2:25 PM 0thGMT+0530
30 मार्च 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश सरकार अब राज्य को देश का ‘आयुष हब’ बनाने की बड़ी तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रदेश में एक अलग आयुष यूनिवर्सिटी (विश्वविद्यालय) बनाने का फैसला लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, इस यूनिवर्सिटी को इंदौर या भोपाल में शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। आयुष विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
क्यों पड़ी अलग यूनिवर्सिटी की जरूरत?
अभी तक आयुष कॉलेज मेडिकल यूनिवर्सिटी के अंडर आते थे, जहाँ काम का बोझ ज्यादा होने के कारण इन पर ठीक से ध्यान नहीं दिया जा पा रहा था। साथ ही, पुराने कॉलेजों में केवल पारंपरिक बीएएमएस (BAMS) जैसे कोर्स ही चल रहे थे। अब अलग यूनिवर्सिटी बनने से आयुर्वेद के क्षेत्र में स्पेशलिटी और सुपर-स्पेशलिटी कोर्स शुरू हो सकेंगे। इससे न केवल रिसर्च (अनुसंधान) बढ़ेगा, बल्कि कैंसर, लिवर और लकवा जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज पर भी आधुनिक तरीके से काम हो सकेगा।
8 नए आयुर्वेद कॉलेजों को हरी झंडी
सरकार ने प्रदेश में 8 नए आयुर्वेद कॉलेज खोलने की मंजूरी भी दे दी है। इनमें से नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट और सागर के कॉलेजों में अगले साल यानी 2024-25 से एडमिशन शुरू हो सकते हैं। वहीं झाबुआ, शुजालपुर और डिंडोरी के कॉलेजों में 2025-26 से पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। इन नए कॉलेजों और अस्पतालों के लिए सरकार ने 2700 से ज्यादा नए पद भी बनाए हैं।
मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
जब प्रदेश में ज्यादा आयुष अस्पताल और कॉलेज होंगे, तो बाहर से लोग इलाज के लिए यहाँ आएँगे, जिससे ‘मेडिकल टूरिज्म’ को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, आयुष के लिए अलग से नर्सिंग कॉलेज भी शुरू किए जाएँगे, ताकि अस्पतालों को ट्रेंड स्टाफ मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि आयुर्वेद दवाओं के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर मरीजों को बेहतर इलाज दिया जाए।