Share

30 अप्रैल 2026

भोपाल:
मध्य प्रदेश के लिए एक तरफ गर्व की बात है कि यहाँ बाघों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन दूसरी तरफ यही बढ़ती संख्या अब सरकार और वन विभाग के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। अनुमान है कि प्रदेश में बाघों का आंकड़ा 1000 के पार पहुंच चुका है। इतनी बड़ी संख्या को सुरक्षित रखना और इंसानों के साथ उनके बढ़ते टकराव को रोकना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
क्यों बढ़ रही है वन विभाग की बेचैनी?
आमतौर पर बाघों की संख्या बढ़ना किसी भी राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश में समस्या “जगह” की कमी को लेकर है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के अभयारण्य और नेशनल पार्क अपनी क्षमता के करीब पहुंच चुके हैं।
जब बाघों को जंगल में पर्याप्त जगह नहीं मिलती, तो वे भोजन और नए इलाके की तलाश में रिहायशी बस्तियों की ओर रुख करने लगते हैं। इसी वजह से बाघों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।
देहरादून के संस्थान से मांगी गई मदद
हालात को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून से विशेष मदद मांगी है। सरकार ने संस्थान से एक “प्रोजेक्ट रिपोर्ट” तैयार करने को कहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि:
* मध्य प्रदेश के जंगलों की वास्तविक क्षमता कितने बाघों को संभालने की है?
* किन नए इलाकों को बाघों के लिए सुरक्षित निवास बनाया जा सकता है?
* बढ़ती आबादी को कैसे बेहतर तरीके से प्रबंधित (Manage) किया जाए?
वन्य प्राणी संरक्षक समिता राजौरा के अनुसार, यह रिपोर्ट राज्य में बाघों के बेहतर संरक्षण और भविष्य की प्लानिंग के लिए बेहद जरूरी है।
बाघों की मौत का बढ़ता आंकड़ा
जहाँ एक ओर संख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर बाघों की मौत की खबरें भी डरा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2025 से अब तक प्रदेश में लगभग 79 बाघों की जान जा चुकी है। चिंता की बात यह है कि इनमें से कई मौतें आपसी लड़ाई (Territorial Fight) की वजह से हुई हैं। जब एक ही छोटे इलाके में ज्यादा बाघ हो जाते हैं, तो वे अपनी सीमा सुरक्षित करने के लिए आपस में लड़ते हैं, जो अक्सर जानलेवा साबित होता है।

सरकार अब पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को संतुलित करने की कोशिश कर रही है। देहरादून संस्थान की रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि क्या कुछ बाघों को कम घनत्व वाले जंगलों में शिफ्ट करने की जरूरत है। मकसद सिर्फ बाघों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा सुरक्षित माहौल देना है जहाँ वे बिना किसी टकराव के रह सकें।
बाघों के संरक्षण और इंसानी सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना अब मध्य प्रदेश के वन्यजीव प्रबंधन की सबसे बड़ी परीक्षा है।


Share