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25 मई 2026

भोपाल:

ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में साल 2026-27 की ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना का काम पूरी तरह से सफल रहा है। यह खास अभियान 22 मई से 24 मई 2026 तक चलाया गया। वन विभाग की टीमों ने सूर्योदय से लेकर सुबह 9 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वन वृत्तों, 9 टाइगर रिजर्व, वन विकास निगम के क्षेत्रों और अन्य सुरक्षित इलाकों में जाकर गिद्धों की गिनती की। इस पूरे काम में वन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ कई स्वयंसेवकों ने भी बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया।
इस बार क्या था खास
इस बार की गणना में सबसे अनोखी बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया को एक ऑनलाइन ऐप के जरिए पूरा किया गया। ऑनलाइन ऐप की मदद से गिद्धों के आंकड़ों को तुरंत इकट्ठा करने और उनकी रिपोर्ट तैयार करने में वन विभाग को काफी सहूलियत हुई। वन विभाग का कहना है कि इस डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से पूरी गणना प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और प्रभावी बन गई है।
ऐप से हुई लाइव मॉनिटरिंग
वन विभाग ने इस गिनती के लिए एक विशेष ऑनलाइन ऐप तैयार किया था। इस ऐप के माध्यम से गिद्धों का डेटा तुरंत लाइव रूप में दर्ज हो रहा था, जिससे उनकी मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग काफी आसान हो गई। इस काम को बेहतर ढंग से करने के लिए मास्टर ट्रेनर्स, अधिकारियों, कर्मचारियों और अशासकीय संस्थाओं को पहले से ही ऑनलाइन ट्रेनिंग दी गई थी। गणना करने वाली टीमों ने सुबह-सुबह गिद्धों के घोंसलों और उनके विश्राम करने वाले स्थानों के पास पहुंचकर वहां मौजूद गिद्धों और उनके बच्चों की संख्या ऐप में दर्ज की। इस गिनती में केवल बैठे हुए गिद्धों को ही शामिल किया गया, जबकि उड़ते हुए गिद्धों को इसमें नहीं गिना गया।
10 हजार से ज्यादा गिद्धों की हुई पहचान
इस तीन दिवसीय गणना के दौरान पूरे मध्य प्रदेश में लगभग 10 हजार 742 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। इनमें से 9,394 वयस्क गिद्ध हैं और 1,348 किशोर यानी छोटे गिद्ध शामिल हैं। यह संख्या पिछले साल यानी 2025 में दर्ज किए गए 9,509 गिद्धों के मुकाबले करीब 1,200 अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिद्धों की संख्या में यह बढ़ोतरी वन विभाग द्वारा किए जा रहे बेहतर मैनेजमेंट, लगातार निगरानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों का एक बेहद सकारात्मक नतीजा है।
2016 से हो रही है गणना
मध्य प्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरुआत साल 2016 में हुई थी, तब राज्य में लगभग 7,028 गिद्ध पाए गए थे। उसके बाद से लगातार इस दिशा में काम किया जा रहा है और संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने निभाई अहम भूमिका
इस बड़े अभियान में वन विभाग के कर्मचारियों के अलावा पक्षी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, छात्र-छात्राओं और स्थानीय नागरिकों ने भी उत्साह के साथ हिस्सा लिया। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में एक कंट्रोल रूम बनाकर पूरे प्रदेश से आने वाले आंकड़ों की बारीकी से मॉनिटरिंग की गई। वन विभाग का मानना है कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में गिद्ध बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से उनकी बढ़ती संख्या राज्य के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है।


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