नवरात्रि में कैसे करें कलश स्थापना: जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त

khabar pradhan

संवाददाता

19 September 2025

अपडेटेड: 9:34 AM 0thGMT+0530

नवरात्रि में कैसे करें कलश स्थापना: जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त

19 सितंबर2025: शारदीय नवरात्र शक्ति की साधना का एक महत्वपूर्ण पर्व है । ये पर्व 22 सितंबर 2025 से शुरू हो रहा है। नवरात्र में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा पूरी विधि विधान से करते हैं। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना की जाती है।

कैसे करें कलश स्थापना:
हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि का प्रारंभ होता है । इस वर्ष 22 सितंबर की रात 1:30 से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो रही है । जो 23 सितंबर की रात 2:55 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 22 सितंबर को कलश स्थापना की जाएगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त:
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:09 से 8:06 तक रहेगा । इस मुहूर्त में यदि हम पूजा ना कर सके तो अभिजीत मुहूर्त में 11:49 से 12:38 पर कलश स्थापना की जा सकती है।

इस वर्ष नवरात्र की शुरुआत अत्यधिक शुभ मानी जा रही है। क्योंकि इस दिन के अत्यधिक सकारात्मक योग बन रहे हैं। इन योग में पूजा करने से अनेक मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं । घर में सुख शांति और समृद्धि आती है।

कलश स्थापना से पहले सबसे पहले पूरे घर की और पूजा स्थल की साफ सफाई करें । सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें ।‌काले और नीले रंग के कपड़ों से परहेज करें।‌ पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
मिट्टी ,तांबे या पीतल का एक कलश लें । कलश को साफ कर उस पर स्वास्तिक बनाएं और सिंदूर लगाएं। कलश के ऊपर मौली बांधें। कलश के अंदर थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्वच्छ जल मिलाएं । इसके साथ चंदन, पुष्प ,सुपारी ,पान और एक सिक्का डालें । अब पंच पल्लव या पांच आम के पत्ते रखें। यदि आम के पत्ते ना हो तो अशोक के पत्ते रखें । अब एक मिट्टी के बर्तन में थोड़ा चावल भरें। और उसे कलश के ऊपर रखें। अंत में एक नारियल लेकर उसे पर लाल कपड़ा लपेटकर उसे कलश के ऊपर रखें ।

इस कलश को श्रद्धा के साथ स्थापित करें और सभी देवी देवताओं को आमंत्रित करें । कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का प्रारंभ होता है । नवरात्रि के हर दिन अलग-अलग मां के रूप में पूजन किया जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर धूप दीप और नैवेद्य अर्पित करें। सुबह शाम आरती करें । यदि संभव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मंत्रों का जाप करें।

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