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नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव: सुशीला कार्की के हाथ नेपाल की कमान?

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Khabar Pradhan Desk

संवाददाता

11 September 2025, 12:20 PM

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नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव: सुशीला कार्की के हाथ नेपाल की कमान?

11 सितंबर 2025 : पड़ोसी देश नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है… केपी शर्मा ओली की सत्ता खिसक गई और अब कमान सुशीला कार्की के हाथ में सौंप दी गई है.. सुशीला कार्की को नेपाल की अंतरिम सरकार के प्रमुख के तौर पर चुना जा रहा है। सुशीला कार्की के नाम का प्रस्ताव हामी नेपाली की तरफ से रखा गया था। जिसका काठमांडू के मेयर बलिन शाह ने भी समर्थन किया ।सुशीला कार्की पर 2017 में एक महाभियोग लगाया गया था ।उन पर सरकार के कामकाज में दखल देने का आरोप था। इसके बाद सुशीला कार्की को निलंबित भी कर दिया गया था।

कौन है सुशील कार्की :
सुशीला कार्की का जन्म 1955 में हुआ था। उन्होंने कानून की डिग्री के बाद न्यायिक सेवा में एक लंबा सफर भी तय किया है । नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं हैं। उनका कार्यकाल ऐतिहासिक उपलब्धियां के साथ-साथ राजनीतिक विवादों से भी भरा रहा। उन्होंने नेपाल के न्याय के इतिहास में एक बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान दिया है । लैंगिक समानता और न्यायिक सुधारो के लिए उनके योगदान की सराहना की जाती है।

उनके खिलाफ 2017 में संसद में महाभियोग चलाया गया था ।क्योंकि उन पर सरकार के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाया गया था ।‌इसके बाद से कार्की को निलंबित कर दिया गया था । उन्होंने हार नहीं मानी और इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया । उनके रिटायरमेंट से ठीक 1 दिन पहले ही ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जिससे उनके महाभियोग प्रस्ताव को वापस ले लिया गया। अब वे सरकार की कमान अपने हाथ में लेने जा रही है

सुशीला कार्की बनेंगी अंतरिम प्रधानमंत्री :
ये बदलाव भारत के लिए क्यों शुभ संकेत माना जा रहा है…दरअसल, सुशीला कार्की, जो नेपाल सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं, अब अंतरिम प्रधानमंत्री बनने जा रही हैं… 73 साल की सुशीला कार्की सालों से नेपाल में सरकार विरोधी आंदोलनों की आवाज़ रही हैं… 11 जुलाई 2016 को वे नेपाल सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं… भ्रष्टाचार के खिलाफ कई निर्णायक फैसले देकर उन्होंने नेपाल की जनसंख्या खासकर Gen Z के बीच लोकप्रियता हासिल की…अब बताया जा रहा है कि भारत से उनका कनेक्शन भी पुराना है… उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है…भारत में बिताए अपने दिनों को वे आज भी याद करती हैं… गंगा के किनारे हॉस्टल की गर्मी की रातें, मित्र और शिक्षक ये सब उनके दिल के करीब हैं । उनका भारत के प्रति सकारात्मक रुख है,पीएम मोदी की सराहना करती हैं…लोगों के बीच सद्भावना की बात आए दिन कहती रहती हैं…
एक इंटरव्यू में सुशीला कार्की ने साफ शब्दों में कहा था कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन करती हूँ… मैं भारत को अपना करीब मानती हूं… हमारे लोगों के बीच बहुत प्रेम और सद्भावना है… हम भारतीय नेताओं को भाई बहन की तरह मानते हैं…नेपाल और भारत के बीच करीब 1750 किलोमीटर की खुली सीमा है… उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से नेपाल जुड़ा है… दोनों देशों के लोग बिना वीज़ा के यात्रा कर सकते हैं… साल 1950 की संधि के तहत नेपाली भारतीय क्षेत्र में काम भी कर सकते हैं…लेकिन केपी शर्मा ओली के कार्यकाल में स्थिति बिल्कुल अलग थी… उनका झुकाव चीन की ओर था…ओली भारत विरोधी बयानबाजी के लिए जाने जाते रहे हैं…
वे लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को विवादित क्षेत्र बताते रहे… यहां तक कि उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म भारत में नहीं, नेपाल में हुआ था…ओली ने सत्ता गंवाने का कारण भी यही बताया जा रहा है कि उन्होंने भारत विरोधी रुख अपनाना शुरू कर दिया था… लेकिन अब हालात बदल सकते हैं… सुशीला कार्की के प्रधानमंत्री बनने के साथ भारत-नेपाल संबंधों में सुधार की उम्मीदें तेज हो गई हैं…भारत के लिए ये शुभ संकेत इसलिए है क्योंकि नेताओं की सोच ही देशों के रिश्तों को दिशा देती है…अब सवाल ये है कि क्या सुशीला कार्की के नेतृत्व में नेपाल और भारत के रिश्ते मजबूत होंगे…अब जो भी होगा समय ही इसका जवाब देगा…

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