ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: 12 ज्योतिर्लिंगों में खास…धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम, जाने मंदिर का इतिहास और मंदिर से जुड़ी मान्यताएं!
संवाददाता
17 July 2025
अपडेटेड: 11:23 AM 0thGMT+0530
17 जुलाई 2025: भारत की पुण्यभूमि पर स्थित, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग — एक ऐसा आध्यात्मिक तीर्थ है, जो भक्तों के मन को ईश्वर की ओंकार रूपी ऊर्जा से जोड़ता है। मध्यप्रदेश के खंडवा ज़िले में, नर्मदा नदी के मंधाता द्वीप पर स्थित यह मंदिर, ना केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि शिवभक्तों के लिए आत्मा की गहराई तक छू जाने वाला अनुभव है।
“ॐ” – ब्रह्मांड की मूल ध्वनि और शिव का प्रतीक है l इसी से प्रेरित होकर इस स्थान को ओंकारेश्वर कहा जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण यह स्थान हिंदू धर्म में श्रद्धा रखने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है l
हिंदू धर्म के अनुसार ओंकारेश्वर वह स्थल है जहां स्वयं भगवान शिव ने ओमकार रूप लिया और ब्रह्मा एवं विष्णु को अपना तेज दिखाया l यहां शिवलिंग की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है l नर्मदा नदी के किनारे स्थित यह तीर्थ विशेष रूप से पवित्र नर्मदा परिक्रमा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है l यह स्थान ओंकार और ममलेश्वर दो ज्योतिर्लिंग रूपों में विभाजित है l जिन्हें एक साथ पूजना पूर्ण फल दायक माना जाता है l
मंदिर से जुड़ी मान्यताएं–
ऐसी मान्यता है इस मंदिर में हर रात भगवान शिव और माता पार्वती शयन करने आते हैं। इसलिए यहां पर रात्रि में शयन आरती की जाती है । जिसमें सिर्फ मंदिर का एक पुजारी मौजूद होता है। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में शिव पार्वती रात में चौसर खेलते हैं। इसलिए रात में यहां चौसर और पासे रखकर मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। सुबह जब मंदिर के दरवाजे खोले जाते हैं, तब चौसर के पासे बिखरे हुए मिलते हैं।
उत्पत्ति की कथा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय देवताओं और असुरों के बीच भीषण युद्ध हुआ जिसमें देवगण पराजित हो गए। तब सभी देवताओं ने नर्मदा तट पर तपस्या कर भगवान शिव से सहायता मांगी। शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने ‘ओंकार’ ध्वनि के रूप में प्रकट होकर असुरों का नाश किया। उसी स्थान पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
एक अन्य कथा के अनुसार, राजा मंधाता ने यहीं घोर तप कर शिव को प्रसन्न किया, जिससे यह द्वीप “मंधाता द्वीप” कहलाया और शिव ने उन्हें दर्शन देकर यहाँ निवास किया।
वास्तु कला
ओंकारेश्वर मंदिर की स्थापत्य कला अत्यंत आकर्षक है l यह मंदिर उत्तर भारतीय नागर शैली में निर्मित है l जिसमें पत्थर की नक्काशी , सुंदर स्तंभ और शिखर है l नर्मदा नदी के द्वीप पर स्थित मंदिर की बनावट ओम के आकार में दिखाई देती है , जो इसे विशेष बनाता है l मंदिर तक पहुंचने के लिए पत्थर की सीढ़ियां , झूला पुल और नौका मार्ग तीनों ही साधन उपलब्ध है l जो यात्रा को रोमांचक बनाते हैं l मंदिर की संरचना पांच मंजिलों वाली है जिसमें विभिन्न देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित है l
प्रमुख पर्व और उत्सव
महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक एवं रात्रि जागरण हेतु एकत्र होते हैं l
श्रावण मास में पूरे महीने प्रतिदिन विशेष पूजन, रुद्राभिषेक और भजन कीर्तन होते हैं l
नर्मदा जयंती और मालवा उत्सव जैसे क्षेत्रीय पार्व भी यहां धूमधाम से मनाए जाते हैं l
ओंकारेश्वर की शांत नर्मदा घाटी में स्थित यह मंदिर साधकों को अद्वितीय शांति , ज्ञान की अनुभूति और भगवत चिंतन के लिए प्रेरित करता है l यहां ध्यान जाप व परिक्रमा करने से मन को एक विशेष ऊर्जा मिलती है l कई साधक इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मानते हैं l
ओंकारेश्वर केवल एक मंदिर नहीं बल्कि एक जीवंत चेतना है, जो श्रद्धालु को न केवल धर्म से जोड़ती है ,बल्कि आत्मिक चिंतन और मोक्ष की राह भी दिखाती है l
यदि आप आध्यात्मिक यात्रा की योजना बना रहे हैं , तो ओमकारेश्वर को अवश्य शामिल करेंl
कैसे पहुँचे
रेल मार्ग -नजदीकी रेलवे स्टेशन ओंकारेश्वर रोड (12 किलोमीटर ),
इंदौर रेलवे स्टेशन (77 किलोमीटर)
वायु मार्ग – निकटतम हवाई अड्डा – देवी अहिल्या एयरपोर्ट, इंदौर
सड़क मार्ग -खंडवा , इंदौर उज्जैन आदि शहरों से सीधी बस और टैक्सी सेवा उपलब्ध है ।
मंदिर दर्शन का समय –
सुबह 5:00 बजे से रात 9:30 बजे तक
प्रसाद व जलाभिषेक की सामग्री मंदिर परिषद में ही उपलब्ध हैl
नर्मदा नदी में स्नान के लिए घाट स्वच्छ और सुरक्षित है l नजदीक में ठहरने हेतु धर्मशालाएं व होटल उपलब्ध हैंl
हर हर महादेव