PM का भावुक संबोधन, मालवा की रानी को दी श्रद्धांजलि

khabar pradhan

संवाददाता

31 May 2025

अपडेटेड: 12:30 PM 0stGMT+0530

PM का भावुक संबोधन, मालवा की रानी को दी श्रद्धांजलि

PM का भावुक संबोधन, मालवा की रानी को दी श्रद्धांजलि

“देवी अहिल्या बाई का नाम लेते ही दिल में श्रद्धा जागती है”

मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री ने मालवा की महान शासिका देवी अहिल्या बाई होल्कर को याद करते हुए एक भावुक और प्रेरणादायक संबोधन दिया। मंच से उन्होंने कहा, “देवी अहिल्या बाई का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा और गर्व का भाव उमड़ पड़ता है। वे न केवल एक शासिका थीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की प्रतीक थीं।” इस समारोह में अहिल्या बाई की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया। प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने न केवल उपस्थित जनसमूह को भावुक कर दिया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो गई। उनके शब्दों ने अहिल्या बाई के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया।

अहिल्या बाई: मालवा की ममता और शक्ति

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अहिल्या बाई होल्कर को मालवा की ममता और शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “18वीं सदी में जब महिलाओं को सत्ता और समाज में सीमित स्थान मिलता था, तब अहिल्या बाई ने न केवल मालवा पर शासन किया, बल्कि अपने न्याय, धर्म और विकास के कार्यों से इतिहास में अमर हो गईं।” उन्होंने अहिल्या बाई के मंदिर निर्माण, सामाजिक सुधार और जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। “उनका शासन नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने दिखाया कि साहस और संवेदना का संगम कितना प्रभावशाली हो सकता है,” पीएम ने गर्व के साथ कहा।

नारी शक्ति का प्रतीक: अहिल्या बाई का जीवन

अहिल्या बाई होल्कर, जिन्हें 18वीं सदी की सबसे प्रगतिशील शासकों में से एक माना जाता है, ने मालवा साम्राज्य को न केवल स्थिरता दी, बल्कि इसे समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने उनके जीवन की कुछ प्रेरक घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे अहिल्या बाई ने अपने पति खांडेराव होल्कर की मृत्यु के बाद शासन की बागडोर संभाली और युद्ध, प्रशासन और धर्म के क्षेत्र में अपनी योग्यता साबित की। “उन्होंने मंदिरों का निर्माण करवाया, काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और जनता के लिए कुएं, धर्मशालाएं और सड़कें बनवाईं। यह सब उन्होंने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद किया,” पीएम ने कहा।

इंदौर में विकास की सौगात

इस समारोह में प्रधानमंत्री ने अहिल्या बाई की जयंती के अवसर पर इंदौर और मालवा क्षेत्र के लिए कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, स्वच्छता अभियान के तहत नए प्रोजेक्ट और शिक्षा के लिए नए संस्थानों की स्थापना शामिल है। पीएम ने कहा, “अहिल्या बाई ने मालवा को समृद्ध बनाया था, और हमारा प्रयास है कि उनकी प्रेरणा से हम इस क्षेत्र को विकास का नया केंद्र बनाएं।” इन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल है, और इसे अहिल्या बाई के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर छाई अहिल्या बाई की गाथा

प्रधानमंत्री के इस संबोधन ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। उनके बयान “देवी अहिल्या बाई का नाम सुनते ही मन में श्रद्धा उमड़ पड़ती है” ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा। कई यूजर्स ने अहिल्या बाई को नारी शक्ति का प्रतीक बताते हुए उनकी गाथा को साझा किया। एक यूजर ने लिखा, “अहिल्या बाई जैसी शासिका आज भी प्रेरणा देती हैं। पीएम का यह संबोधन हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का मौका देता है।” इस खबर ने नई पीढ़ी को अहिल्या बाई के योगदान से परिचित कराने में अहम भूमिका निभाई।

नारी सशक्तिकरण पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अहिल्या बाई के जीवन को नारी सशक्तिकरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनकी कहानी आज की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है। “अहिल्या बाई ने दिखाया कि एक महिला न केवल घर, बल्कि पूरे साम्राज्य को संभाल सकती है। आज हमारी सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है, और यह अहिल्या बाई की प्रेरणा से ही संभव हो रहा है,” उन्होंने कहा। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और उज्ज्वला योजना जैसी पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि यह अहिल्या बाई की सामाजिक समरसता की सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

मालवा की जनता में गर्व का माहौल

इंदौर और मालवा क्षेत्र की जनता के लिए यह समारोह गर्व का क्षण था। स्थानीय लोगों ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को अहिल्या बाई के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। कई लोगों ने कहा कि अहिल्या बाई की विरासत को इस तरह याद करना न केवल उनकी स्मृति को जीवित रखता है, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी गति देता है। समारोह में मौजूद एक बुजुर्ग ने कहा, “हमारी अहिल्या मां को आज पूरा देश याद कर रहा है। यह हम मालवावासियों के लिए गर्व की बात है।”

अहिल्या बाई की अमर गाथा

प्रधानमंत्री का यह संबोधन न केवल अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती का उत्सव था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक प्रयास भी था। उनके शब्दों ने अहिल्या बाई के शासन, उनकी नारी शक्ति और उनके जनकल्याणकारी कार्यों को जीवंत कर दिया। यह समारोह मालवा की माटी की उस महान बेटी को श्रद्धांजलि देने का एक अनूठा अवसर था, जिसने अपने समय में असंभव को संभव कर दिखाया। पीएम का यह संबोधन और अहिल्या बाई की गाथा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी, और यह साबित करती रहेगी कि भारत की ताकत उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में बसी है।

टिप्पणियां (0)