पितृ मोक्ष अमावस्या कल: सर्वार्थ सिद्धि योग में तर्पण करके पितरों को दी जाएगी विदाई

khabar pradhan

संवाददाता

20 September 2025

अपडेटेड: 12:13 PM 0thGMT+0530

पितृ मोक्ष अमावस्या कल: सर्वार्थ सिद्धि योग में तर्पण करके पितरों को दी जाएगी विदाई

20 सितंबर 2025: पितृपक्ष अब अंतिम चरण में हैं। 21 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या मनाई जाएगी । यह तिथि इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में पितृ मोक्ष अमावस्या पड़ रही है। इस दिन पितरों का तर्पण कर पितरों को अंतिम बिदाई दी जाएगी।
पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन ऐसे लोग भी तर्पण कर सकेंगे। जिन्हें अपने पूर्वजों के दिवंगत होने की तिथि मालूम नहीं है।
सर्वार्थ सिद्धि योग में तर्पण करना, पिंडदान, पंचबली कर्म करना, ब्राह्मण भोज करना ,तिल ,जौ, कंबल और खीर का वितरण करना अति शुभदायक माना जाता है । इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।
और संतुष्ट होकर अपने लोक को गमन करते हैं।

इस दिन मंदिरों तालाबों के घाट पर सुबह से ही पितरों के निमित्त तर्पण करने लोग पहुंचते हैं।

घर पर भी कर सकते हैं तर्पण:

सर्व पित्रमोक्ष अमावस्या पर श्रद्धालु लोग अपने पितरों के श्राद्ध एवं तर्पण हेतु मंदिर या तालाबों के घाट पर सुबह से ही पहुंच जाते हैं।
किंतु कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो मंदिर या तालाबों के घाट पर या नदी तट पर तर्पण नहीं कर पाते । वे लोग घर पर ही पितरों को जलांजलि दे सकते हैं।
पितृ मोक्ष अमावस्या ऐसी तिथि होती है ,इस दिन अपने सभी ज्ञात अज्ञात दिवंगत पितरों के निमित्त तर्पण पिंडदान श्राद्ध किया जा सकता है। जो लोग श्राद्ध पक्ष में किसी भी दिन तर्पण नहीं कर पाते ,उन्हें इस अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए।

इस दिन लोग गौशाला में पहुंचकर गायों को चारा खिलाते हैं और दान पुण्य भी करते है। इस दिन लोग पौधों का वितरण भी करते हैं। जिससे लोग अपने पितरों की स्मृति में पौधे लगा सकें।

पितृ मोक्ष अमावस्या पर सूर्य ग्रहण:
पित्र मोक्ष अमावस्या वाले दिन सूर्य ग्रहण रहेगा। किंतु इसका कोई सूतक या असर भारत नहीं होगा। क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका कोई दोष नहीं लगेगा। ऐसे में श्राद्ध कर्म ,तर्पण सहित किसी भी प्रकार के अनुष्ठान में कोई बाधा नहीं रहेगी।
पंडितों के अनुसार सर्वपित्रमोक्ष अमावस्या पर जो सूर्य ग्रहण रहेगा, वह ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड सहित अन्य देशों में दिखाई देगा । भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा । इसलिए इसका सूतक का नियम भारत वर्ष में मान्य नहीं है। पंडितों के अनुसार जहां पर सूर्य ग्रहण दिखता है वहीं पर इसका प्रभाव माना जाता है।

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