पुत्रदा एकादशी: पुत्रदा एकादशी के दिन भूलकर भी ना करें यह काम,जानें सही मुहूर्त और पूजन विधि।
संवाददाता
4 August 2025
अपडेटेड: 1:11 PM 0thGMT+0530
4 August 2025: श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहते हैं। यह एकादशी मुख्य रूप से संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है ।मान्यता है कि इस दिन व्रत पूजन करने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।
आईए जानते हैं पूजा की सही विधि और मुहूर्त
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी 4 अगस्त को 11:41 से प्रारंभ हो रही है। और एकादशी 5 अगस्त 2025 को 1:12 दोपहर पर समाप्त हो रही है। इसके उपरांत द्वादश तिथि प्रारंभ हो जाएगी।
ओरिया तिथि के अनुसार 5 अगस्त को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी ।
पूजन का शुभ मुहूर्त :
ब्रह्म मुहूर्त 4:20 से 5:02 तक प्रातः दे
रवि योग प्रातः 5:45 से सुबह 11:23 तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 तक
शाम का शुभ मुहूर्त शाम 7:09 से शाम 7: 30 मिनट तक।
पुत्रदा एकादशी पर इस वर्ष बहुत से शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र के संयोग में रवि योग भी बन रहा है।
पूजन विधि:
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत हो स्वच्छ कपड़े धारण करें ।उचित हो कि पीले वस्त्र धारण करें ।सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अभिषेक करें ।पीला चंदन पीले पुष्प अर्पित करें ।घी का दीपक प्रज्वलित करें ।ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का जाप करें । विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती कर प्रसाद ग्रहण करें।
एकादशी पर किन बातों का रखें ध्यान:
एकादशी के व्रत के 1 दिन पहले से ही एकादशी के नियमों का पालन शुरू कर देना चाहिए । इस बार वैसे ही श्रावण का सोमवार है इस दिन के पूजन का अलग ही महत्व है। दशमी तिथि से ही एकादशी के नियमों का पालन शुरू कर देते हैं।
1. एकादशी के दिन चावल का प्रयोग वर्जित होता है। इस दिन चावल का दान देने से भी बचना चाहिए।
2.कांस्य के बर्तन का प्रयोग नहीं करते ।
3.मसूर की दाल का प्रयोग नहीं किया जाता है ।
4.हरी पत्तेदार सब्जियां नहीं खाते ।
5.लहसुन प्याज का सेवन नहीं करते ।
6.मदिरापान, मांस से दूर रहना चाहिए ।
7.नियम के अनुसार दशमी तिथि से ही एक समय का भोजन ग्रहण करना चाहिए।
8.शहद का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
एकादशी के दिन शहद वर्जित होता है। भगवान के पूजन में भी शहद का प्रयोग नहीं करते ।
9.पीले रंग के वस्त्र धारण करें ।
10. सूर्योदय से पहले उठकर सूर्य को जल दें और तुलसी का पूजन करें ।
क्योंकि नारायण को तुलसी प्रिय होती है इसलिए तुलसी का पूजन अवश्य करना चाहिए ।
- इस बात का ध्यान रखें कि एकादशी के बाद द्वादशी के दिन तुलसी पूजन नहीं करते ,ना ही जल देते हैं।