राहुल गांधी का अमेरिका में बयान

khabar pradhan

संवाददाता

21 April 2025

अपडेटेड: 7:07 AM 0stGMT+0530

राहुल गांधी का अमेरिका में बयान

महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी का आरोप, 65 लाख वोटों पर उठाए सवाल

महाराष्ट्र चुनाव में गड़बड़ी का आरोप, 65 लाख वोटों पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने अमेरिका दौरे के दौरान महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा बयान दिया है। बोस्टन की ब्राउन यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र चुनाव में “गड़बड़ी साफ दिख रही है।” राहुल ने विशेष रूप से मतदान के अंतिम दो घंटों (शाम 5:30 से 7:30 बजे) के बीच 65 लाख वोट पड़ने पर सवाल उठाया और कहा कि यह असंभव है कि इतने कम समय में इतने वोट डाले गए हों।
राहुल का बयान और आरोप
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा, “महाराष्ट्र में जितने युवा मतदाता हैं, उससे ज्यादा वोट डाले गए। आसान भाषा में कहें तो चुनाव में धांधली हुई। शाम 5:30 से 7:30 बजे के बीच 65 लाख वोट कैसे पड़ सकते हैं? यह तकनीकी रूप से संभव नहीं है। एक मिनट में एक वोट डलता है, और इतने कम समय में इतने वोटों का पड़ना साफ तौर पर गड़बड़ी को दर्शाता है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलकर महाराष्ट्र में कांग्रेस और उसके सहयोगियों को हराने के लिए “खेल किया।”
राहुल ने दावा किया कि अगर निष्पक्ष चुनाव होता तो उनकी पार्टी और गठबंधन की जीत निश्चित थी। उन्होंने कहा, “हम महाराष्ट्र में जीत रहे थे, लेकिन हमें हराया गया। यह साफ है कि व्यवस्था और संस्थानों पर कब्जा किया गया है।” उनके इस बयान ने भारत में राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
BJP और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “राहुल गांधी विदेश जाकर देश की छवि खराब कर रहे हैं। अगर उनके पास सबूत हैं, तो वे कोर्ट क्यों नहीं गए? उनके पास कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे बड़े वकील हैं। यह सिर्फ राजनीतिक नौटंकी है।” बीजेपी ने राहुल के आरोपों को “निराधार” और “देश को बदनाम करने की साजिश” करार दिया।


सोशल मीडिया पर भी बीजेपी समर्थकों ने राहुल की आलोचना की है। एक यूजर ने लिखा, “राहुल गांधी हर बार विदेश जाकर भारत की बुराई करते हैं। अगर इतनी गड़बड़ी थी, तो भारत में कोर्ट में केस क्यों नहीं दायर किया?” दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थकों ने राहुल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे “संस्थानों पर कब्जे” का मुद्दा उठाकर सही सवाल पूछ रहे हैं।
चुनाव आयोग पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने बीजेपी के साथ मिलकर काम किया। यह भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के लिए खतरनाक है।” उनके इस बयान को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी समर्थन जताया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, “राहुल ने जो कहा, वह गंभीर है। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।”
हालांकि, चुनाव आयोग ने अभी तक राहुल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले की जांच कर सकता है, लेकिन कोई ठोस सबूत न होने पर इन आरोपों को खारिज भी किया जा सकता है।
महाराष्ट्र चुनाव का पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन ने 230 से अधिक सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को अपेक्षा से कम सीटें मिली थीं। विपक्ष ने उस समय भी मतदान प्रक्रिया और EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे, लेकिन कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। राहुल गांधी का यह बयान उस समय की बहस को फिर से हवा दे रहा है।
सोशल मीडिया पर बहस
राहुल गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। बीजेपी समर्थकों ने उन्हें “देशद्रोही” और “विदेश में भारत को बदनाम करने वाला” करार दिया। एक यूजर ने लिखा, “राहुल को अगर इतनी ही चिंता थी, तो भारत में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सबूत पेश करते। अमेरिका जाकर बयानबाजी करने से क्या हासिल होगा?” वहीं, कुछ यूजर्स ने उनके बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे “लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई” लड़ रहे हैं।
आगे क्या?
राहुल गांधी का यह बयान भारत में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को संसद के अगले सत्र में उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि बीजेपी इसे “विपक्ष की हताशा” करार दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना ठोस सबूत के ये आरोप ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाएंगे, लेकिन यह विपक्ष के लिए जनता के बीच अपनी बात रखने का एक मौका हो सकता है।
राहुल गांधी का अमेरिका दौरा अभी जारी है, और उनके अगले बयानों पर भी सबकी नजर रहेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश करते हैं या यह मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है।

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