वैशाख अमावस्या पर बन रहे हैं दुर्लभ योग

khabar pradhan

संवाददाता

25 April 2025

अपडेटेड: 2:25 PM 0thGMT+0530

वैशाख अमावस्या पर बन रहे हैं दुर्लभ योग

वैशाख अमावस्या पर बन रहे हैं दुर्लभ योग:

करें यह उपाय मिलेगी सफलता

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष रूप से पवित्र और शुभ फलदायक माना गया है ।इस दिन स्नान ,दान, पूजा, पाठ जैसे कर्म करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। वैशाख मास की अमावस्या का धार्मिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व होता है।
जानते हैं वैशाख अमावस्या की सही तिथि और शुभ मुहूर्त—

वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या 27 अप्रैल को सुबह 4:28 पर शुरू हो रही है। वहीं अमावस्या तिथि की समाप्ति 27 अप्रैल को देर रात 1:02 पर होगी ।उदया तिथि के अनुसार वैशाख अमावस्या 27 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि पर पितरों का पिंडदान श्राप श्रद्धा और तर्पण भी किया जाता है। कहा जाता है ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। वैशाख मास की अमावस्या को दर्श अमावस्या के नाम से जाना जाता है ।अमावस्या तिथि पर पितरों का पिंडदान ।श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और वंशजों को आशीर्वाद देते हैं ।इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है ।

वैशाख अमावस्या का महत्व

वैशाख अमावस्या के महत्व को लेकर वैशाख मास महात्म्य के 22वें अध्याय में नारदजी ने राजा अंबरीष को बताया है कि वैशाख मास माधव यानी भगवान विष्णु का महीना है। वैसे तो इस मास की सभी तिथियां पुण्य प्रदान करने वाली हैं। प्रत्येक तिथि में किए गए पुण्य का करोड़ों गुना फल होता है। अमावस्या मुक्ति देने वाली तिथि है। यह देवताओं को अति प्रिय है और तुरंत मुक्ति देने वाली है।
ऐसा माना जाता है की वैसाख की अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण और पिंडदान करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है ।साथ ही पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है ।अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद गरीब और जरूरतमंदों को अन्न ,जल, धन वस्त्र और भोजन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है ।

वैशाख अमावस्या करें यह उपाय मिलेगी सफलता :

(1)पितृ दोष को शांत करने के लिए :

पवित्र नदी में स्नान करें यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल डालकर स्नान करें । और पितरों को जल अर्पित करें। इसे पितृ दोष शांत होता है ।

(2)पुण्य फल प्राप्ति हेतु:
गरीबों को ब्राह्मणों को और जरूरतमंदों को अन्य जल वस्त्र जूते छाता आदि का दान करें इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पुण्य फल प्राप्तहोता है ।

(3) वास्तु दोष दूर करने हेतु:
हनुमान चालीसा या सुंदरकांड के पाठ से मन के अंदर बैठा हुआ डर दूर होता हैं और नेगेटिव एनर्जी दूर होती है ।

(4)घर की सुख शांति के लिए :
भगवान विष्णु शनिदेव और पितरों की पूजा करें ।मंदिर में फल ,मिठाई काले तिल और वस्त्र अर्पित करें ।

(5) अच्छे स्वास्थ्य हेतु :
इस दिन सत्तू का सेवन करना फलदाई होता है ।इससे शरीर में ठंडक मिलती है ।और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है ।

(6) अक्षय फल प्राप्ति हेतु :
वैशाख अमावस्या के दानपितरों के निमित्त जो वैशाख अमावस्या के दिन श्राद्ध करते हैं, जल से भरा घड़ा और पिण्ड दान करते हैं। उनको अक्षय फल मिलता है।

(7) सुख समृद्धि हेतु:
वैशाख अमावस्या पर घड़े का दान करने वाले के पितरों को पितृ लोक में शांति मिलती है। पितर आपसे प्रसन्न होते हैं। वे आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

इसलिए वैशाख अमावस्या पर घड़े, ककड़ी, अन्न, पंखे और फल का दान जरूर करना चाहिए।

वैशाख अमावस्या के दिन पूरी श्रद्धा के साथ जो श्राद्ध करता है। उसके पितरों को शांति मिलती है। अमावस्या पर गया में श्राद्ध करने का भी महत्व है। वहीं जो मधुमास की अमावस्या को दान नहीं देता है वो पितृघाती होता है। वहीं जो वैशाख अमावस्या पर ककड़ी का दान देता है। और कुल के हित के लिए भक्ति पूर्वक श्राद्ध करता है तो उसके पितरों के लिए पितर लोक में अमृत वाली नदी बहती है।

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