सचिन vs दादा: जब तेंदुलकर ने सौरव गांगुली को दी थी करियर खत्म करने की धमकी!

khabar pradhan

संवाददाता

24 May 2025

अपडेटेड: 10:37 AM 0thGMT+0530

सचिन vs दादा: जब तेंदुलकर ने सौरव गांगुली को दी थी करियर खत्म करने की धमकी!

Sachin vs Dada: When Tendulkar threatened to end Sourav Ganguly's career!

भारतीय क्रिकेट के दो दिग्गज, सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली, जिन्होंने अपनी बल्लेबाजी और नेतृत्व से भारत को विश्व क्रिकेट में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, एक समय एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए थे। एक पुरानी घटना फिर से सुर्खियों में है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सचिन ने सौरव गांगुली को करियर खत्म करने की धमकी दी थी। यह कहानी क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी सनसनी से कम नहीं है। आइए, इस विवाद की पूरी सच्चाई और इसके पीछे की कहानी को जानते हैं।

सचिन-दादा की दोस्ती और टकराव का दौर

सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट के सुनहरे युग के दो स्तंभ रहे हैं। गांगुली की कप्तानी में सचिन ने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं, और दोनों ने मिलकर भारत को कई यादगार जीतें दिलाईं। लेकिन 2000 के दशक के मध्य में इन दोनों दिग्गजों के बीच कुछ मतभेद उभरे, जो उस समय क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गए थे। यह घटना उस दौर की है, जब सौरव गांगुली की फॉर्म और कप्तानी पर सवाल उठ रहे थे, और सचिन तेंदुलकर टीम के सबसे बड़े सितारे थे।

धमकी का माजरा: क्या हुआ था?

खबरों के मुताबिक, 2005-06 के आसपास, जब सौरव गांगुली की फॉर्म और कप्तानी पर सवाल उठ रहे थे, तब एक कथित घटना में सचिन ने गांगुली से तीखी बातचीत की थी। उस समय गांगुली की खराब फॉर्म और चयन समिति के साथ तनाव ने उनके करियर को खतरे में डाल दिया था। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि सचिन ने गांगुली से कहा था कि अगर वह अपनी फॉर्म और रवैये में सुधार नहीं करते, तो उनका करियर खतरे में पड़ सकता है। हालांकि, इसे ‘धमकी’ के रूप में प्रचारित किया गया, लेकिन क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक दोस्ताना चेतावनी थी, जो सचिन ने गांगुली के हित में दी थी।

सचिन का रुख: सलाह या सख्ती?

सचिन तेंदुलकर, जो हमेशा अपनी शांत और सौम्य छवि के लिए जाने जाते हैं, ने इस घटना पर कभी खुलकर बात नहीं की। लेकिन कुछ करीबी सूत्रों का कहना है कि सचिन ने गांगुली को यह सलाह दी थी कि वह अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान दें और सिलेक्टर्स के साथ टकराव से बचें। उस समय सचिन का प्रभाव भारतीय क्रिकेट में इतना बड़ा था कि उनकी बात को गंभीरता से लिया जाता था। यह सलाह गांगुली के लिए एक चेतावनी की तरह थी, जिसे बाद में कुछ लोगों ने ‘धमकी’ के रूप में प्रचारित किया।

गांगुली की वापसी: दादा का जवाब

सौरव गांगुली ने इस मुश्किल दौर में हार नहीं मानी। 2006 में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था, लेकिन दादा ने अपनी शानदार फॉर्म और जुझारू रवैये से जोरदार वापसी की। 2007 में उन्होंने टेस्ट और वनडे में शानदार प्रदर्शन किया, जिसने उनके आलोचकों को चुप कर दिया। गांगुली ने बाद में अपनी आत्मकथा में इस दौर को अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण समय बताया, लेकिन सचिन के साथ किसी भी तरह की कटुता से इनकार किया।

सोशल मीडिया पर हलचल: प्रशंसकों की बहस

इस पुरानी घटना के फिर से चर्चा में आने से सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की राय बंट गई है। कुछ फैंस ने लिखा, “सचिन ने अगर कुछ कहा भी, तो वह गांगुली के लिए था, न कि उनके खिलाफ।” वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे सनसनीखेज बताते हुए कहा, “सचिन जैसे खिलाड़ी धमकी नहीं देते, यह सिर्फ मीडिया का ड्रामा है।” यह बहस दर्शाती है कि सचिन और गांगुली के प्रशंसक आज भी अपने-अपने हीरो के साथ खड़े हैं।

क्रिकेट के दो सितारे: एक अनोखी कहानी

सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली का यह कथित विवाद भले ही सुर्खियों में रहा हो, लेकिन दोनों ने हमेशा एक-दूसरे का सम्मान किया। गांगुली ने सचिन को ‘क्रिकेट का भगवान’ कहा, तो सचिन ने गांगुली की कप्तानी को भारतीय क्रिकेट का टर्निंग पॉइंट बताया। यह कहानी हमें याद दिलाती है कि मैदान के बाहर के विवादों के बावजूद, इन दोनों ने मिलकर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

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