झारखंड की राजनीति में हुआ एक युग का अंत: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन- क्यों कहलाए ‘दिशोम गुरुजी’
संवाददाता
4 August 2025
अपडेटेड: 12:51 PM 0thGMT+0530
4 अगस्त 2025: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने लंबी बीमारी के बाद 81 वर्ष की उम्र में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली।
शिबू सोरेन अपने जीवन के अंतिम दिनों में लंबे समय से बीमार थे और किडनी की समस्या से जूझ रहे थे। पिछले एक महीने से वह अस्पताल में भर्ती थे ।झारखंड के मुख्यमंत्री उनके पुत्र हेमंत सोरेन ने उनके निधन की जानकारी सोशल मीडिया पर दी और अपने सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर लिखा ‘आदरणीय गुरु जी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं और आज मैं शून्य हो गया हूं ‘।
कौन थे शिबू सोरेन : उनके जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी:
शिबू सोरेन को झारखंड में गुरु जी के नाम से जाना जाता था। वह झारखंड के मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे। और आदिवासी लोगों के अधिकारों की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई थी इसके अलावा उन्होंने झारखंड को अलग राज्य देने संबंधी मुहिम को नेतृत्व दिया था और झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री भी बने।
उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व कर आदिवासी इलाकों में सामाजिक और राजनीतिक चेतना का अभियान चलाया और झारखंड राज्य को अलग राज्य बनाने में उसकी पहचान दिलाने में एक अहम भूमिका निभाई।
झारखंड के तीन बार बने मुख्यमंत्री:
शिबू सोरेन आदिवासी नेता थे और पिछले 38 वर्षों से अधिक समय तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व किया उन्होंने झारखंड राज्य के लिए लंबे समय तक एक आंदोलन चलाया और झारखंड के मुख्यमंत्री बने।
पहली बार 2 मार्च 2005 को उन्होंने झारखंड की मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। किंतु बहुमत न होने के कारण 12 मार्च 2005 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस समय वे 10 दिन तक ही मुख्यमंत्री पद पर रहे।
इसके बाद दूसरी बार 27 अगस्त 2008 को मुख्यमंत्री बने और 19 जनवरी 2009 तक इस पद को सुशोभित किया।
तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 को उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री पद को संभाला और 1 जून 2010 तक इस पद पर रहे।
शिबू सोरेन 8 बार लोकसभा सांसद और 3 बार राज्यसभा के सांसद के पद पर भी रहे:
शिबू सोरेन आठ बार लोकसभा के सांसद चुनकर संसद पहुंचे इसके अलावा तीन बार राज्य भर सभा के भी सांसद रहे।
देश में केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उन्होंने देश को अपनी सेवाएं दी।
‘दिशोम गुरु ‘क्यों बोलते थे उन्हें लोग:
झारखंड में उन्हें लोग देश का गुरु यानी ‘दिशोम गुरु ‘कहकर लोग पुकारते थे।
उनके दिशोम गुरु कहलाने की कहानी भी काफी रोचक है।
शिबू सोरेन का जन्म रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड के नेमरा में 11 जनवरी 1944 को हुआ था। उनका प्रारंभिक जीवन का फिर संघर्षों से भरा रहा है। जब वे 13 वर्ष के थे तभी उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद शिबू सोरेन ने पढ़ाई छोड़ दी । और महाजनों के खिलाफ संघर्ष करने का फैसला किया।
पिता की हत्या के बाद उन्होंने महाजनों के खिलाफ आदिवासी समाज के लोगों को इकट्ठा किया।
और जो महाजन सूद खोर होते थे उनके खिलाफ काम करना शुरू किया।
1970 में वे महाजनों के खिलाफ खुलकर सामने आ गए और धान कटनी आंदोलन की शुरुआत कर दी।
सूदखोरों के खिलाफ आंदोलन चलाकर वे चर्चा में आ गए। किंतु सभी महाजनों को उन्होंने अपना दुश्मन बना लिया । इसी बीच शिबू को रास्ते से हटाने के लिए कई महाजन भी इकट्ठे हो गए।
एक बार उन्हें महाजनों के गुंडो ने घेर लिया । बारिश के मौसम में बराकर नदी तूफान पर थी। आदिवासियों को जागरूक करने के लिए बाइक से गांव गांव जाते थे।
महाजनों के गुंडो ने उन्हें नदी के पास घेर लिया । अब उन्होंने अपनी बाइक की रफ्तार बढाई और बाइक समेत नदी में छलांग लगा दी।
ईश्वर के चमत्कार से शिबू सोरेन ने नदी को तैर कर पार किया और नदी के दूसरे छोर पर पहुंच गए। सभी लोगों ने इसे चमत्कार माना और उन्हें तभी से दिशोम गुरु कहना शुरू कर दिया।
झारखंड में शोक की लहर:
उनके निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने शिबू सोरेन के निधन पर दुख जताया है उन्होंने उनके बेटे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी बात की।
शिबू सोरेन के निधन पर पीएम मोदी ने उन्हें जमीनी स्तर का नेता बताया और कहा कि उनके निधन से उन्हें बहुत दुख पहुंचा है।
शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र निश्चित कल के लिए स्थगित कर दिया गया है स्पीकर रविंद्र नाथ महतो ने शोक संदेश के साथ यह जानकारी साझा की ।
झारखंड राज्य की सरकार ने तीन दिवस का राजकीय शोक की घोषणा की है।