डीएनए विवाद से सियासी संग्राम तक: अखिलेश यादव बनाम ब्रजेश पाठक, अब सीएम योगी भी मैदान में

khabar pradhan

संवाददाता

19 May 2025

अपडेटेड: 11:21 AM 0thGMT+0530

डीएनए विवाद से सियासी संग्राम तक: अखिलेश यादव बनाम ब्रजेश पाठक, अब सीएम योगी भी मैदान में

डीएनए विवाद से सियासी संग्राम तक: अखिलेश यादव बनाम ब्रजेश पाठक, अब सीएम योगी भी मैदान में

उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोपों के दौर में पहुंच चुकी है. इस बार सियासी घमासान की जड़ बना है “डीएनए” विवाद, जिसमें भाजपा के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव आमने-सामने हैं. विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल ने ब्रजेश पाठक के डीएनए को लेकर एक आपत्तिजनक पोस्ट की. इस पोस्ट में उनका डीएनए कोलकाता के रेड लाइट एरिया सोनागाछी और दिल्ली के जीबी रोड से जोड़कर तंज कसा गया.
इस पर ब्रजेश पाठक भड़क उठे और सीधे अखिलेश यादव व डिंपल यादव से सवाल पूछा कि क्या यह आपकी पार्टी की भाषा है? क्या इस तरह दिवंगत माता-पिता के लिए भी अपशब्द कहे जाएंगे? भाजपा की ओर से इस पोस्ट को लेकर FIR दर्ज कराई गई है, वहीं आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में भी गहरा आक्रोश दिखाई दे रहा है.

बयानबाज़ी की रफ्तार तेज: अखिलेश-पाठक आमने-सामने, केशव मौर्य और योगी भी मैदान में
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सोमवार सुबह एक बार फिर अखिलेश यादव पर हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अखिलेश यादव सपा के डीएनए पर सवाल पूछने से इतने भड़क गए जैसे वे सत्ता से बाहर होने पर भड़के थे. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति तुष्टिकरण और जातिवाद पर आधारित है. पाठक ने यह भी कहा कि सपा ने कभी आतंकियों से जुड़े 14 केस एक साथ वापस लेने की कोशिश की थी, और मुस्लिम तुष्टिकरण उनकी राजनीति की रीढ़ है.
इस बीच डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने भी ब्रजेश पाठक के समर्थन में मोर्चा संभाला. उन्होंने कहा कि सपा का समाजवाद अब ‘लठैतवाद’ में बदल चुका है. वहीं, सोमवार को ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए सपा प्रमुख पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा से अच्छे व्यवहार की उम्मीद करना बेमानी है. लेकिन सभ्य समाज उनके अश्लील बयानों को बर्दाश्त नहीं करेगा. योगी ने यह भी कहा कि सपा नेतृत्व को अपने सोशल मीडिया हैंडल की समीक्षा करनी चाहिए.

राजनीतिक शुचिता पर सवाल, FIR और कानूनी प्रक्रिया में तेजी
डीएनए विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपा को ‘परिवारवादी जेनेटिक मिक्सचर’ बताते हुए जवाब दिया. उन्होंने कहा कि सपा का डीएनए दंगे, दरबार और दबंगों से जुड़ा है, जबकि भाजपा नेताओं का डीएनए जनसेवा का है. जवाब में सपा की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं. पार्टी की मीडिया सेल ने लिखा कि ब्रजेश पाठक जैसे लोग जब समाजवाद पर भाषण देते हैं और फिर सवाल पूछे जाने पर तिलमिला जाते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि सच्चाई उन्हें चुभती है.
इस मामले में अब तक लखनऊ के हजरतगंज और वजीरगंज थानों में कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं. वकील, समाजसेवी और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सपा की मीडिया टीम के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. वहीं, यह पहली बार नहीं है जब भाजपा और सपा के बीच सोशल मीडिया पर तीखी लड़ाई हुई हो. 7 महीने पहले नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा और अखिलेश यादव की टीम के बीच भी ऐसा ही जुबानी टकराव देखने को मिला था, जिसमें एफआईआर तक की नौबत आई थी.

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