Som Distillery केस में हाई कोर्ट की सख्ती, आबकारी आयुक्त की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
संवाददाता
24 March 2026
अपडेटेड: 2:21 PM 0thGMT+0530
24 मार्च 2026
जबलपुर/भोपाल। Som Distillery से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने खास तौर पर आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
न्यायाधीश विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद भले ही फैसला सुरक्षित रख लिया हो, लेकिन मौखिक टिप्पणियों में विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने संकेत दिया कि कुछ कदम ऐसे उठाए गए, जिनसे आरोपियों को लाभ मिलता नजर आता है।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि 2023 में कर्मचारियों की दोषसिद्धि के बावजूद 26 फरवरी 2024 को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस में कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर का नाम शामिल नहीं किया गया, जबकि उनके खिलाफ भी आरोप थे। इसे अदालत ने गंभीर चूक माना।
इसके अलावा, 2024 में की गई शिकायत करीब दो साल तक मुख्य सचिव स्तर पर लंबित रही और बाद में उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद ही कार्रवाई शुरू हो सकी। इस देरी को लेकर भी कोर्ट ने सवाल उठाए।
न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इंदौर क्षेत्र के मामले में ग्वालियर से कानूनी राय लेने और कार्रवाई में देरी करना उचित नहीं है।
फिलहाल कोर्ट ने मामले में अंतिम निर्णय सुरक्षित रखा है और अगली सुनवाई में विस्तृत पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।