सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
संवाददाता
23 April 2025
अपडेटेड: 6:45 AM 0rdGMT+0530
वक्फ बोर्ड मेंबर केवल बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्य
वक्फ बोर्ड मेंबर केवल बार काउंसिल के मुस्लिम सदस्य
गैर-मुस्लिमों पर रोक
मणिपुर हाईकोर्ट का फैसला पलटा, दो सख्त शर्तें लागू
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड की सदस्यता को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिसने देशभर में वक्फ बोर्ड के गठन और कार्यप्रणाली को लेकर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए व्यक्ति का बार काउंसिल का सदस्य होना अनिवार्य है और उसे मुस्लिम होना चाहिए। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें गैर-मुस्लिम व्यक्तियों को भी वक्फ बोर्ड की सदस्यता के लिए योग्य माना गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दो महत्वपूर्ण शर्तें लागू की हैं। पहली शर्त के अनुसार, वक्फ बोर्ड के सदस्य का कार्यकाल उनकी बार काउंसिल की सदस्यता के साथ समाप्त हो जाएगा। दूसरी शर्त में कहा गया है कि सदस्यों का चयन वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों के अनुसार किया जाएगा। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि वक्फ बोर्ड का गठन और उसकी कार्यप्रणाली धार्मिक, सांस्कृतिक और कानूनी मापदंडों के अनुरूप होनी चाहिए।
इस फैसले का आधार वक्फ बोर्ड के उद्देश्य को बताया गया, जो मुस्लिम समुदाय की धार्मिक, सामाजिक और परोपकारी जरूरतों को पूरा करना है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वक्फ बोर्ड का प्रबंधन और प्रशासन ऐसे व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए, जो न केवल कानूनी रूप से योग्य हों, बल्कि समुदाय की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं को भी समझते हों।
मणिपुर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में गैर-मुस्लिम व्यक्तियों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने की अनुमति दी थी, जिसे कई संगठनों और धार्मिक नेताओं ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के तर्क सुने और यह निष्कर्ष निकाला कि वक्फ बोर्ड की प्रकृति और उसके कार्यों को देखते हुए केवल मुस्लिम बार काउंसिल सदस्य ही इसके लिए उपयुक्त हैं।
इस फैसले से वक्फ बोर्ड की सदस्यता को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति खत्म होने की उम्मीद है। यह निर्णय वक्फ बोर्ड के प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और उनके उचित उपयोग को सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वक्फ बोर्ड के गठन में एकरूपता लाएगा और भविष्य में इस तरह के विवादों को कम करेगा। वहीं, धार्मिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं के सम्मान के रूप में देखा है