ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना जल्द होगी शुरू
संवाददाता
8 May 2025
अपडेटेड: 12:19 PM 0thGMT+0530
ताप्ती बेसिन मेगा रीचार्ज परियोजना जल्द होगी शुरू
मप्र की मोहन सरकार अब तीसरी नदी जोड़ो परियोजना पर काम करने जा रही है…..जिसके लिए मध्यप्रदेश सरकार और महाराष्ट्र की फणनवीस सरकार को बीच एक समझौता बी हो रहा है…इस समझौते के तहत ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना पर दोनों राज्यों की सहमति होगी…..दरअसल मप्र के सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश शीघ्र ही तीसरी नदी जोड़ो परियोजना शुरू करेगा…और इस परियोजना में महाराष्ट्र सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा….और इसके लिए आने वाली10 मई को ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए एमओयू साइन होगा….इसके बाद से मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र दोनों राज्यों में सिंचाई क्षेत्र के विस्तार और पेयजल उपलब्धता के लिए ये परियोजना बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी…इस योजना का लाभ गुजरात को भी मिलेगा….मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की नदी जोड़ो परियोजना की संकल्पना को क्रियन्वित करने में मध्यप्रदेश, देश में अग्रणी रहा है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बाद अब महाराष्ट्र के साथ ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना के लिए एमओयू होने जा रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस भी 10 मई को भोपाल में मौजूद रहेंगे…. मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निवास पर मीडिया से मुखातिब होकर योजना पर विस्तार से जानकारी देंगे…. केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल के बाद, अब ताप्ती बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना शुरू होने जा रहा है…. इस समझौते पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव हस्ताक्षर करेंगे। इस परियोजना का लक्ष्य महाराष्ट्र के उत्तरी क्षेत्र और मध्य प्रदेश के दक्षिणी इलाकों में पानी पहुंचाना है। इससे नागपुर में पीने के पानी और छिंदवाड़ा में सिंचाई की समस्या दूर होगी। सरकार का कहना है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा भूजल प्रोजेक्ट होगा…इससे पीने के पानी की उपलब्धता भी आसान होगी। दरअसल ये परियोजना मध्य प्रदेश के लंबे समय से चल रहे अंतर्राज्यीय जल-बंटवारे के विवादों को सुलझाने की दिशा में एक कदम है…. ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना में 31 टीएमसी पानी का उपयोग होगा….इस योजना से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बुरहानपुर और खंडवा जिले में पानी की संस्या से निजात मिलेगी….अच्छी बात यह है कि इस परियोजना को पूरा करने के लिए किसी भी गांव को नहीं हटाया जाएगा….न की गांव खाली कराया जाएगा….. इसलिए लोगों को दूसरी जगह बसाने की जरूरत नहीं पड़ेगी…. इस योजना से मध्य प्रदेश के 1 लाख 23 हजार 082 हेक्टेयर क्षेत्र में औऱ महाराष्ट्र के 2 लाख 34 हजार 706 सेक्टर में सिंचाई प्रस्तावित है….पहले 66 टीएमसी का जलाशय बनाने का प्रस्ताव था… लेकिन, लोगों को हटाने और वन क्षेत्रों और बाघ अभयारण्यों पर पड़ने वाले बुरे असर को देखते हुए भूजल पुनर्भरण मॉडल पर ध्यान दिया गया…अच्छी बात ये है कि अब इस करार को अंतिम रूप दिया जा रहा है….