बीएचयू में छात्रों का प्रदर्शन जारी
संवाददाता
3 June 2025
अपडेटेड: 8:52 AM 0rdGMT+0530
The students' protest is ongoing at BHU.
प्रशासनिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ उबाल
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में छात्रों का प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। विभिन्न छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर भ्रष्टाचार, प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं और प्रशासनिक गुंडागर्दी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस आंदोलन में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी), और भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) जैसे संगठनों के छात्र शामिल हैं।
प्रदर्शन की वजह क्या है?
हालिया प्रदर्शनों का केंद्र विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निर्णय और कथित भ्रष्टाचार हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रवेश प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। विशेष रूप से, बीएचयू कोटा और नॉन-बीएचयू कोटा सीटों के आवंटन में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। इसके अलावा, इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएस) में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ भी छात्रों ने आवाज उठाई है। 29 मई 2025 को सीनियर और जूनियर रेजिडेंट्स ने आईएमएस निदेशक कार्यालय का घेराव किया, जिसमें प्रो. सौरभ सिंह को हटाने और ट्रॉमा सेंटर का चार्ज डायरेक्टर को सौंपने की मांग की गई। 1 जून 2025 को एनएसयूआई के नेतृत्व में छात्रों ने डीबीकेएन कॉलेज से नरहन मार्केट तक पैदल मार्च निकाला और कुलपति का पुतला दहन किया। इसके साथ ही, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी आईएमएस बिल्डिंग के बाहर प्रदर्शन कर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। छात्रों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल कार्रवाई करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
छात्रों की मांगें
प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन।
आईएमएस में भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच।
प्रशासनिक गुंडागर्दी पर रोक और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई।
परिसर में सुरक्षा बढ़ाने के लिए सीसीटीवी और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था।
विश्वविद्यालय प्रशासन का रुख
बीएचयू प्रशासन ने अभी तक इन प्रदर्शनों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने कुछ मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र इसे अपर्याप्त मान रहे हैं। इससे पहले, 2023 में आईआईटी-बीएचयू में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की घटना के बाद भी छात्रों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन को कुछ कदम उठाने पड़े थे।
बीएचयू में यह कोई नया मामला नहीं है। 2017 में यौन उत्पीड़न की एक घटना के बाद छात्राओं ने प्रशासन के रवैये और पीड़िता को दोषी ठहराने के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन किया था। 2023 में, आईआईटी-बीएचयू में कथित गैंगरेप की घटना के बाद 14 छात्रों को निलंबित किया गया था, जिसे छात्र संगठनों ने दमनकारी कदम बताया था। हाल ही में, एक दलित छात्र शिवम सोनकर ने 17 दिनों तक धरना देकर पीएचडी में प्रवेश के लिए लड़ाई लड़ी थी, जिसके बाद उन्हें प्रवेश का आश्वासन मिला।