अक्षय तृतीया का वास्तविक संदेश…
संवाददाता
29 April 2025
अपडेटेड: 12:54 PM 0thGMT+0530
अक्षय तृतीया का वास्तविक संदेश :
(सोने से हटकर)
अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि अक्षय तृतीया कहलाती है।
अक्षय का अर्थ है -जिसका कभी क्षय ना हो ।
जो स्थाई हो ,इसे आखा तीज भी कहते हैं ।अक्षय तृतीया भले ही हमारे त्यौहारों में बहुत साधारण सा लगता है। लेकिन इसका महत्व बहुत अधिक है।
सभी जगह विज्ञापनों में अक्षय तृतीया में सोना खरीदने की बात कही जाती है ।लेकिन क्या यह पर्व सिर्फ सोना खरीदने तक सीमित है ।हमारे पूर्वज कहते थे इस दिन किए गए किसी भी काम में वृद्धि होती है ।
अक्षय तृतीया का वास्तविक महत्व क्या है ?
क्षय शब्द का अर्थ है कम होना या घट जाना।
अक्षय का अर्थ है जो कभी ना घटे ।
इस तरह अक्षय का अर्थ है– किसी अनंत समृद्धि ,धन और संपदा ,जो कभी समाप्त न हो ।
महाभारत में द्रोपदी के पास अक्षय पात्र था ,जो सूर्य देव ने उन्हें इस दिन के लिए प्रदान किया था ।यह पात्र पांडवों को निर्वासन के दौरान असीम भोजन प्रदान करता था ।लेकिन इस दिन ऐसा कौन सा ऐतिहासिक घटनाक्रम हुआ ,जिसने इस भूमि को इतनी अनंत समृद्धि प्रदान की कि हमने इसे एक उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया ।
क्यों है अक्षय तृतीया इतना महत्वपूर्ण:
*इस दिन त्रेता युग का शुभारंभ भी हुआ था।
*इस दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण भी हुआ था ।
*इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म भी हुआ था ।
*और वेदवाव्यास द्वारा महाभारत की रचना का शुभारंभ भी इसी दिन हुआ था ।
*इसी दिन सुदामा और श्री कृष्ण की मुलाकात हुई थी।
- और कृष्णा ने सुदामा को बिना मांगे अपार समृद्धि दी थी।
यह सभी कारण इस पर्व को विशेष बनाते हैं ।परंतु इससे भी महत्वपूर्ण एक बात है, जो पुराने समय में सूर्यवंश के राजा भगीरथ की कथा से मिलती है। जो श्री राम और दशरथ के पूर्वज थे –भागीरथ –
भागीरथ के ही असाधारण प्रयास से गंगा के जल को हिमालय के पार अपनी सूखी भूमि तक लाए थे। इसलिए इसे भगीरथ प्रयत्न कहा जाता है।
गंगा के जल ने हमारी इस पावन भूमि को युगों युगों तक समृद्धि प्रदान की ।
अक्षय तृतीया वह दिन है जब भागीरथ के प्रयासों से गंगा जी ने हिमालय की ऊंचाई से भारत के मैदाने की ओर से अपनी यात्रा प्रारंभ की ।यह पर्व अक्षय तृतीया का पर्व जल से समृद्धि लाने की इस घटना का पावन पर्व है। दुर्भाग्य वश आज हमारा ध्यान समृद्धि के कारण जल से हटकर समृद्धि के परिणाम सोने पर केंद्रित हो गया है। गंगा जिसकी वजह से अक्षय तृतीया मनाई जाती है उसे तो हम लगातार प्रदूषित कर रहे हैं ।
इसलिए अक्षय तृतीया के वास्तविक पर्व को समझें और इस संदेश की रक्षा करें ।अक्षय पर्व की रक्षा करें।