ट्रंप का सीरिया पर नया रुख…
संवाददाता
24 May 2025
अपडेटेड: 10:52 AM 0thGMT+0530
*ट्रंप का सीरिया पर नया रुख:
अहमद अल-शरा से मुलाकात के बाद ऐतिहासिक घोषणा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सीरिया के नए नेता अहमद अल-शरा के साथ मुलाकात के बाद एक ऐसी घोषणा की है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। यह मुलाकात और इसके बाद की घोषणा न केवल सीरिया के भविष्य को प्रभावित कर सकती है, बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति में भी एक नया अध्याय जोड़ सकती है। आइए, इस घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि ट्रंप का यह नया रुख दुनिया के लिए क्या मायने रखता है।
एक मुलाकात, जो बनी सुर्खियों का केंद्र
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सीरिया के विद्रोही नेता अहमद अल-शरा से मुलाकात की। यह मुलाकात उस समय हुई, जब सीरिया में लंबे समय से चल रहा गृहयुद्ध और राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। अहमद अल-शरा, जो हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के प्रमुख हैं, ने हाल ही में सीरिया में सत्ता पर कब्जा किया है। उनकी इस जीत ने न केवल क्षेत्रीय समीकरणों को बदला है, बल्कि वैश्विक शक्तियों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
ट्रंप, जो अपनी अप्रत्याशित और बेबाक शैली के लिए जाने जाते हैं, ने इस मुलाकात के बाद सीरिया को लेकर एक नया दृष्टिकोण अपनाया है। उनकी यह घोषणा कि अमेरिका अब सीरिया के पुनर्निर्माण और स्थिरता में सहयोग करेगा, ने कई लोगों को चौंकाया है। यह ट्रंप के पहले कार्यकाल से एकदम अलग रुख है, जब उन्होंने सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप को कम करने पर जोर दिया था।
क्या है ट्रंप की नई रणनीति?
ट्रंप ने अपनी घोषणा में कहा, “सीरिया में अब एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। हम अहमद अल-शरा के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि सीरिया में शांति और स्थिरता स्थापित हो। यह न केवल सीरिया के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक नया अवसर है।” इस बयान से साफ है कि ट्रंप अब सीरिया में सक्रिय भूमिका निभाने के मूड में हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका सीरिया के पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान कर सकता है। इसके साथ ही, उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सीरिया के नए नेतृत्व के साथ सहयोग की बात कही। यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अहमद अल-शरा की पार्टी HTS को पहले अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश आतंकी संगठन मानते थे। लेकिन अब ट्रंप का यह रुख एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
क्यों बदला ट्रंप का नजरिया?
ट्रंप का यह नया दृष्टिकोण कई कारकों का परिणाम हो सकता है। सबसे पहले, सीरिया में बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद पैदा हुआ शक्ति का शून्य। इस शून्य को भरने के लिए कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां सक्रिय हैं, जिसमें रूस, तुर्की और ईरान जैसे देश शामिल हैं। ट्रंप शायद यह नहीं चाहते कि सीरिया में रूस या ईरान का प्रभाव बढ़े।
दूसरा, अहमद अल-शरा ने हाल के दिनों में अपनी छवि को एक कट्टरपंथी नेता से बदलकर एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया है, जो सीरिया में सुधार और स्थिरता चाहता है। उनकी यह छवि ट्रंप को भरोसा दिलाने में कामयाब रही हो सकती है कि उनके साथ मिलकर काम किया जा सकता है।
वैश्विक मंच पर क्या होगा असर?
ट्रंप की इस घोषणा का असर न केवल सीरिया, बल्कि पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। यह कदम तुर्की, सऊदी अरब और इजरायल जैसे देशों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो सीरिया में अपने हितों को सुरक्षित रखना चाहते हैं। वहीं, रूस और ईरान जैसे देशों के लिए यह एक चुनौती हो सकती है, क्योंकि अमेरिका का बढ़ता प्रभाव उनके लिए रणनीतिक नुकसान का कारण बन सकता है।
इसके अलावा, सीरिया के आम लोगों के लिए यह एक नई उम्मीद की किरण हो सकती है। लंबे समय से युद्ध और अस्थिरता झेल रहे सीरियाई नागरिक अब शांति और पुनर्निर्माण की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि ट्रंप की यह नीति कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।
आलोचनाओं का साया
ट्रंप के इस फैसले की आलोचना भी शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि HTS जैसे संगठन के साथ सहयोग करना अमेरिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं, कुछ लोग इसे एक व्यावहारिक कदम मान रहे हैं, जो क्षेत्र में स्थिरता लाने में मदद कर सकता है।
ट्रंप का यह कदम निश्चित रूप से सीरिया और मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ लाएगा। अब सवाल यह है कि क्या यह नीति वास्तव में सीरिया में शांति और समृद्धि ला पाएगी? या यह केवल एक और राजनीतिक दांव है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने के लिए खेला गया है?
इस मुलाकात और घोषणा ने न केवल सीरिया, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की यह रणनीति किस दिशा में ले जाती है और क्या यह सीरिया के लोगों के लिए एक नई सुबह की शुरुआत कर पाएगी।*