तुर्किये की कंपनी ‘असिस गार्ड’ पर विवाद: भोपाल-इंदौर मेट्रो के भविष्य पर संकट ?

khabar pradhan

संवाददाता

21 May 2025

अपडेटेड: 8:13 AM 0stGMT+0530

तुर्किये की कंपनी ‘असिस गार्ड’ पर विवाद: भोपाल-इंदौर मेट्रो के भविष्य पर संकट ?

तुर्किये की कंपनी 'असिस गार्ड' पर विवाद: भोपाल-इंदौर मेट्रो के भविष्य पर संकट ?

मध्यप्रदेश के दो प्रमुख शहरों, भोपाल और इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम (AFCS) लगाने वाली तुर्किये की कंपनी ‘असिस गार्ड’ पर अब देशविरोधी गतिविधियों से जुड़ी आशंका जताई जा रही है. नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. वहीं, यह विवाद उस समय गरमा गया है जब मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू होने में महज 10 दिन बाकी हैं.

पाकिस्तान से जुड़ी गतिविधियों पर शक, जांच के आदेश

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “जो भी भारत की संप्रभुता के विरुद्ध खड़ा होगा, उसके साथ कोई सहानुभूति या सहयोग असहनीय है.” उन्होंने बताया कि तुर्किये की इसी कंपनी के ड्रोन पाकिस्तान द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल किए गए थे. इसी आधार पर उन्होंने कंपनी के खिलाफ गहन और निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं.
अगर जांच में यह साबित होता है कि ‘असिस गार्ड’ का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध भारत विरोधी तत्वों से रहा है, तो उसका मेट्रो प्रोजेक्ट से अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा. यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी संवेदनशीलता से जुड़ा हुआ है, क्योंकि कंपनी ऑटोमेटिक टिकटिंग सिस्टम सहित किराया वसूलने के पूरे तंत्र की जिम्मेदारी संभाल रही है.

सबसे कम बोली लगाकर मिली थी मेट्रो प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी
साल 2024 में एमपी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने इंटरनेशनल टेंडर कॉल किया था. इसमें तीन कंपनियों ने भाग लिया – तुर्किये की असिस गार्ड, भारत की NEC कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, और शेलिंग फॉस्क ग्लोबल डिजिटल टेक्नोलॉजी. कुल 230 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के लिए असिस ने 186.52 करोड़ रुपये की सबसे कम बोली लगाकर ठेका हासिल किया.
अब तक कंपनी ने भोपाल और इंदौर में 5-5 यानी 10 स्टेशनों पर AFCS सिस्टम इंस्टॉल कर दिया है. भोपाल के कुछ स्टेशनों जैसे सुभाष नगर, एमपी नगर और रानी कमलापति पर गेट्स लग चुके हैं, जबकि डीआरएम तिराहा और एम्स पर काम चल रहा है. इसी तरह इंदौर के गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक सिस्टम लगाया जा चुका है.

मेट्रो के भविष्य पर सवाल, पीएम मोदी करेंगे कमर्शियल रन का उद्घाटन

इस पूरे विवाद के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 मई को भोपाल से मेट्रो के कमर्शियल रन को वर्चुअली हरी झंडी दिखा सकते हैं. लेकिन मंत्री विजयवर्गीय के बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि अगर ‘असिस गार्ड’ का अनुबंध रद्द होता है, तो इन दोनों शहरों की मेट्रो सेवाओं का भविष्य क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ठेका रद्द होता है, तो सिस्टम को दोबारा इंस्टॉल कराने में समय और पैसा दोनों की भारी बर्बादी होगी. साथ ही मेट्रो के पहले चरण के 53 स्टेशनों पर काम रुक सकता है. सरकार इस मामले में जल्द निर्णय लेगी, क्योंकि यह मुद्दा न केवल सार्वजनिक परिवहन से जुड़ा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता से भी सीधा ताल्लुक रखता है.

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