UGC नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक:

khabar pradhan

संवाददाता

1 February 2026

अपडेटेड: 12:07 PM 0stGMT+0530

UGC नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक:

UGC नियमों को लेकर बड़ा अपडेट है सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई …कोर्ट ने कहा है इसकी भाषा में स्पष्टता नहीं, है औऱ इसके साथ ही केंद्र को कमेटी बनाने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट में एक PIL दायर की गई है, जिसमें नियमों की धारा 3C को चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया कि ये धारा जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है और संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 का उल्लंघन करती है।  सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों के हनन पर भी चिंता जताई गई है।

और सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर   फिलहाल रोक लगा दी है।  UGC के नए नियमों को लेकर देश में अब विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

सोशल मीडिया से लेकर सड़कों पर उतरे सवर्ण इसे वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।

पिछले तीन दिनों से कहा जा रहा था कि विपक्ष कहां गायब है। विपक्ष अब इस मुद्दे पर सामने आया है । सवर्ण जहां नए नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. वहीं कई राजनीतिक दलों ने भी अपना स्टैंड क्लीयर कर दिया है. इसमें सपा से लेकर बसपा तक CM स्टालिन  से लेकर दिग्विजय सिंह तक अब अपना विजन दे चुके हैं…UGC के नए नियमों के पक्ष में खुलकर आए विपक्ष  से ये बात बिल्कुल साफ हो चुकी है सवर्णों के वोट विपक्ष को तो बिल्कुल नहीं चाहिए क्योंकि इन्होंने बिल का स्वागत किया है इस पूरे मुद्दे पर किसने क्या कहा है।

अभी तक किसी भी दल का कोई बयान नहीं आया था लेकिन अब एक के बाद एक बिल के पक्ष में नेताओं के बयान आने लगे हैं। वो कहते हैं न खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है। यही हाल इन नेताओं का है। जनता मरे कटे इन पर कोई फर्क नहीं पड़ता । बस वोटबैंक नहीं खिसकना चाहिए और अब ये हवा का रूख देखकर बयान देने लगे हैं.।

सबसे पहले बात करते हैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की जो सनातन को कैंसर बता चुके हैं….इसे खतम करने की बात करते रहे हैं हालांकि कोर्ट से उन्हें जमकर फटकार लगी है।
UGC के नए भेदभाव-विरोधी नियमों का समर्थन किया, इसे उच्च शिक्षा के लिए ‘स्वागत योग्य कदम’ बताया. हालांकि, उन्होंने इसके लागू होने की स्वतंत्रता पर चिंता भी जताई. स्टालिन ने इन नियमों के खिलाफ हो रहे विरोध को ‘पिछड़ी सोच’ का करार दिया ये भी कहा कि भाजपा शासन में छात्रों की आत्महत्याओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है…

इस पूरे विवाद पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं. उन्होंने इस बिल को बीजेपी की चाल बताया है…. अखिलेश ने कहा कि इन नियमों से पीडीए समाज को कोई राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि ज्यादातर उच्च संस्थाओं पर गैर पीडीए समाज के लोग काबिज हैं. इस तरह से अखिलेश यादव ने बिल्कुल नपा तुला …एक तरह से संतुलित बयान दिया है…है, जिससे सवर्ण समाज भी खुश रहे और वोटबैंक को भी आंच न आए…..यहां भी उन्होंने अपना पीडीए कार्ड खेला….

वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी बहुत बैलेंस बयान दिया है…मायावती ने नए नियम का विरोध करने वालों पर निशाना साधा है. उनका कहना है सामान्य वर्ग के जातिवादी मानसिकता के लोगों ने इसे अपने विरुद्ध षडयंत्रकारी मानकर इसका विरोध किया जा रहा है, यह कतई उचित नहीं है…. अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो देश में फिर सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता..अब बताते हैं आपको 2012 में बिल लाने वाली कांग्रेस का क्या स्टैंड है..

जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने की थी…. उनका कहना है समिति की सिफारिशों से कोई लेना-देना नहीं है… इस पूरे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी UGC और शिक्षा मंत्रालय की है,ना कि संसद की समिति की…तो इस तरह से पूरा रायता फैलाकर पल्ला झाड़ लिया है ।
इस मुद्दे पर यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, जिस तरह से उन्होंने अपनी नाकामी छिपाने के लिए हिंदू-मुस्लिम किया, अब UGC के ज़रिए दलित और सवर्णों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं. अजय राय कह रहे हैं कि बीजेपी अपने आखिरी दौर में हैं….

वहीं .आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने तो इन नियमों को और भी सख्त करने की ज़रूरत बताई है…….

इधर जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने भी UGC नियमों का समर्थन किया है. उनका कहना है हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी होगी ताकि SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को तुरंत सुना जा सके.

…शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बड़ी चतुराई से शिक्षा मंत्री को टारगेट किया…. ये कहकर इस बारे में वो मौखिक आश्वासनों के बजाय, एक मंत्री के तौर पर उन्हें इसे वापस ले लेना चाहिए….तो कुल मिलाकर अब पूरा का पूरा विपक्ष एक तरह से बिल के समर्थन में दिखाई दे रहा है….मतलब UGC पर अब तक की सबसे बड़ी जानकारी ये है कि अब यूजीसी को लेकर राजनीतिक घमासान मचना तय है… UGC के इक्विटी Regulations को लेकर चल रहे विरोध और भ्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है… इस समिती में शामिल सांसद सुधांशु त्रिवेदी संबित पात्रा जैसे नेताओं का कोई अतापता नहीं हैं…

अब समझना जरूरी है कि संख्याबल किस तरह से काम करता है…इसीलिए पार्टियां कह रहीं हैं कि जिसकी जितनी साझेदारी उतनी उसकी हिस्सेदारी…फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी है तो ये समझना होगा कि इंसाफ होगा या ये सत्ता की चाल है….

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