वक्फ एक्ट के बाद बीजेपी राजनीतिक लाभ उठाने की कर रही कोशिश
संवाददाता
11 April 2025
अपडेटेड: 9:40 AM 0thGMT+0530
वक्फ एक्ट के बाद बीजेपी राजनीतिक लाभ उठाने की कर रही कोशिश
वक्फ कानून बनने के बाद से कई जगहों पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे को जल्द शांत होने देने के मूड में नहीं है। इस साल के आखिर में बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। फिर बंगाल और केरल में भी चुनाव है। इसलिए बीजेपी ने वक्फ कानून को अपने फायदे में बदलने की रणनीति तैयार कर ली है।
वक्फ विधेयक के कानून बनने के बाद से विपक्ष ने बीजेपी और मोदी सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। सारी तैयारी इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव और अगले साल के पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में चुनाव को लेकर है। जहां कांग्रेस और विपक्ष में उसके अन्य साथियों को लग रहा है कि यह एक ऐसा मु्द्दा है, जिसपर न सिर्फ मुस्लिम वोट गोलबंद होगा, बल्कि ईसाई जैसे अन्य अल्पसंख्यक समुदाय पर भी डोरे डाले जा सकते हैं। लेकिन, भाजपा ने इस चुनौती को भी अवसर में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है।
भाजपा 20 अप्रैल से 15 दिनों के लिए ‘वक्फ सुधार जनजागरण अभियान’ शुरू करने जा रही है। साथ ही नाम से तो लग रहा है कि पार्टी इसके माध्यम से नए वक्फ कानून से जुड़ी गलतफहमियां दूर करने वाली है, वही लेकिन इसके माध्यम से वह विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर चलाए जा रहे नैरेटिव को न सिर्फ काटने की तैयारी में है, बल्कि इसके माध्यम से अपना चुनावी समीकरण भी मजबूत करना चाहती है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अगुवाई में पार्टी मुख्यालय में ‘वक्फ सुधार जनजागरण अभियान’को लेकर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया है, जिसमें केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चाओं के प्रमुखों और संयोजकों से बात की और उन्हें नए कानून के फायदे और इसे लाने की आवश्यकता की जानकारी दी।
‘वक्फ सुधार जनजागरण अभियान’ की औपचारिक शुरुआत से पहले पार्टी इसी तरह के वर्कशॉप जिला और प्रदेश स्तर पर भी आयोजित करने जा रही है। दरअसल, इसके माध्यम से बीजेपी न सिर्फ मुस्लिम महिलाओं तक नए वक्फ कानून की हकीकत पहुंचाना चाहती है, बल्कि पसमांदा मुसलमानों से लेकर ईसाई समुदाय तक इससे जुड़ी सही जानकारियां ले जाना चाहती है।
दरअसल, हो रहे हैं और कहीं न कहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहता है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तो यहां तक आरोप लगा चुके हैं कि बीजेपी यहीं तक नहीं रुकने वाली, वह ईसाइयों से जुड़े स्थानों को भी टारगेट करना चाहती है।
यह सबकुछ बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर हो रहा है। इन सभी राज्यों में मुस्लिम मतदाताओं की जनसंख्या बहुत ज्यादा मायने रखते है। वहीं केरल और नॉर्थ ईस्ट में ईसाई वोटरों की भी खास अहमियत है। यही वजह है कि बीजेपी अपने अल्पसंख्यक मोर्चे के माध्यम से न सिर्फ पिछड़े मुसलमानों तक नए कानून से संबधित जानकारी पहुंचाना चाहती है, बल्कि ईसाई वोटरों तक भी पुराने वक्फ कानून की जानकारी देना चाहती है कि इसमें बदलाव करना क्यों जरूरी हो गया था।
हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 अप्रैल को हरियाणा में होने वाले एक कार्यक्रम में नए वक्फ कानून पर अपना नजरिया जाहिर कर सकते हैं। इसी दिन करने वाला है। बता दें कि जब संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर बहस हो रही थी तो विदेश दौरे पर होने की वजह से वह उसमें शामिल नहीं हो पाए थे। क्योंकि, विपक्ष इस कानून को बीजेपी के खिलाफ बहुत बड़ा हथियार समझ बैठा है, इसलिए हो सकता है कि अपने अंदाज में पीएम मोदी इससे होने वाले सियासी फायदे के लिए बिसात बिछानी शुरू कर दें।
इसकी संभावना इस वजह से भी बढ़ गई है, क्योंकि बिहार में नीतीश कुमार के जेडीयू और चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) और जीतन राम मांझी के हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को नए कानून की वजह से चुनावों में असहजता का सामना करना पड़ सकता है।