Shani Jayanti 2025 : शनि जयंती कब है, 26 या 27 मई!
संवाददाता
24 May 2025
अपडेटेड: 10:44 AM 0thGMT+0530
When is Shani Jayanti, on 26th or 27th May!
जानें इस दिन का पूजा मुहूर्त और शनि को प्रसन्न करने के 5 अचूक उपाय !
ज्येष्ठ मास की अमावस्या 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और यह 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 बजे खत्म होगी।
उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 27 मई को मनाई जाएगी।
शनि जयंती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल शनि जयंती की डेट को लेकर लोगों में कुछ शंकाएं बनी हुई है कि यह 26 मई को है या 27 मई को, तो आइए इससे जुड़ी सभी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार है।
शनि जयंती ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाएगी। मान्यता के अनुसार, इस तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था, इसलिए पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ मास की अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है। इस साल शनि जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन शनिदेव बेहद प्रसन्न और आशीर्वाद की मुद्रा में होते हैं, इसलिए इस दिन विधि विधान से पूजा करने से शनिदेव की कृपा आपको प्राप्त होती है।
आइए जानते हैं शनि जयंती की पूजाविधि, शुभ मुहूर्त और शनि से जुड़े खास उपाय।
कब है शनि जयंती 2025:
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार 27 मई को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। इस दिन शनि महाराज की विधि विधान से पूजा की जाती है और उनको प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। शनि जयंती पर जरूरतमंद लोगों को दान पुण्य करने का खास महत्व शास्त्रों में बताया गया है। न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनिदेव की पूजा करने से आपको शनि की अशुभ दशा में राहत मिलती है और आप अपने जीवन में उन्नति करते हैं। आइए आपको बताते हैं शनि जयंती की तिथि कब से कब तक, साथ ही जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजाविधि और इस दिन से जुड़े खास उपाय।
(1)शनि जयंती की तिथि कब से कब तक
शनि जयंती इस साल 27 मई को मनाई जाएगी और इसी दिन वट सावित्री व्रत भी रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास की अमावस्या 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी और यह 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। शनि जयंती के दिन ही सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री व्रत भी करती हैं।
(2)शनि जयंती पर कौन से शुभ योग बने हैं
इस साल शनि जयंती बहुत खास है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस दिन कृतिका और रोहिणी नक्षत्र के साथ सुकर्मा योग बन रहा है। शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा करने से साढ़ेसाती और शनि की पीड़ा से छुटकारा मिलता है। मान्यता है कि इस खास योग में शनिदेव की पूजा करने से आपको बहुत ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।
(3)शनि जयंती की पूजाविधि!- शनिदेव की पूजा में कुछ खास चीजों का प्रयोग होता है। काले कपड़े पहने जाते हैं। तेल से बने पकवान बनाए जाते हैं। शनि जयंती के दिन, नहाने से पहले सरसों के तेल से शरीर की मालिश करें। फिर साफ पानी से नहा लें।
- इसके बाद एक लकड़ी की चौकी लें। उस पर काला कपड़ा बिछाएं। शनिदेव की मूर्ति, तस्वीर या सुपारी रखें। सुपारी को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। फिर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
- शनिदेव को पंचामृत और इत्र से स्नान कराएं। इसके बाद गुलाल, सिंदूर और काजल लगाएं। फिर फूल और फल चढ़ाएं। तेल में बने पकवान या इमरती का भोग लगाएं।
- पूजा के बाद शनि स्त्रोत और बीज मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
(4)शनि जयंती के खास उपाय! - 1..इस दिन काले तिल, काले चने, काले वस्त्र और सरसों का तेल दान करना अच्छा होता है। ऐसा करने से शनि देव खुश होते हैं। इससे जीवन की परेशानियां भी दूर होती हैं।
- 2..मान्यता है कि शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ में शनि देव का वास होता है। इसलिए इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से शनिदेव जल्द खुश होते हैं।
- 3..शनिदेव के बारे में ऐसा कहा जाता है कि शनि को प्रसन्न करना है तो हनुमानजी की पूजा करें। 4…शनि जयंती पर हनुमानजी की पूजा करने से शनि से जुड़े सभी दोष दूर होते हैं और आपको लाभ होता है।
- 5….शनि जयंती के दिन द्वार पर आए किसी गरीब जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ न जाने दें। ऐसा करने से शनिदेव नाराज हो जाते हैं और उनका श्राप भी आपको झेलना पड़ सकता है।