Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज इसलिए है खास, जानें पूरा महत्व
Nivedita Shrivasatava
संवाददाता
26 August 2025, 12:07 PM
26 अगस्त 2025:
खबर प्रधान डेस्क:
भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं होते, बल्कि वे जीवन को रंगों, उमंग और उत्साह से भर देते हैं। इन्हीं में से एक है- हरतालिका तीज, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन स्त्रियों और अविवाहित कन्याओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु, सुख–समृद्धि और वैवाहिक जीवन की मधुरता की कामना करती हैं, वहीं अविवाहित कन्याएँ मनचाहा वर प्राप्त करने हेतु यह व्रत करती हैं।
हरतालिका तीज का नाम दो शब्दों से मिलकर बना है – हरत और आलिका। इसका अर्थ है – सखी द्वारा पार्वती जी को हर ले
जाना और तालिका अर्थात वन। कथा के अनुसार, माता पार्वती की सखी ही उन्हें विवाह से बचाकर वन में ले गई थी, जहाँ उन्होंने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तप किया। इसी प्रसंग से यह पर्व हरतालिका तीज कहलाया।
🌿 हरतालिका तीज की पौराणिक कथा 🌿
पौराणिक मान्यता है कि हिमालय की पुत्री पार्वती जी बचपन से ही भगवान शिव को अपना पति मानकर उनकी आराधना करती थीं। लेकिन उनके पिता हिमवान ने उनका विवाह भगवान विष्णु से करने का निर्णय लिया। यह समाचार सुनकर माता पार्वती व्याकुल हो उठीं। उनकी एक सखी ने उन्हें इस परिस्थिति से बचाने के लिए वन में ले जाकर छुपा दिया।
वन में जाकर पार्वती जी ने निराहार रहकर कठोर तपस्या की। उन्होंने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर निरंतर भगवान शिव की पूजा की और रात्रि जागरण किया। उनका तप इतना गहन और अटूट था कि स्वयं शिवजी प्रसन्न होकर प्रकट हुए और उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया। यही कारण है कि यह व्रत शिव–पार्वती के दिव्य मिलन की स्मृति में आज भी मनाया जाता है।
🪔 पूजन विधि और व्रत की विशेषताएँ 🪔
हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठोर माना जाता है। अधिकांश महिलाएँ इस दिन निर्जला उपवास रखती हैं और पूरी रात जागरण करती हैं। पूजा विधि में:
- सबसे पहले महिलाएँ सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं।
- दिन भर निर्जला व्रत रखकर शाम को भगवान शिव–पार्वती की मिट्टी से बनी प्रतिमा या चित्र की स्थापना करती हैं।
- हल्दी, चंदन, अक्षत, फूल, बेलपत्र, धूप–दीप और फल अर्पित करती हैं।
- सुहाग की सामग्री जैसे बिंदी, सिंदूर, चूड़ी, वस्त्र आदि माता पार्वती को अर्पित की जाती है।
- कथा श्रवण के बाद महिलाएँ रात्रि भर भजन–कीर्तन और जागरण करती हैं।
💫 परंपरा और उत्सव का रंग 💫
हरतालिका तीज केवल उपवास और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह स्त्रियों के मिलन, उत्साह और परंपरा का उत्सव भी है। इस दिन महिलाएँ विशेष श्रृंगार करती हैं, नए वस्त्र धारण करती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं और झूले झूलती हैं। तीज के लोकगीत और भक्ति गीत इस पर्व को और भी हर्षोल्लास से भर देते हैं। गाँव–शहर हर जगह इसका उल्लास देखने को मिलता है।
🌺 हरतालिका तीज का भावनात्मक संदेश 🌺
हरतालिका तीज हमें यह सिखाती है कि धैर्य, समर्पण और विश्वास से ही जीवन में सफलता और सुख प्राप्त किया जा सकता है। माता पार्वती का अटूट विश्वास ही उन्हें शिवजी जैसा वर दिला सका। यह व्रत स्त्रियों के प्रेम, त्याग और निष्ठा का प्रतीक है।
आज के समय में भी यह पर्व हमें रिश्तों की पवित्रता और विश्वास की महत्ता का संदेश देता है। यह केवल पति–पत्नी के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परिवार और समाज को एक सूत्र में जोड़ने का माध्यम भी है।
✨ निष्कर्ष ✨
हरतालिका तीज भारतीय संस्कृति की उस गहराई को दर्शाती है जहाँ आस्था और परंपरा जीवन को नई दिशा देती है। यह पर्व भक्ति, प्रेम और निष्ठा का सुंदर संगम है। इसमें छिपा संदेश है कि जब मन दृढ़ और विश्वास अटूट हो, तो ईश्वर स्वयं मार्ग प्रशस्त करते हैं।
🌸 इस हरतालिका तीज पर हम सब माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का स्वागत करें। 🌸