अक्षय तृतीया पर श्योपुर में कन्यादान योजना पर हुई सरकारी चूक

khabar pradhan

संवाददाता

1 May 2025

अपडेटेड: 3:49 PM 0stGMT+0530

अक्षय तृतीया पर श्योपुर में कन्यादान योजना पर हुई सरकारी चूक

अक्षय तृतीया के अबूझ मुहूर्त पर मध्य प्रदेश के श्योपुर में भी मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत कन्याओं के विवाह कराए गए ।लेकिन जिला मुख्यालय पर आयोजित 231 जोड़ों के विवाह सम्मेलन में सरकारी चूक नजर आई । आरोप है कि विवाह वेदी पर पुरोहित का काम 10 मुस्लिम शिक्षकों ने किया ।ऐसे में सम्मेलन से कुछ जोड़े बिना फेरे लिए ही लौट गए । इन जोड़ों ने बाद में दूसरे सम्मेलनों में जाकर सनातन संस्कृति के अनुसार विवाह किया ।जिम्मेदार अफसर इसे चूक मानने से इनकार कर रहे हैं और उनका कहना हैं कि सम्मेलन में गायत्री परिवार के परिजनों द्वारा विवाह संस्कार कराए गए हैं, मुस्लिम शिक्षकों की तो व्यवस्था के लिए ड्यूटी लगाई गई थी ।मुख्यमंत्री कन्यादान योजना (Chief Minister Kanyadan Scheme) के तहत मध्य प्रदेश के श्योपुर में आयोजित विवाह सम्मेलन में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया। श्योपुर शहर के हैवी मशीनरी टीनशेड परिसर में 231 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, लेकिन कुछ जोड़े बिना फेरे लिए ही लौट गए। यह सम्मेलन अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में एक सरकारी चूक के कारण विवाद खड़ा हो गया।आरोप है कि इस कार्यक्रम में 10 मुस्लिम शिक्षकों (10 Muslim Teachers) को पुरोहित का काम करने की ड्यूटी दी गई थी। विवाह वेदी पर इन शिक्षकों के द्वारा संस्कार संपन्न किए जाने का आरोप कुछ जोड़ों ने लगाया है। आरोप है कि मुस्लिम शिक्षकों के द्वारा शादी कराए जाने पर कुछ जोड़े बिना फेरे के लौट गए और बाद में उन्होंने दूसरे सम्मेलनों में जाकर सनातन संस्कृति के अनुसार विवाह किया।सम्मेलन में कुछ जोड़े रहे बिना फेरे के:इस सम्मेलन में कुछ ऐसे जोड़े भी थे, जिनकी पहले ही शादी हो चुकी थी, लेकिन कन्यादान योजना का लाभ लेने के लिए उन्होंने सम्मेलन में दोबारा शादी की। इन जोड़ों ने भी आरोप लगाया कि पुरोहित का काम मुस्लिम शिक्षकों ने किया, जिससे वे असहज महसूस कर लौट गए।जिले के खिरनी निवासी लोकेश ने भी इस सम्मेलन में दूल्हा बनकर भाग लिया था। उन्होंने अपनी शादी की सभी रस्में पूरी की, लेकिन बाद में पता चला कि पुरोहित का काम मुस्लिम शिक्षक कर रहे थे। इसके बाद लोकेश ने सम्मेलन छोड़ दिया और कहा कि वे अब खिरनी में होने वाले विवाह सम्मेलन में भाग लेंगे।जनपद पंचायत श्योपुर के सीईओ श्याम सुंदरभटनागर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मुस्लिम शिक्षकों ने विवाह संस्कार में कोई मंत्र नहीं पढ़े। वे केवल आयोजन के लिए उपस्थित थे। विवाह संस्कार गायत्री परिवार (Gayatri Family) के सदस्यों द्वारा संपन्न किए गए थे। भटनागर ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कोई जोड़ा बिना फेरे के वापस लौटा हो। उनकी जानकारी में तो लगभग सभी जोड़ों की शादी हो चुकी है।विवाह समारोह में शामिल मुस्लिम शिक्षक:1. इस्माइल खान (प्राथमिक स्कूल अडूसा)2. बुंदू खान (मिडिल स्कूल श्रीहजारेश्वर)3. शमशाद खान (प्राथमिक स्कूल कन्या उर्दू गांधी)4. मुमताज अली (प्राथमिक स्कूल नारायणपुरा)5. सफदर हुसैन नकवी (सीएम राइज स्कूल श्योपुर)6. गजला नोमानी (माध्यमिक स्कूल पंडोला)7. इमाम अली (प्राथमिक स्कूल दौलतपुर)8. मुनव्वर जहां (प्राथमिक स्कूल उर्दू गांधी)9. नुजहत परवीन (मिडिल स्कूल क्रमांक 3)10. बुंदू खान (प्राथमिक स्कूल ढोंटी) सवाल उठाने वाले जोड़े:——————————कुछ जोड़ों का कहना है कि उन्होंने विवाह संस्कार के दौरान गायत्री परिवार द्वारा बताई गई विधि को नहीं किया, और वे इस कारण शादी के बाद दूसरे सम्मेलन में गए, जहां सनातन संस्कृति के अनुसार विवाह की प्रक्रिया पूरी की गई। ये जोड़े इस घटना को एक बड़ी चूक मानते हैं, जिससे उनका विवाह अधूरा महसूस हुआ।

टिप्पणियां (0)