11 मई 2026

नई दिल्ली:
भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। डीआरडीओ (DRDO) ने हाल ही में एक खास तरह के इंजन का सफल परीक्षण किया है, जिसे ‘स्क्रैमजेट कंबस्टर’ कहा जाता है। यह इंजन भविष्य में भारत की उन मिसाइलों को ताकत देगा जो आवाज की रफ्तार से भी पांच गुना ज्यादा तेजी से उड़ सकेंगी। इन्हें हाइपरसोनिक मिसाइल कहा जाता है।
इंजन परीक्षण की खास बातें
हैदराबाद की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) में यह टेस्ट किया गया। इस दौरान इंजन ने जो प्रदर्शन किया, वह वाकई हैरान करने वाला है:
1. लंबी अवधि का टेस्ट: यह इंजन लगातार 1,200 सेकंड यानी पूरे 20 मिनट तक सफलतापूर्वक चलता रहा। इससे पहले जनवरी में इसका टेस्ट सिर्फ 700 सेकंड के लिए किया गया था।
2. बेमिसाल रफ्तार: इस तकनीक की मदद से मिसाइल 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘मैक 5 प्लस’ की स्पीड कहा जाता है।
3. उन्नत तकनीक: इस खास इंजन को ‘एक्टिवली कूल्ड फुलस्केल स्क्रैमजेट कंबस्टर’ नाम दिया गया है, जो मिसाइल को बहुत तेज गति पर भी स्थिर रखता है।
दुश्मन के लिए काल बनेगी यह तकनीक
हाइपरसोनिक मिसाइलों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि ये न केवल बहुत तेज चलती हैं, बल्कि हवा में उड़ते समय अपनी दिशा भी बदल सकती हैं। आम मिसाइलों का रास्ता रडार पकड़ लेते हैं, लेकिन इतनी तेज रफ्तार और रास्ता बदलने की क्षमता के कारण इन्हें ट्रैक करना या किसी एयर डिफेंस सिस्टम से गिराना नामुमकिन के बराबर होता है।
भारत बना दुनिया का दिग्गज
इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत अब उन गिने-चुने देशों की कतार में शामिल हो गया है जिनके पास यह अजेय तकनीक है। अभी तक केवल अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों के पास ही ऐसी क्षमता थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कामयाबी भारत को खुद की ‘स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ बनाने के और करीब ले आई है। इससे न केवल भारत की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पूरी दुनिया में भारत की तकनीक का लोहा माना जाएगा।