असम केरल चुनाव में प्रियंका गांधी फ्रंट पर: कांग्रेस की सबसे बड़ी सियासी चाल:

khabar pradhan

संवाददाता

9 January 2026

अपडेटेड: 12:16 PM 0thGMT+0530

असम केरल चुनाव में प्रियंका गांधी फ्रंट पर: कांग्रेस की सबसे बड़ी सियासी चाल:





दिल्ली/विधानसभा चुनाव से पहले केरल और तमिलनाडु तक सियासी हलचल तेज:
कांग्रेस अब पूरी तैयारी में:

विधानसभा चुनाव से पहले केरल और तमिलनाडु तक सियासी हलचल तेज हो गई है । और कांग्रेस ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं और पार्टी अब पूरी तरह इलेक्शन मोड में नजर आ रही है।

असम में स्थितियां:
सबसे पहले बात असम की कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक चाल चल दी है।  पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी को असम के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का चेयरपर्सन बनाया गया है। यानी टिकट वितरण से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक, अब प्रियंका गांधी की सीधी भूमिका रहने वाली है।

प्रियंका गांधी की मजबूती हेतु मिशन:

यह साफ संकेत है कि कांग्रेस असम को हल्के में लेने के मूड में नहीं है… लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। प्रियंका गांधी के ‘मिशन असम’ को और मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने दो बड़े सियासी दिग्गजों को मैदान में उतार दिया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को असम का वरिष्ठ पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है।  इनके साथ झारखंड के पूर्व विधायक बंधु तिर्की को भी अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। यानि एक तरफ प्रियंका गांधी रणनीति बना रही हैं, तो दूसरी तरफ भूपेश बघेल और डीके शिवकुमार जैसे नेता संगठन और जमीनी हालात को मजबूत करने में जुटेंगे। इसके अलावा कांग्रेस के अनुभवी नेता मधुसूदन मिस्त्री को भी असम में बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।  अब सवाल ये है कि कांग्रेस इतना फोकस असम पर क्यों कर रही है? दरअसल, कांग्रेस को असम से इस बार काफी उम्मीदें हैं। पार्टी ने वहां पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई को आगे किया है।  गौरव गोगोई फिलहाल लोकसभा सांसद हैं और उन्हें कांग्रेस का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है ।वहीं दूसरी ओर बीजेपी मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के चेहरे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है ।यानी असम में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है ।

अब रुख करते हैं केरल का :
केरल कांग्रेस का दूसरा बड़ा फोकस स्टेट है। हाल ही में हुए निकाय चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है और पार्टी को भरोसा है कि वह सत्ता में वापसी कर सकती है… केरल के लिए कांग्रेस ने सचिन पायलट को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है… उनके साथ के. जे. जॉर्ज, इमरान प्रतापगढ़ी और कन्हैया कुमार को भी चुनावी मोर्चे पर उतारा गया है। ये सभी नेता अलग-अलग वर्गों और वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं ।

तमिलनाडु में गठबंधन:

तमिलनाडु की बात करें तो यहां कांग्रेस सत्तारूढ़ डीएमके के साथ गठबंधन में है‌  पार्टी ने यहां भी भरोसेमंद और अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी दी है।  मुकुल वासनिक, उत्तम कुमार रेड्डी और काजी मोहम्मद निजामुद्दीन को तमिलनाडु का वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया है। साफ है कि कांग्रेस गठबंधन धर्म निभाते हुए तमिलनाडु में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहती है। हालांकि पश्चिम बंगाल में तस्वीर थोड़ी अलग नजर आती है ।असम, केरल और तमिलनाडु की तुलना में कांग्रेस ने बंगाल में अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल नेताओं को जिम्मेदारी दी है… यहां सुदीप रॉय बर्मन, शकील अहमद खान और प्रकाश जोशी को वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाया गया है। 

कांग्रेस ने साफ संदेश दे दिया है कि असम और केरल इस बार पार्टी की प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं… प्रियंका गांधी की सक्रियता, भूपेश बघेल और डीके शिवकुमार जैसे दिग्गजों की तैनाती और अनुभवी नेताओं की फौज ये सब कांग्रेस के ऑल-आउट अटैक की तरफ इशारा करते हैं।

अब देखना ये होगा कि कांग्रेस की ये रणनीति जमीन पर कितना असर दिखाती है और क्या पार्टी वाकई असम और केरल में सत्ता के करीब पहुंच पाती है या नहीं।

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