4 जून 2026 :खबर प्रधान डेस्क:
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) देश में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार करने जा रहा है. आरबीआई अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का इस्तेमाल करके एक एकीकृत एआई प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य हर तरह के ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान को पूरी तरह सुरक्षित करना, डेटा प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और बैंकों के कामकाज को आसान करना है. रिजर्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भविष्य की इन बेहतरीन योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है.
धोखाधड़ी पर कसेगी नकेल और मजबूत होगा ढांचा:
आरबीआई एक संस्थागत स्तर का एआई प्लेटफॉर्म बना रहा है जिसमें बड़े और छोटे दोनों प्रकार के भाषा मॉडलों का उपयोग किया जाएगा. यह प्लेटफॉर्म केंद्रीय बैंकिंग कार्यों और सुरक्षित डेटा प्रबंधन की जरूरतों को पूरा करेगा. संदिग्ध और फ्रॉड लेनदेन की समय पर पहचान करने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ एक ‘डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ तैयार किया गया है. ‘पेमेंट विजन 2028’ के तहत इससे पूरे डिजिटल भुगतान इकोसिस्टम को एक नई रफ्तार मिलेगी. इसके अलावा, जोखिमों से निपटने के लिए एक साझा उत्तरदायित्व ढांचा भी विकसित हो रहा है, जिसमें ग्राहक और लाभार्थी (पैसे पाने वाले) दोनों का बैंक जिम्मेदार होगा.
सुरक्षित डोमेन लागू करने वाला पहला देश बना भारत:
डिजिटल वित्तीय सेवाओं में लोगों का विश्वास बढ़ाने के लिए बैंक डॉट इन (.bank.in) विशेष डोमेन शुरू करने की अनूठी पहल की गई है. इसके साथ ही भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने अपनी पूरी बैंकिंग प्रणाली के लिए इस तरह के सुरक्षित डोमेन को अनिवार्य कर दिया है. फिलहाल एक पूर्णतः स्वदेशी भुगतान प्रणाली पर तेजी से काम चल रहा है, जिसमें वर्तमान की सभी केंद्रीकृत प्रणालियों की सुविधाएं मौजूद रहेंगी.
आने वाले समय में देखने को मिलेगी यह नई व्यवस्था:
आरबीआई देश की बैंकिंग व्यवस्था में कई बड़े बदलाव और नवाचार करने की तैयारी में है:
इलेक्ट्रॉनिक चेक को शुरू करने का विशेष प्रयास किया जाएगा.
गैर-बैंक भुगतान प्रणाली का संचालन करने वालों के लिए साइबर रिस्क इंडिकेटर्स ढांचा लागू होगा.
डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित अनुसंधान एवं प्रशिक्षण क्षमता विकसित की जाएगी.
कार्ड भुगतानों में नए नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाएगा और डिजिटल भुगतानों में बड़ी भूमिका निभाने वाली बैंकिंग संस्थाओं को नियामकीय दायरे में लाया जाएगा.
साइबर सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए एडवांस्ड थ्रेट हंटिंग प्लेटफॉर्म लगाए जाएंगे.
अलग-अलग वेब पोर्टलों को एक ही मंच पर लाने के लिए एकीकृत वर्क पोर्टल विकसित किया जाएगा.
विदेशों में भी लगातार बढ़ रहा है यूपीआई का जलवा:
भारत की यूपीआई आधारित क्यूआर कोड भुगतान सुविधा का डंका अब वैश्विक स्तर पर भी बज रहा है. वर्तमान में यह सुविधा भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई जैसे देशों में सफलतापूर्वक उपलब्ध है. इस विस्तार को आगे बढ़ाते हुए अब नामीबिया और पेरू में भी यूपीआई आधारित सिस्टम विकसित किया जा रहा है. इसके साथ ही मॉरीशस और यूएई में भारत के ‘रुपये कार्ड’ (RuPay Card) सिस्टम का क्रियान्वयन भी पूरी तरह से पूरा हो चुका है.


Leave a Reply