आरोपियों की सजा घटाना गलत संदेश, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
संवाददाता
18 February 2026
अपडेटेड: 3:16 PM 0thGMT+0530
गंभीर अपराधों में नरमी को लेकर सर्वोच्च अदालत ने न्याय व्यवस्था की भूमिका पर जोर दिया है।
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गंभीर अपराधों के मामलों में पीड़ित को अधिक मुआवजा देने के नाम पर सजा कम करना खतरनाक प्रवृत्ति है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है कि आरोपी पैसे देकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं।
सजा और मुआवजा दोनों का संतुलन जरूरी, अदालत ने जताई चिंता।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि अदालतों को यह संदेश नहीं देना चाहिए कि अपराध के परिणाम से आरोपी धन के बल पर बच सकते हैं। सजा तय करते समय यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि वह न तो अत्यधिक कठोर हो और न इतनी कम कि उसका प्रभाव समाप्त हो जाए।
हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल।
शीर्ष अदालत ने विभिन्न अदालतों में बढ़ती इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि कई मामलों में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को मनमाने तरीके से कम कर दिया जाता है। अदालत ने कहा कि यह न्यायिक संतुलन और कानून के उद्देश्य के खिलाफ है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक मामले में की गई टिप्पणी।
यह टिप्पणी उस मामले में की गई, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एक पीठ ने एक ग्रामीण को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल करने के आरोप में दो लोगों को दी गई तीन साल की सजा को पहले से बिताई गई अवधि तक सीमित कर दिया था। साथ ही पीड़ित को दिए जाने वाले मुआवजे को पांच हजार से बढ़ाकर पचास हजार रुपये कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय का निर्णय कानून के अनुरूप नहीं, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय ने कानून का सही तरीके से पालन नहीं किया और अपने निष्कर्ष तक पहुंचने में स्थापित न्यायिक सिद्धांतों की अनदेखी की। अदालत ने इस फैसले को गलत बताते हुए आरोपियों को चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और शेष सजा पूरी करने का आदेश दिया।
अपराध और सजा के अनुपात पर जोर, न्याय व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट।
अदालत ने कहा कि सजा तय करते समय अपराध की गंभीरता, परिस्थितियां, समाज पर प्रभाव और न्याय के सिद्धांतों पर विचार किया जाना चाहिए। आपराधिक न्याय प्रणाली का उद्देश्य अपराध के खिलाफ सख्ती के साथ-साथ आरोपी के सुधार का अवसर देना भी है, लेकिन यह संतुलन बनाए रखना जरूरी है।