इंदौर के 6 साल के अयान्वित का अबू धाबी में अंगदान

khabar pradhan

संवाददाता

16 April 2025

अपडेटेड: 11:47 AM 0thGMT+0530

UAE’s गॉट टैलेंट में हुआ था सिलेक्ट, परफॉर्मेंस से पहले स्विमिंग पूल में डूबने से मौत

इंदौर के 6 साल के अयान्वित श्रीवास्तव की अबू धाबी में एक हादसे में मौत ने सभी को झकझोर दिया। अयान्वित को UAE’s गॉट टैलेंट शो के लिए चुना गया था, लेकिन परफॉर्मेंस से पहले वह स्विमिंग पूल में डूब गया। इसके बाद उसके माता-पिता ने एक प्रेरणादायक फैसला लिया और उसके अंगों को दान करने का निर्णय किया। अयान्वित के अंगों ने अबू धाबी में चार लोगों को नई जिंदगी दी।
क्या हुआ हादसा?


अयान्वित अपनी मां और बहन के साथ अबू धाबी में UAE’s गॉट टैलेंट शो में हिस्सा लेने गया था। 10 अप्रैल को वह होटल के स्विमिंग पूल में खेल रहा था, तभी वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अयान्वित के पिता, जो इंदौर में थे, तुरंत अबू धाबी पहुंचे।
माता-पिता का नेक फैसला
अयान्वित के माता-पिता, रजत और शीतल श्रीवास्तव, ने अपने बेटे की मौत के बाद भी दूसरों की जिंदगी बचाने का फैसला लिया। उन्होंने अयान्वित के लीवर, किडनी, हृदय और कॉर्निया दान करने की सहमति दी। अबू धाबी के क्ल्लीवलैंड क्लिनिक में अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई। अयान्वित के अंगों से चार लोगों को नया जीवन मिला, जिनमें दो बच्चे और दो वयस्क शामिल हैं।
अयान्वित की प्रतिभा
अयान्वित इंदौर के एक प्रतिभाशाली बच्चे थे। उन्होंने छोटी उम्र में ही डांस और म्यूजिक में अपनी पहचान बनाई थी। UAE’s गॉट टैलेंट के लिए उनका सिलेक्शन उनके हुनर का सबूत था। उनके परफॉर्मेंस की रिकॉर्डिंग देखकर जजेस ने उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया था। परिवार के अनुसार, अयान्वित का सपना बड़ा कलाकार बनना था।
परिवार और समुदाय का दुख
अयान्वित की मौत से इंदौर का श्रीवास्तव परिवार और उनका समुदाय सदमे में है। रजत श्रीवास्तव ने कहा, “हमारा बेटा अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसके अंगों ने दूसरों को जिंदगी दी। यह हमें गर्व और सुकून देता है।” स्थानीय लोगों और अयान्वित के स्कूल ने भी उनके परिवार के इस फैसले की सराहना की है।
अंगदान की प्रेरणा
अयान्वित का मामला अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाला बन गया है। अबू धाबी में भारतीय दूतावास ने परिवार के इस फैसले की तारीफ की और इसे एक मिसाल बताया। भारत में भी अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे नेक कदम लाखों लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं।
निष्कर्ष
अयान्वित की छोटी सी जिंदगी भले ही खत्म हो गई, लेकिन उसके अंगों ने चार लोगों को नया जीवन देकर उसे अमर कर दिया। उसका परिवार और उसकी कहानी अब दुनिया के लिए एक प्रेरणा बन गई है। यह घटना न केवल अंगदान की अहमियत को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि दुख की घड़ी में भी इंसानियत कैसे दूसरों के लिए उम्मीद बन सकती है।

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