इंदौर में दूषित पानी मामले में मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान:कई अफसर निलंबित

khabar pradhan

संवाददाता

31 December 2025

अपडेटेड: 4:30 PM 0thGMT+0530

इंदौर में दूषित पानी मामले में मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान:कई अफसर निलंबित

मध्य प्रदेश के सबसे स्वच्छतम शहर इंदौर में लोगों को दूषित पानी मिल रहा है। शहर के बीचो-बीच स्थित भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से और उल्टी दस्त के बाद 3 दिन में आठ लोगों की मौत की खबर है । इसमें से 1100 से ज्यादा लोग बीमार हैं और 111 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। जिन आठ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, उनमें से छह मृतकों की उम्र 50 वर्ष से अधिक बताई गई है।दूषित पानी पीने से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई लोगों की मौत होने से हड़कंप मच गया है।स्वास्थ्य विभाग ने मोहल्ले की गलियों में कैंप लगाए हैं । यहां से करीब 1100 से ज्यादा मरीज ने उल्टी दस्त, पेट दर्द की दवाइयां ली । लोगों का कहना है कि निगम की सप्लाई से 10 से 12 दिन गंदा पानी आ रहा था, इससे यह स्थिति बनी । जिससे सुबह से उल्टी दस्त से कई लोगों की मौत हो गई।

क्या है पूरा मामला:
जांच के बाद पता चला कि भागीरथपुरा क्षेत्र की मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज पाया गया है । यह लीकेज भागीरथपुरा चौकी से लगे हुए एक शौचालय के नीचे स्थित मेन लाइन में हुआ था। इसी लीकेज के कारण दूषित पानी पाइप लाइन में मिला और इस क्षेत्र में गंदे पानी की समस्या उत्पन्न हुई।

नगर निगम कमिश्नर का बयान:
नगर निगम कमिश्नर ने बताया है कि भागीरथपुरा में चौकी से लगे हुए शौचालय के नीचे मेन थे लाइन में लीकेज हुआ । और मेन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन की जांच के दौरान टंकी के पास लीकेज मिला । इसी के ऊपर शौचालय बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि इस लीकेज से पानी दूषित हुआ और घरों तक पहुंचा।

नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि नगर निगम हर मोर्चे पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है और लीकेज वाली जगह पर तत्काल मरम्मत का कार्य शुरू किया गया है। सुधार कार्य पूरा होने के बाद सबसे पहले फ्लशिंग, क्लोरीनेशन और पानी के सैंपल की टेस्टिंग की जाएगी । लैब रिपोर्ट पूरी तरह संतोषजनक आने के बाद ही इस क्षेत्र में जल की आपूर्ति बहाल की जाएगी। आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा और ऐसी लापरवाही दोबारा ना हो ,इसके लिए भविष्य में ध्यान रखा जाएगा।

लोग कर रहे थे 12 दिन से शिकायत:
खराब पानी आने की शिकायत लोग 10 से 12 दिनों से कर रहे थे। कई लोग उल्टी दस्त के शिकार भी होते रहे। गणेश नगर के सिंकु महावर ने बताया कि 5 दिन से गलियों में एक या दो लोग उल्टी दस्त से ग्रस्त थे।
जब यह संख्या बढ़ने लगी और लोगों की हालत बिगड़ने लगी, तब स्वास्थ्य विभाग ने ताबड़तोड़ सैंपल लेना शुरू किया।

वे आठ लोग जिनकी मौत हुई:
1..ताराबाई उम्र 70 वर्ष यह भाऊ गली में ताराबाई के बेटे अन्नु कोरी ने बताया कि 29 दिसंबर को उनकी मां ताराबाई को उल्टी दस्त की शिकायत हुई । इससे उनकी हालत खराब हुई, दवाईयां दी ,किंतु 30 दिसंबर को सुबह उनकी मौत हो गई।
2.. नंदलाल पाल उम्र 75 वर्ष,उनकी बहन कुसुम लता ने बताया कि भाई रेलवे से रिटायर्ड है। 3 दिन पहले उलटी दस्त हुए । वर्मा अस्पताल में भर्ती किया किंतु 30 दिसंबर को सुबह मौत हो गई

  1. मंजुला दिगंबर वाडे, उम्र 60 वर्ष, गणेश मंदिर की योगिता के घर 10 दिन से गंदा पानी आ रहा था । वह बोली मां को 29 दिसंबर को अरविंदो में भर्ती किया ,किंतु 30 तारीख को उनकी मौत हो गई।
    4.. सीमा प्रजापत उम्र 50 वर्ष:उनके बेटे अरुण ने बताया कि 29 दिसंबर की रात उल्टी दस्त से उनकी मां की तबीयत खराब हुई। 30 तारीख को अस्पताल ले गए किंतु भर्ती करने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

5.. उर्मिला यादव 69 वर्ष:उनके घर से ममता ने बताया कि 5 दिन पहले उल्टी दस्त से मां की तबीयत खराब हुई। क्लॉथ मार्केट अस्पताल में भर्ती किया । 28 दिसंबर को उनकी मौत हो गई। उनके घर में भी गंदा पानी आ रहा था।
6.. गोमती रावत उम्र 50 वर्ष: भाऊ गली में रहने वाले राहुल ने बताया कि उनकी मां को तीन दिन पहले उल्टी दस्त हुए थे। बीमारी अधिक नहीं थी किंतु अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ी और 28 दिसंबर को मौत हो गई।
7.. हम कोरी उम्र 32 वर्ष उनके परिजनों ने 29 दिसंबर को अरविंदो अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल के जनरल मैनेजर राजीव सिंह ने बताया कि अस्पताल ले जाते समय ही उनकी डेथ हो चुकी थी । उन्हें भी उल्टी दस्त की शिकायत थी।
8.. संतोष बिगोलिया उम्र 27 वर्ष: भागीरथपुरा की संतोष को 8 दिन पहले ही उल्टी दस्त शुरू हुई थी । और 25 दिसंबर को ही उसकी मौत हो गई।

सरकार की लापरवाही:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि यह हादसा नहीं बल्कि सरकार की घोर लापरवाही है । इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए दोषी और जिम्मेदार अफसर पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान:
दूषित पानी मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कड़ा रूख
एक्स पर इस घटना पर शोक जताया है । और कहा है कि मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए सहायता दी जाएगी। मरीजों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। स्थिति पर नजर रखने और कार्रवाई के लिए अफसरों को कड़ा निर्देश दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर जोन क्रमांक-4 के जोनल अधिकारी और सहायक यंत्री को निलंबित कर दिया गया है, जबकि प्रभारी उपयंत्री को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया है… इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने जानकारी दी कि जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को निलंबित किया गया है… वहीं पीएचई विभाग के उपयंत्री शुभम श्रीवास्तव को सेवा से हटाया गया है… इस पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है… यह समिति आईएएस अधिकारी नवजीवन पंवार के निर्देशन में कार्य करेगी… समिति में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को शामिल किया गया है।

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