इतने पाकिस्तानी भारत में कैसे पहुंचे ?
संवाददाता
29 April 2025
अपडेटेड: 9:49 AM 0thGMT+0530
इतने पाकिस्तानी भारत में कैसे पहुंचे?
जानिए किन राज्यों से कितने डिपोर्ट किए गए
पिछले कुछ समय से भारत में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की मौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। केंद्र सरकार के निर्देश पर विभिन्न राज्यों में ऐसे नागरिकों की पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। यह सवाल उठना लाजमी है कि इतनी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक भारत में कैसे पहुंचे और अब तक कितनों को डिपोर्ट किया गया है। आइए, इस मुद्दे पर विस्तार से नजर डालते हैं।
पाकिस्तानी नागरिक भारत कैसे पहुंचे?
पाकिस्तानी नागरिकों का भारत में प्रवेश कई तरीकों से हुआ है, जिनमें शामिल हैं:
वैध वीजा के माध्यम से: कई पाकिस्तानी नागरिक पर्यटक, धार्मिक, चिकित्सा या पारिवारिक वीजा पर भारत आए। इनमें से कुछ ने वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी देश छोड़ने से इनकार कर दिया और अवैध रूप से रहने लगे। उदाहरण के लिए, अल्पकालिक वीजा धारक, जिन्हें 27 अप्रैल 2025 तक भारत छोड़ने का आदेश दिया गया था, इस श्रेणी में आते हैं।
अवैध सीमा पार: भारत-पाकिस्तान सीमा, विशेष रूप से पंजाब और राजस्थान के क्षेत्रों में, कुछ स्थानों पर छिद्रपूर्ण रही है। घुसपैठिए इसका फायदा उठाकर अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, कुछ मामले मानव तस्करी और नकली दस्तावेजों से भी जुड़े हैं।
जाली दस्तावेज और पहचान: कई पाकिस्तानी नागरिकों ने जाली आधार कार्ड, पासपोर्ट या अन्य भारतीय दस्तावेजों का उपयोग करके अपनी पहचान छिपाई। ये दस्तावेज उन्हें स्थानीय स्तर पर कुछ भ्रष्ट तत्वों या तस्करों के माध्यम से प्राप्त हुए।
लंबे समय तक रहने की रणनीति: कुछ पाकिस्तानी नागरिकों ने भारत में शादी करके या स्थानीय समुदायों में घुलमिलकर अपनी मौजूदगी को वैध करने की कोशिश की। हालांकि, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लागू ‘धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम’ ने ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया है।
डिपोर्टेशन की प्रक्रिया और आंकड़े
केंद्र सरकार ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से पाकिस्तानी नागरिकों, को डिपोर्ट करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। 24 अप्रैल 2025 से शुरू हुए अभियान के तहत अटारी-वाघा सीमा के रास्ते डिपोर्टेशन प्रक्रिया चल रही है। निम्नलिखित राज्यों से अब तक की स्थिति इस प्रकार है:
दिल्ली: दिल्ली में 26-29 अप्रैल 2025 तक अल्पकालिक वीजा धारकों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया था। इस दौरान 537 पाकिस्तानी नागरिक अटारी-वाघा सीमा के रास्ते डिपोर्ट किए गए। खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे कई अन्य नागरिकों की पहचान की है, जिनके दस्तावेजों की जांच चल रही है।
महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में लगभग 5,000 पाकिस्तानी नागरिकों में से 250 अल्पकालिक वीजा धारक थे। केंद्र सरकार के निर्देश पर महाराष्ट्र सरकार ने इन सभी को 27 अप्रैल 2025 तक देश छोड़ने की नोटिस जारी की थी। जो लोग इस समयसीमा में नहीं गए, उनकी तलाश और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
राजस्थान: राजस्थान में सीमा से सटे होने के कारण अवैध घुसपैठ के मामले अधिक रहे हैं। यहां से लगभग 300 पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है। स्थानीय पुलिस और BSF ने संयुक्त अभियान चलाकर कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
गुजरात: गुजरात में अहमदाबाद और अन्य शहरों में अवैध बस्तियों में रह रहे पाकिस्तानी मूल के लोगों की पहचान की गई। यहां से लगभग 200 नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है, और बाकियों की जांच चल रही है।
उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य: उत्तर प्रदेश, पंजाब और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी छोटे पैमाने पर डिपोर्टेशन हुआ है। इन राज्यों से कुल मिलाकर 150-200 नागरिकों को वापस भेजा गया है। उत्तर प्रदेश में खास तौर पर ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामलों में कुछ पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान हुई थी।
कुल मिलाकर, अब तक लगभग 1,500-2,000 पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट किया जा चुका है, और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। सटीक आंकड़े सरकारी सूत्रों से समय-समय पर अपडेट किए जा रहे हैं।
डिपोर्टेशन में चुनौतियां
पहचान और दस्तावेज: कई अवैध नागरिकों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं, जिससे उनकी नागरिकता सत्यापित करना मुश्किल हो रहा है।
पाकिस्तान का रवैया: पाकिस्तान ने कुछ मामलों में अपने नागरिकों को स्वीकार करने में आनाकानी की है, जिससे प्रक्रिया धीमी हो रही है।
मानवाधिकार संगठन: कुछ संगठनों ने डिपोर्टेशन को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताकर इसका विरोध किया है, जिससे कानूनी जटिलताएं बढ़ी हैं।
स्थानीय समुदायों का विरोध: कुछ क्षेत्रों में स्थानीय लोग, जो इन नागरिकों के साथ सामाजिक या पारिवारिक रिश्तों में हैं, डिपोर्टेशन का विरोध कर रहे हैं।
सरकार की रणनीति
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान और डिपोर्टेशन के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा:
खुफिया निगरानी: खुफिया एजेंसियां अवैध घुसपैठ और जाली दस्तावेजों के नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।
सीमा सुरक्षा: भारत-पाकिस्तान सीमा पर BSF की तैनाती और निगरानी बढ़ाई गई है।
कानूनी कार्रवाई: अवैध रूप से रह रहे नागरिकों के खिलाफ विदेशी अधिनियम 1946 और अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
सोशल मीडिया और जनता की प्रतिक्रिया
X पर इस मुद्दे को लेकर तीव्र बहस छिड़ी हुई है। कुछ यूजर्स ने सरकार के इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, जबकि अन्य ने इसे मानवीय आधार पर गलत ठहराया। एक पोस्ट में कहा गया, “दिल्ली से 537 पाकिस्तानी नागरिक डिपोर्ट किए गए, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा कदम है।” दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई सभी समुदायों के खिलाफ निष्पक्ष है।