उज्जैन के महाकाल मंदिर में VIP दर्शन रहेंगे जारी:सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज:
संवाददाता
27 January 2026
अपडेटेड: 11:24 PM 0thGMT+0530
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का फैसला रखा बरकरार:
सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि मंदिर में कौन प्रवेश करेगा, यह तय करना अदालत का काम नहीं है.।
याचिकाकर्ता ने गर्भगृह में वीआईपी और आम जनता के लिए अलग नियमों को अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया था। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी और इसे लेकर जो याचिका दायर की गई थी, उसे सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है इस तरह की याचिका को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने ये फैसला सुनाया है… जस्टिस महादेवन और जस्टिस जॉयमाला बागची भी इस बेंच का हिस्सा थे।
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी याचिका दायर करते हुए वीआईपी दर्शन पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में वीआईपी लोगों को आसानी से एंट्री मिल जाती है। वो महाकाल शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन आम जनता को इसका अधिकार नहीं है। उन्हें दूर से ही दर्शन करके वापस लौटना पड़ता है, जो पूरी तरह से गलत है। भगवान के दरबार में सारे भक्त एक हैं।
सभी नागरिकों के साथ वीआईपी दर्जे के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
हर भक्त को देवता को जल चढ़ाने का समान अधिकार होना चाहिए और सभी को बराबर मंजूरी मिलना चाहिए
कोर्ट में याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कहा कि गर्भगृह में सभी के लिए नियम समान होने चाहिए। ये अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। तो आम जनता को भी ये अधिकार मिलना चाहिए।
पवित्र शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए VIP दर्शन के खिलाफ याचिका मैं हाई कोर्ट के उसे आदेश पर चुनौती दी गई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
इस मामले में सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की कुछ सीमाएं होती हैं और मंदिर प्रबंधन ही ऐसे मुद्दों पर फैसला करता है वीआईपी एंट्री की अनुमति मंदिर प्रबंधन करेगा ,कोर्ट नहीं। क्योंकि गर्भ गृह के अंदर मौलिक अधिकारों को सख्ती से लागू करने का अधिकार मंदिर प्रबंधन को होना चाहिए।
CJI सूर्यकांत ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, अगर अदालत ये तय करने लगे कि मंदिर में कौन जाएगा और कौन नहीं, तो कोर्ट का भार बहुत बढ़ जाएगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने वीआईपी दर्शन के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है…