24 अप्रैल 2026:
महंगी किताबें से अब होगा छुटकारा: प्राइवेट स्कूलों में भी चलेगी अब एनसीईआरटी की किताबें:
निजी स्कूलों की मनमानी और महंगी किताबें खरीदने के दबाव से यदि आप मजबूर हैं तो यह आपके लिए एक बड़ी राहत की खबर है।
दरअसल मानवाधिकार आयोग ने अब यह साफ कहा है कि सरकारी स्कूल हो या प्राइवेट स्कूल सभी बच्चों के लिए अब एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई की जाएगी। यदि बच्चों के पास कोई दूसरी किताबें मिलती हैं या प्राइवेट स्कूल की , प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें मिलती हैं तो स्कूल को उसका जवाब देना पड़ेगा।
महंगी किताबें से अब मिलेगी आजादी:
अक्सर यह देखा जाता है कि बच्चों को प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने की या स्कूल की बताई दुकान से महंगी किताबें खरीदने का दबाव डाला जाता है। अब प्राइवेट स्कूल के कमीशन वाले खेल पर अब लगाम लगाने का या शिकंजा कसने की तैयारी है। प्राइवेट स्कूल की मनमानी के कारण हर साल महंगी किताबें खरीदने का जो दबाव डाला जाता है, अब मानवाधिकार आयोग ने यह साफ कर दिया है कि बच्चों के साथ यह भेदभाव नहीं किया जाएगा। चाहे सरकारी स्कूल हो या निजी स्कूल सभी में एनसीईआरटी की किताबें ही चलेंगीं ।
स्कूलों की मनमर्जी पर रोक:
अब स्कूल अपनी मर्जी से कोई भी किताब छात्रों पर नहीं थोप पाएंगे। प्रशासन ने दावा किया है कि 30 दिनों के भीतर हर स्कूल का ऑडिट किया जाएगा । यदि किसी के पास एनसीईआरटी के अलावा कोई दूसरी किताबें मिलती हैं तो स्कूलों को इसका जवाब देना पड़ेगा। इसके अलावा मानवाधिकार आयोग ने सख्त लहजे में कहा है कि शिक्षा के अधिकार के तहत ,आरटीई नियमों के अनुसार पाठ्यक्रम एक जैसा ही होना चाहिए और 30 दिनों में सभी राज्य सरकारों को अपनी रिपोर्ट आयोग को भेजना होगा।
दरअसल देश भर से मिली शिकायतों के बाद राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर मानवाधिकार आयोग की प्रियंका कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में एनसीईआरटी की किताबों को लेकर 30 दिन में रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह कार्रवाई ‘नमो फाउंडेशन’ की ओर से की गई शिकायतों के अनुसार की गई । शिकायत में कहा गया कि निजी स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने को बोलते हैं, जो एनसीईआरटी की किताबों के मुकाबले करीब 10 गुना तक महंगी होती है । आयोग ने प्रशासन से 30 दिन में स्कूल का ऑडिट करने को कहा । वहीं ‘नेशनल स्कूल बैग पॉलिसी’ 2020 का सख्ती से लागू करने के निर्देश भी जारी किए । आयोग ने साफ किया कि ज्यादा किताबें और भारी बोझ वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जाए।
आयोग ने राज्य से क्या जानकारियां मांगी:
मानवाधिकार आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव को नोटिस भेजा है और तीन प्रमुख जानकारियां मांगी गई है।
1.. जिले के शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों को एनसीईआरटी के किताबें पढ़ने का क्या आदेश जारी किया है।
2..यदि नहीं दिया है तो आदेश तुरंत जारी करें और स्कूलों की लिस्ट चेक करें।
3..2025 -26 में कितने बच्चों ने सरकारी और प्राइवेट स्कूल में प्रवेश लिया है और उनके लिए कौन सी किताबें खरीदी गई हैं।


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