ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर रामगोपाल यादव की विवादित टिप्पणी
संवाददाता
15 May 2025
अपडेटेड: 1:05 PM 0thGMT+0530
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विंग कमांडर व्योमिका सिंह पर रामगोपाल यादव की विवादित टिप्पणी
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. भारतीय वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह के बारे में सपा नेता और पूर्व सांसद रामगोपाल यादव की ओर से की गई जातिसूचक टिप्पणी ने राजनीतिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है. इससे पहले सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था, अब विंग कमांडर व्योमिका को लेकर की गई टिप्पणी से मामला और गरमा गया है.
गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रामगोपाल यादव ने कहा,
“विंग कमांडर व्योमिका सिंह हरियाणा की जाटव हैं… लेकिन भाजपा ने उन्हें राजपूत समझकर उन पर कोई आपत्ति नहीं जताई, जबकि एक मुसलमान होने के कारण मध्य प्रदेश के भाजपा मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी को अपमानित किया.”
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर में एयर ऑपरेशन को अंजाम देने वाले एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती यादव हैं. एक मुसलमान, एक दलित और एक पिछड़ा—तीनों ही PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग से हैं. पूरा युद्ध इन तीनों ने लड़ा. फिर भाजपा किस आधार पर इसका श्रेय लेना चाहती है?”
‘सेना के पराक्रम का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश’
रामगोपाल यादव ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सेना के पराक्रम का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है.
उन्होंने कहा,
“पहली बार ऐसा हुआ है कि देश का राजनीतिक नेतृत्व सेना की वीरता का श्रेय खुद लेना चाहता है. जब-जब पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने युद्ध लड़ा है, तब-तब हमारी सेना विजयी रही है, लेकिन कभी किसी राजनीतिक दल ने इसका श्रेय नहीं लिया.”
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए युद्धविराम को भी भाजपा चुनावी मुद्दा बना रही है.
“जब सीजफायर हुआ, तो ऐसा लगा कि अब पाकिस्तान से घुसपैठ नहीं होगी. लेकिन जम्मू-कश्मीर में रोजाना आतंकी मार गिराए जा रहे हैं, जिससे साफ है कि आतंकवाद अब भी जारी है. भाजपा तो बस चुनाव के लिए तिरंगा यात्रा निकाल रही है.”
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया संभव
रामगोपाल यादव की टिप्पणी के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आ सकती है. खासतौर पर जातिगत और धार्मिक आधार पर सेना के अफसरों के योगदान को बांटने की कोशिश को लेकर.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से देश की सशस्त्र सेनाओं की गैर-राजनीतिक और एकजुट छवि को नुकसान पहुंच सकता है.
इस पूरे घटनाक्रम ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बहादुरी और देशभक्ति के भाव के बजाय, राजनीतिक श्रेय और जातिगत विवाद की बहस को जन्म दे दिया है.